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‘आखिरकार बहनजी ने मान लिया…’, मायावती के आरोपों पर नगीना सांसद का पलटवार, BSP चीफ की बड़ी गलती सुधारी
BSP चीफ मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग, EVM और SIR को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. इस दौरान उन्होंने नगीना सीट का उदाहरण देते हुए चंद्रशेखर पर हमला बोला.
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बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि आजाद का अपना कोई जनाधार नहीं है उन्होंने लोकसभा चुनाव में नगीना सीट BJP की वजह से दर्ज की.
BSP चीफ मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग, EVM और SIR को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. इस दौरान उन्होंने नगीना सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार की जीत को लेकर भी स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं और आशंकाएं हैं. मायावती ने बड़ा रोप लगाते हुए कहा,
‘BJP ने नगीना में EVM में गड़बड़ी करवाकर चंद्रशेखर आजाद को चुनाव जितवाया और नगीना सांसद BJP के इशारे पर काम करते हैं.’
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चंद्रशेखर की राजनीति पर उठाए सवाल
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मायावती ने चंद्रशेखर की आंदोलन की राजनीति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए कि नगीना सांसद पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय धरना-प्रदर्शन करवाते हैं, नतीजा ये निकलता है कि युवाओं पर केस दर्ज होते हैं. इस दौरान मायावती ने दलित वर्ग के युवाओं से ऐसे आंदोलन से दूर रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि युवा नगीना सांसद के बहकावे में न आएं.
चंद्रशेखर आजाद ने मायावती के बयान पर क्या कहा?
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मायावती के आरोपों के बाद नगीना सांसद ने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए जवाब दिया. उन्होंने लिखा, माननीया बहिन जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग, EVM और नगीना लोकसभा चुनाव के संबंध में मेरे बारे में कही गई बातों को मैंने सुना.
खैर, बहनजी का लिखित प्रेस नोट कहीं से भी लिखकर आया हो, लेकिन मुझे खुशी इस बात की है कि जो लोग कभी कहते थे, कौन चंद्रशेखर?, उन्हें इस देश की जनता ने बता दिया कि हमारे लिए लड़ने वाला, सड़क पर संघर्ष करने वाला चंद्रशेखर कौन है. मुझे खुशी है कि अब माननीया बहनजी ने यह मान लिया है कि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) एक बड़ी ताकत बन गई है.
चंद्रशेखर आगे लिखते हैं, माननीया बहिन जी के प्रति मेरे मन में सदैव सम्मान रहा है. उसी सम्मान के साथ उनसे कहना चाहता हूं कि नगीना की जनता ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मुझे 5,12,552 वोट देकर अपना प्रतिनिधि चुना. मेरे लिए यह केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि नगीना की जनता के भरोसे और प्रेम की जिम्मेदारी है. इस जनादेश के लिए मैं नगीना की जनता का सदैव ऋणी रहूंगा.
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मतभेद है मनभेद नहीं…
चंद्रशेखर आजाद ने कहा, चुनाव प्रक्रिया और EVM की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाना लोकतंत्र में सभी का अधिकार है. मैं खुद भी चुनाव प्रक्रिया में अधिकतम पारदर्शिता और मतपत्र से चुनाव की मांग करता रहा हूं, लेकिन नगीना की महान जनता ने जिस प्रेम और विश्वास के साथ मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, उस जनादेश को किसी षड्यंत्र से जोड़ने से उन लाखों मतदाताओं की भावना भी आहत होती है, जिन्होंने अपने विवेक से मतदान किया.
चंद्रशेखर ने कहा, मेरी राजनीति किसी व्यक्ति के विरोध पर नहीं, बल्कि बहुजन समाज के सम्मान, सामाजिक न्याय और संविधान की रक्षा के संघर्ष पर आधारित है. मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बहुजन समाज के बीच संवाद, सम्मान और भाईचारा बना रहना चाहिए. माननीय बहिन जी के प्रति मेरा सम्मान कल भी था, आज भी है और आगे भी सदैव रहेगा. आपके आशीर्वाद की प्रतीक्षा हमेशा रहेगी.
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नगीना सांसद ने मायावती की एक गलती भी बताई. जो उन्होंने चंद्रशेखर की पार्टी का नाम लेते हुए की थी. उन्होंने कहा, अंत में इतना कहना चाहता हूं कि माननीया बहिन जी आपके आशीर्वाद से हमारी पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) है, आजाद समाजवादी पार्टी नहीं.
मायावती ने की EVM बंद करने की मांग
BSP चीफ मायावती ने EVM से चुनाव कराने की प्रक्रिया पर फिर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल बंद कर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की है. उन्होंने कहा कि चुनाव में मतदाता को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि उसने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसका मत उसी के खाते में गया और गिनती में शामिल हुआ. वोट को लेकर संदेह की स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है.
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मायावती ने सोमवार को मीडिया को जारी बयान में कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार दिया है और निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक मतदाता बिना किसी संदेह के अपने मत के सुरक्षित और सही तरीके से दर्ज होने को लेकर आश्वस्त रहे.
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उन्होंने कहा, देश में शुरुआती कई दशकों तक बैलेट पेपर के जरिए चुनाव होते रहे और मतगणना के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्रों की गिनती की जाती थी.