वाराणसी में फिर गरजा बुलडोजर, अवैध जायका रेस्टोरेंट ध्वस्त, नोटिस के बाद भी चल रहा था काम, VDA का एक्शन
आरोप है कि रेस्टोरेंट मालिक इमरान कादरी ने बिना नक्शा पास करवाए रेस्टोरेंट का निर्माण करवाया था. कुछ दिन पहले प्रशासन ने नोटिस भी जारी किया था.
Follow Us:
Varanasi Bulldozer Action: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक बार फिर अवैध निर्माण पर बुलडोजर गरजा है. वाराणसी विकास प्राधिकरण ने कैंट इलाके में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रेस्टोरेंट को जमींदोज किया है. यह रेस्टोरेंट कचहरी चौराहे पर चौराहे के पास स्थित है.
बताया जा रहा है वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) ने यहां जायका रेस्टोरेंट को अवैध करार देते हुए नोटिस जारी किया था. इसके बावजूद रेस्टोरेंट संचालक ने कोई एक्शन नहीं लिया. इसके बाद प्रशासन का बुलडोजर पहुंचा और मौके पर कार्रवाई शुरू की गई. बुलडोजर एक्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा.
अवैध ‘जायका’ पर बुलडोजर से प्रहार
25 सितंबर यानी शुक्रवार सुबह दो बुलडोजर इलाके में पहुंचे और अवैध रेस्टोरेंट को तोड़ना शुरू किया. इस दौरान भारी भीड़ जमा हो गई, हालांकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन के माकूल इंतजाम थे. वहीं, कार्रवाई स्थल के आस-पास पुलिस ने बैरिकेंडिंग भी लगा रही थी. साथ ही साथ सुरक्षा के भी इंतजाम किए गए थे.
वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) ने यहां जायका रेस्टोरेंट को अवैध करार देते हुए बुलडोजर कार्रवाई की है. प्रशासन ने पहले नोटिस जारी किया था. बुलडोजर एक्शन के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा. #Varanasi #UPNews pic.twitter.com/jybNwTkpiJ
— NMF NEWS (@NMFNewsNational) September 25, 2026
इससे पहले दालमंडी इलाके में चौड़ीकरण के लिए कई दुकानों और अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला था. इस बार कैंट के कचहरी इलाके में बुलडोजर गरजा. ये रेस्टोरेंट मुस्लिम व्यापारी इमरान कादरी का बताया जा रहा है. आरोप है कि इस रेस्टोरेंट के लिए नक्शा पास नहीं हुआ था, बावजूद इसके निर्माण करवाया गया. अब सड़क चौड़ीकरण के दौरान प्रशासन ने रेस्टोरेंट को रास्ते से हटा दिया. प्रशासन के मुताबिक विभागीय जांच में निर्माण अवैध पाए जाने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई.
यह भी पढ़ें- दिल्ली में आधी रात चला बुलडोजर, अतिक्रमण की ज़द में आई मदीना मस्जिद, हो गया तगड़ा एक्शन!
यह भी पढ़ें
वहीं, भवन मालिक की ओर से आरोप लगाया गया है कि कार्रवाई से पहले पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कानूनी विकल्प अपनाने का मौका नहीं मिला. दावा है कि नगर निगम पहले ही भवन को जर्जर घोषित कर चुका था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई.