ASP अनुज चौधरी पर दर्ज नहीं होगी FIR, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द किया CJM कोर्ट का आदेश

फिरोजाबाद के ASP अनुज चौधरी पर FIR के आदेश के फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी. सुनवाई में हाई कोर्ट ने CJM कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है.

Author
10 Feb 2026
( Updated: 10 Feb 2026
03:56 PM )
ASP अनुज चौधरी पर दर्ज नहीं होगी FIR, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रद्द किया CJM कोर्ट का आदेश

संभल हिंसा मामले में UP के चर्चित ASP अनुज चौधरी के खिलाफ FIR के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. कोर्ट ने 9 जनवरी के निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दी है. CJM कोर्ट ने अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR का आदेश दिया था. 

दरअसल, 24 नवंबर 2024 को संभल के कोतवाली क्षेत्र में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़की थी. उस समय वहां मौजूद नई सराय मोहल्ले के रहने वाले यामीन ने अनुज चौधरी के खिलाफ CJM कोर्ट में याचिका दायर की थी. यामीन ने दावा किया था कि वह हिंसा के वक्त मौके पर मौजूद था और पुलिस की तीन गोलियां का शिकार हुआ था. यामीन के पिता का आरोप था कि पुलिस अधिकारियों ने उसके बेटे को जान से मारने की नीयत से गोली चलाई थी. 

‘BNS की सीमाओं का उल्लंघन’

तत्कालीन CJM जज विभांशु सुधीर ने मामले पर सुनवाई करते हुए 9 जनवरी को 22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR के आदेश दिए थे, बाद में जज विभांशु का तबादला हो गया था. राज्य सरकार और अनुज चौधरी ने आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. सभी पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस समित गोपाल ने CJM कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया. राज्य सरकार और अनुज चौधरी की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल और अधिवक्ता एके संड ने पक्ष रखा. मनीष गोयल का कहना था कि मजिस्ट्रेट ने BNS की सीमाओं का उल्लंघन किया है और कानून में निहित अनिवार्य सुरक्षा प्रावधानों की अनदेखी की है. 

उन्होंने BNS की धारा 175 के तहत FIR दर्ज करने का आदेश तो किया लेकिन धारा 175 (4) में निर्धारित कठोर और अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया. 

अपर महाधिवक्ता ने कहा कि BNS की धारा 175 (4) के तहत किसी लोक सेवक के विरुद्ध जांच का आदेश देने से पहले मजिस्ट्रेट को दो चरणों की प्रक्रिया अपनानी होती है. यह भी तर्क दिया गया कि शिकायतकर्ता ने प्रार्थना पत्र में यह तक नहीं बताया कि उसने पहले संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराई या नहीं, जबकि यह कानून के तहत एक जरूरी शर्त है. अपर महाधिवक्ता ने कहा कि CJM ने न केवल अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश किया बल्कि पुलिस रिपोर्ट को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया कि घटना के संबंध में पहले से एक मुकदमा दर्ज है और उसकी जांच चल रही है. 

क्या है संभल हिंसा मामला? 

24 नवंबर 2024 को संभल के कोतवाली इलाके में शाही जामा मस्जिद बनाम श्री हरिहर मंदिर स्थल के मुद्दे पर टीम सर्वे करने गई थी. इस दौरान टीम पर पथराव किया गया. पथराव के बाद इलाके में हिंसा भड़क गई. ये सर्वे का दूसरा चरण था. इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे. 

कौन हैं अनुज चौधरी? 

अनुज चौधरी की गिनती UP के धाकड़ अफसरों में होती है. उनकी छवि तेज-तर्रार और दमदार पुलिसकर्मी की है. वह संभल में CO के पद पर तैनात थे, बाद में योगी सरकार ने उनका प्रमोशन करते हुए ASP के पद पर उन्हें फिरोजाबाद में तैनाती दी. यहां आते ही उन्होंने बदमाशों का एनकाउंटर शुरू कर दिया. 

यह भी पढ़ें- ASP अनुज चौधरी पर FIR का आदेश देने वाले जज विभांशु का तबादला क्यों हुआ, जानिए वजह

यह भी पढ़ें

फिरोजाबाद के ASP अनुज चौधरी उस वक्त चर्चा में आ गए थे जब एनकाउंटर के दौरान बदमाश ने उन्हें गोली मार दी थी. पुलिस ने फिरोजाबाद के मक्खनपुर इलाके में इनामी बदमाश नरेश पंडित उर्फ पंकज को एनकाउंटर में मार गिराया था. इस ऑपरेशन का नेतृत्व संभल के चर्चित CO रहे अनुज चौधरी ने किया था. 

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

LIVE
Advertisement
Podcast video
पति, तलाक, ससुर, हलाला… आंसुओं में डूबी मुस्लिम बेटी का ये दर्द सुन रूह कांप जाएगी!
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें