"हम दो, दो चार और होने दो", बालमुकुंद आचार्य ने हिंदुओं से संतान बढ़ाने की अपील की
भाजपा के वरिष्ठ विधायक बालमुकुंड आचार्य ने मोहन भागवत के विचारों का समर्थन करते हुए परिवार वृद्धि और सामाजिक जिम्मेदारियों पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में छोटे परिवार के चलते सामाजिक तथा सुरक्षा चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं.
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने पर संघ देश के अलग-अलग राज्यों में हिंदुओं को संगठित करने के लिए कार्यक्रम चला रहा है.
बालमुकुंद आचार्य ने किया मोहन भागवत का समर्थन
संघ प्रमुख मोहन भागवत लगातार हिंदुओं से परिवार बढ़ाने और कम से कम तीन बच्चों को जन्म देने की बात कर रहे हैं. उनके बयान पर भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है और उनकी विचारधारा का समर्थन भी किया है.
भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य का बयान
भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा, "भारत की परंपरा को देखिए, राजा दशरथ का एक विशाल परिवार था. राम जी और लक्ष्मण जी वनवास चले गए, जबकि दो पुत्र पीछे रह गए. एक राज्य के लिए, एक परिवार के लिए. भारत में आजकल 'हम दो, हमारा एक' की परंपरा चल पड़ी है, इसलिए मैं नई पीढ़ी के उन भारतीयों से, जिन्होंने एक ही संतान पर संतोष कर लिया है, उनसे पूछना चाहता हूं कि कौन सैनिक बनेगा? कौन पुलिस में शामिल होगा? कौन इस राष्ट्र, भारत माता और हमारे धर्म की रक्षा के लिए आरएसएस स्वयंसेवक बनेगा? और कौन बड़ों, समाज, परिवार और माता-पिता की सेवा करेगा?"
"हमें 'हम दो, दो चार और होने दो' की पद्धति को अपनाना चाहिए"
बालमुकुंद आचार्य ने आगे कहा, "हमें 'हम दो, दो चार और होने दो' की पद्धति को अपनाना चाहिए. इसी से हमारा देश आगे बढ़ेगा और समृद्धि की राह पर चलेगा. यह भी समझना जरूरी है कि देश का एक वर्ग संख्या बढ़ाने में है और दूसरा घटाने में लगा है. यह चिंता का विषय है क्योंकि अगर हम दो और हमारा एक रहेगा, तो हमारे रिश्ते खत्म हो जाएंगे. न कोई चाचा रहेगा और न कोई मौसी."
बजट पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "भजनलाल शर्मा ने एक ऐतिहासिक बजट पेश किया है और हर वर्ग का ध्यान रखा है, चाहे वो गरीब वर्ग हो या फिर हमारी बहनें और माताएं. पुराने समय से ही हमारे यहां महिलाओं को सर्वोच्च पद दिया गया है और बजट में उसका विशेष ध्यान रखा गया है."
बता दें कि हाल ही में लखनऊ में हुए कार्यक्रम में मोहन भागवत ने सभी हिंदुओं से एकजुटता की मांग की थी. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि जिस समाज में तीन बच्चे नहीं होते हैं, उसका भविष्य खतरे में पड़ जाता है, और यही हिंदुओं के साथ भी हो सकता है.
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