'इनको तो BJP ने जिताया...', दलित समुदाय की बात करने वाले 'चंद्रशेखर' पर मायावती ने पहली बार क्यों बोला हमला?
बसपा चीफ मायावती ने चंद्रशेखर आजाद पर तीखा हमला बोलते हुए उनके जनाधार पर सवाल उठाया और 2024 के नगीना चुनाव में बीजेपी की मदद व EVM में गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने दलित समाज से चंद्रशेखर के बहकावे में न आने की अपील की.
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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अब सियासी पार्टियों ने अपनी तैयारियों को शुरू कर दिया है. सूबे में नेताओं के बीच जमकर ज़ुबानी जंग भी अब देखने को मिल रही है. इसी कड़ी में अब सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा की प्रमुख मायावती की एंट्री भी हो चुकी है. ताजा मामला नगीना से सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर से जुड़ा है. बसपा चीफ ने उन पर तीखा हमला बोला है.
चंद्रशेखर की BJP ने की मदद
मायावती ने चंद्रशेखर आजाद के राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि उनका अपना कोई मजबूत जनाधार नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नगीना सीट पर उन्हें जीत दिलाने में भूमिका निभाई थी. मायावती ने चुनाव में EVM को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि नगीना में EVM में गड़बड़ी के जरिए चंद्रशेखर को चुनाव जिताया गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि नगीना सांसद बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं. चंद्रशेखर की आंदोलन आधारित राजनीति पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि पीड़ितों की समस्याओं का समाधान कराने के बजाय धरना-प्रदर्शन की राजनीति की जाती है, जिसका खामियाजा युवाओं को मुकदमों के रूप में भुगतना पड़ता है. मायावती ने दलित समाज से अपील की कि वह ऐसे नेताओं के बहकावे में आने से बचे.
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मायावती और चंद्रशेखर दोनों ने साधा था अखिलेश पर निशाना
जानकारी देते चलें कि मायावती और चंद्रशेखर आजाद दोनों ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले पर सवाल उठा चुके हैं. चंद्रशेखर आजाद ने PDA को लेकर सपा पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि 'कह लेने दो भाई PDA, पीड़ित है, ये बात सही है मगर उनके वाला नहीं.' उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि समाजवादी पार्टी का PDA समय के साथ बदलता रहता है और इसमें कभी पीढ़ी, कभी पंडित तो कभी अगड़ी और पिछड़ी जाति जैसे अलग-अलग समीकरणों की बात होती है. चंद्रशेखर ने कहा था कि किसे पीड़ित माना जाए, यह भी वही लोग तय करते हैं. वहीं, मायावती ने भी अखिलेश यादव की PDA रथ यात्रा को लेकर निशाना साधा था और रथ के रंग को लेकर सवाल उठाते हुए सपा की राजनीतिक रणनीति पर तंज कसा था.
मुस्लिम समीकरण को लेकर कसा था तंज
मायावती ने उस समय सपा की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लोगों के बीच यह चर्चा चल रही थी कि क्या समाजवादी पार्टी वोटों के समीकरण को साधने के लिए बार-बार अपना राजनीतिक रंग बदल रही है या फिर उसे मुस्लिम वोटों के समर्थन को लेकर भरोसा नहीं रह गया है. उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज के एक वर्ग के बीच यह सवाल उठने लगा था कि पिछले चुनावों में सपा को बड़े पैमाने पर समर्थन देने के बावजूद पार्टी बीजेपी को यूपी और केंद्र में सरकार बनाने से नहीं रोक सकी. ऐसे में बार-बार उसी पार्टी को वोट देकर अपने मत का इस्तेमाल क्यों किया जाए, यह चर्चा का विषय बन रहा था. मायावती ने दावा किया था कि इसी वजह से मुस्लिम समाज के रुख में बदलाव दिखाई दे रहा है और उसका झुकाव बीएसपी की ओर बढ़ रहा है.
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बहरहाल, यूपी की सियासत में बयानों का दौर तेज है और विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं. मायावती, चंद्रशेखर और अखिलेश यादव के बीच जारी जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है.