किसानों के लिए बड़ा तोहफा, 402 करोड़ की परियोजना से हजारों को फायदा, हरियाणा सरकार का बड़ा कदम
Haryana: इन योजनाओं का मकसद नहर के पानी को बेकार बहने से रोकना और सौर ऊर्जा के जरिए सिंचाई को सस्ता और आसान बनाना है. इससे बिजली खर्च कम होगा और किसान कम लागत में बेहतर खेती कर सकेंगे. यह परियोजनाएं भिवानी, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ जिलों के 20 ब्लॉकों में 61 नहर आउटलेट पर लागू की जाएंगी.
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Haryana Farmers Yojana: Haryana सरकार ने खेती और पानी की समस्या को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया है. राज्य में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सरकार ने नई योजनाओं को मंजूरी दी है. राज्य स्तरीय स्वीकृति समिति (SLSC) की बैठक में मुख्य सचिव अनुराग ने सूक्ष्म सिंचाई और कमान एरिया विकास प्राधिकरण (मिकाडा) के तहत चार सौर ऊर्जा आधारित एकीकृत सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को हरी झंडी दी है. इन परियोजनाओं की कुल लागत 402.41 करोड़ रुपये है.
इन योजनाओं का मकसद नहर के पानी को बेकार बहने से रोकना और सौर ऊर्जा के जरिए सिंचाई को सस्ता और आसान बनाना है. इससे बिजली खर्च कम होगा और किसान कम लागत में बेहतर खेती कर सकेंगे. यह परियोजनाएं भिवानी, झज्जर, कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ जिलों के 20 ब्लॉकों में 61 नहर आउटलेट पर लागू की जाएंगी.
जिला-वार बजट और काम पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने इन परियोजनाओं को 2026-27 से 2028-29 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा है. अलग-अलग जिलों के लिए बजट भी तय कर दिया गया है. महेंद्रगढ़ जिले को 114.78 करोड़ रुपये, झज्जर को 114.68 करोड़ रुपये, भिवानी को 95.78 करोड़ रुपये और कुरुक्षेत्र को 77.17 करोड़ रुपये दिए जाएंगे.
इस योजना के तहत 61 नहर आउटलेट से करीब 11,040 हेक्टेयर जमीन को आधुनिक ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम से जोड़ा जाएगा. इससे 94 गांवों के लगभग 8,926 किसानों को सीधा फायदा होगा. ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम से पानी की बचत होगी और फसल की पैदावार भी बेहतर होगी। कम पानी में ज्यादा उत्पादन संभव हो सकेगा.
पारदर्शिता और निगरानी पर खास ध्यान
सरकार ने यह भी साफ किया है कि योजना में पारदर्शिता बनाए रखना बहुत जरूरी है. इसके लिए मिकाडा पोर्टल को GST पोर्टल से जोड़ा जाएगा, ताकि फर्जी बिलिंग और गड़बड़ी को रोका जा सके. इससे सरकारी पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित होगा.
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए पानी की मांग और आपूर्ति का सही प्रबंधन जरूरी बताया गया है, ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (PDMC) दिशा-निर्देशों के तहत 147 निर्माताओं और सप्लायर्स का पंजीकरण किया गया है, ताकि गुणवत्ता में कोई कमी न आए. अगर किसी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
छोटे और सीमांत किसानों को विशेष लाभ
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें छोटे, सीमांत और अनुसूचित जाति के किसानों पर खास ध्यान दिया गया है. सरकार चाहती है कि जिन किसानों के पास कम जमीन है, उन्हें भी आधुनिक तकनीक का पूरा फायदा मिले. इसके लिए 20 प्रतिशत स्वतंत्र निगरानी की व्यवस्था की गई है, ताकि काम की गुणवत्ता बनी रह.
सरकार सार्वजनिक-निजी-CSR मॉडल पर भी विचार कर रही है, जिससे किसानों को लंबे समय तक सहायता मिल सके. इस पहल से न सिर्फ भूजल स्तर सुधरेगा, बल्कि खेती की लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. यह कदम हरियाणा में टिकाऊ और आधुनिक खेती की दिशा में एक मजबूत प्रयास माना जा रहा है.
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