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बाराबंकी-बहराइच 4-लेन हाईवे को मंजूरी, ₹6,969 करोड़ की परियोजना से यूपी-नेपाल कनेक्टिविटी होगी मजबूत

सरकार ने इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत मंजूरी दी है. यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का एक मॉडल है, जिसमें 40 प्रतिशत लागत सरकार और 60 प्रतिशत निजी क्षेत्र वहन करता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में बाराबंकी से बहराइच तक 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे बनाने की परियोजना को मंजूरी दे दी. इस परियोजना पर लगभग 6,969.04 करोड़ रुपए खर्च होंगे. यह 101.515 किलोमीटर लंबे एनएच-927 को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत विकसित किया जाएगा. 

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

उत्तर प्रदेश में एनएच-927 के बाराबंकी-बहराइच सेक्शन को अपग्रेड करने से इस इलाके में मौजूद सड़क की कई तकनीकी समस्याएं दूर होंगी. अभी यहां तेज मोड़, खराब ज्यामितीय डिजाइन और आबादी वाले क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या रहती है. नई 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड सड़क और लगातार सर्विस रोड बनने से इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.

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मौजूदा समस्याओं का समाधान

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एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हाईवे बड़े कस्बों और गांवों के बीच से गुजरने के बजाय उन्हें बाईपास करेगा. इससे वाहनों की औसत गति बढ़ेगी और यात्रा का समय घटकर करीब एक घंटे रह जाएगा.

इसके अलावा सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, ईंधन की बचत होगी और वाहनों के संचालन की लागत भी कम होगी. साथ ही इससे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

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कनेक्टिविटी और विकास को बढ़ावा

यह परियोजना राज्य के कई महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देगी. अपग्रेड होने के बाद यह कॉरिडोर तीन आर्थिक केंद्रों, दो सामाजिक केंद्रों और 12 लॉजिस्टिक्स केंद्रों से जुड़ जाएगा, जिससे रुपईडीहा लैंड पोर्ट और हवाई अड्डों से बेहतर मल्टीमोडल कनेक्टिविटी होगी और इस प्रकार पूरे क्षेत्र में माल और यात्रियों की आवाजाही तेज हो सकेगी.

परियोजना पूरी होने के बाद यह सड़क भारत और नेपाल के बीच व्यापार और आवागमन के लिए एक अहम कॉरिडोर बनकर उभरेगी. खासतौर पर नेपालगंज सीमा के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और रुपईडीहा लैंड पोर्ट तक पहुंच आसान होगी. इससे बहराइच और श्रावस्ती जैसे दूरदराज जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी.

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यह परियोजना पीएम गतिशक्ति के तहत आर्थिक और लॉजिस्टिक्स नोड्स को मजबूत करेगी और कृषि व्यापार, पर्यटन, सीमा पार व्यापार तथा क्षेत्रीय निवेश को बढ़ावा देगी.

सरकार ने इस परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) के तहत मंजूरी दी है. यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का एक मॉडल है, जिसमें 40 प्रतिशत लागत सरकार और 60 प्रतिशत निजी क्षेत्र वहन करता है. इससे डेवलपर्स पर वित्तीय दबाव कम होता है और उन्हें स्थिर रिटर्न मिलता है, जबकि राजस्व से जुड़ा जोखिम सरकार अपने पास रखती है.

दूसरी बड़ी परियोजना

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इस महीने आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति द्वारा मंजूर की गई यह दूसरी बड़ी हाईवे परियोजना है. इससे पहले 10 मार्च को 3,630.77 करोड़ रुपए की लागत से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक नई सड़क कनेक्टिविटी बनाने को मंजूरी दी गई थी.

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करीब 31.42 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर से दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक सीधी और तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आर्थिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स को बड़ा फायदा होगा.

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