लालू के लाल तेज प्रताप यादव ने जिन पांच 'जयचंदों' का पहली बार खुलकर लिया नाम, वो आखिर हैं कौन, जानें
लालू के बड़े लाल तेज प्रताप यादव ने पहली बार उन कथित पांच जयचंदों का नाम लिया है, जिन पर शक है कि उन्होंने तेज प्रताप के खिलाफ साजिश रची और पार्टी-परिवार से बेदखली में भूमिका निभाई.
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बिहार की राजनीति, खासकर RJD में एक बार फिर भूचाल आ गया है. RJD सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने पहली बार 'जयचंदों' का नाम सीधे-सीधे लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है. कहा जा रहा है कि ये मामला यहीं खत्म नहीं होने वाला है. दरअसल कई महीनों पहले, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अनुष्का के साथ उनके कथित प्रेम संबंधों के मामले सामने आने के बाद उन्हें करीब 6 साल के लिए परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिया गया था. जिस कारण उन्हें चुनाव भी अकेले, अपनी पार्टी बनाकर लड़ना पड़ा. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम का जिम्मेदार तेजस्वी के करीबी लोगों औक राजद के फैसलों में सक्रिय कई लोगों को जिम्मेदार ठहराया था.
उन्होंने अनुष्का के साथ उनके रिश्तों को जोड़े जाने को भी इसी साजिश का माना था. हालांकि अब उन्होंने एक बार फिर अपनी चुप्पी तोड़ी है और विस्फोटक खुलासा किया है. उन्होंने कहा अनुष्का के साथ रिश्तों पर कहा कि ना तो उनका उनसे कोई संबंध है और ना ही उनका बच्चा है. तेज प्रताप ने आगे कहा कि तेजप्रताप ने आरोप लगाया कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और इसके लिए वे दिल्ली में पीएम मोदी से भी मुलाकात करेंगे. उन्होंने कहा कि आकाश भाटी बेहतर जवाब दे सकते हैं, जिनका अनुष्का के साथ संबंध है. ये तो रही उनके निजी जीवन और आरोपों को लेकर उनका जवाब, लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक करियर और उसे दांव पर लगाने को लेकर कई आरोप लगाए हैं.
तेज प्रताप यादव ने किन्हें कहा जयचंद?
तेज प्रताप यादव ने राजद में कथित तौर पर मौजूद 5 लोगों को ‘जयचंद’ बताते हुए दावा किया कि उन्हें बर्बाद करने और फंसाने के लिए यह साजिश रची जा रही है. उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही जयचंदों के नाम लिए हैं. मुकेश रौशन द्वारा षड्यंत्र रचकर मुझे फंसाया जा रहा है. यह बहुत घिनौना काम है. उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ जो साजिश रची जा रही है, मैं इस मामले में गृह मंत्री से मिलूंगा और कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाऊंगा. मेरे पास सिर्फ पांच जयचंद नहीं हैं, बल्कि जयचंदों की एक हजार की लिस्ट है. तेज प्रताप यादव ने कहा कि हम सच्चे हैं, इसलिए हमें परेशान किया जा रहा है. लेकिन आखिरकार सच्चाई की ही जीत होगी.
उन्होंने कहा कि दही-चूड़ा का कार्यक्रम हुआ, मेरे पिताजी आए, तो जयचंदों को रास नहीं आ रहा. अभी हम एक और कार्यक्रम करने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही साजिश रची जा रही है. मुझे बदनाम किया जा रहा है. मैं प्रधानमंत्री मोदी से भी मिलूंगा और उन्हें बताऊंगा कि कैसे हमें बदनाम किया जा रहा है.
तेज प्रताप ने कहा कि दिन-रात मुझे परेशान किया जा रहा है. मैं क्या करूं, फांसी लगा लूं क्या? मुझे पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया गया है. मुकेश रौशन मेरी हत्या कराना चाहते हैं. यह साजिश रची जा रही है. उसे पकड़ा जाए.
कौन हैं मुकेश रौशन?
आपको बताएं कि तेज प्रताप ने जिन लोगों को जयचंद कहकर संबोधित किया है, उनमें एक प्रमुख नाम है मुकेश रोशन का. तेजस्वी और लालू परिवार के बेहद करीबी, तेज तर्रार पूर्व महुआ विधायक मुकेश रौशन का युवा राजद पर भी काफी प्रभाव है. उनका बीते विधानसभा में जीतना तय माना जा रहा था, लेकिन तेज प्रताप और बीजेपी के उम्मीदवार के साथ त्रिकोणीय मुकाबले में उनकी हार हो गई. तेजप्रताप ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि साजिश रचने वाले समूह का संचालन रौशन करते हैं. उन्होंने यहां तक दावा किया कि वे उनकी हत्या करवाना चाहते हैं. तेज प्रताप ने एक और दावा किया कि रौशन ने ही जिन्होंने उनके अकाउंट हैक कर अफवाहें फैलवाईं. तेज प्रताप ने उन्हें पांच जयचंदों में पहला नाम करार दिया है.
तेजस्वी के मित्र, करीबी और आंख-नाक, कान संजय यादव कौन?
तेज प्रताप ने एक शख्स, जिन्हें जयचंद करार दिया है, उनमें से एक हैं संजय यादव. वो फिलहाल राजद के कोटे से वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं. तेज प्रताप यादव ने इन्हें भी “जयचंद” बताते हुए कहा कि ये उनके खिलाफ फैली गलत सूचनाओं और बदनाम करने वाली मुहिम का हिस्सा रहे. संजय यादव तेजस्वी यादव के बेहद करीबी, मित्र और सलाहकार हैं. उनकी दोस्ती क्रिकेट के जमाने से, दिल्ली के दिनों से ही है. इन्हीं सजय यादव की तेजस्वी से करीबी और कामकाज में अमल-दखल ने RJD में फूट डाल दिया और टिकट बंटवारे के वक्त भी काफी बवाल हुआ था.
कौन हैं रमीज खान, जिसकी यूपी पुलिस ने भी निकाली थी क्राइम कुंडली?
तेज प्रताप ने जयचंदों की लिस्ट में एक और शख्स रमीज़ को भी शामिल किया है. रमीज भी तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते हैं. रमीज़ प्रथम श्रेणी के क्रिकेटर रहे हैं और उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले में तुलसीपुर के रहने वाले हैं. लखनऊ से लगभग 250 किलोमीटर दूर तुलसीपुर नेपाल से सटा हुआ क़स्बा है. उन्होंने प्रथम श्रेणी के 30 मैच खेले थे और 1487 रन बनाए थे. तेजस्वी और रमीज़ की दोस्ती क्रिकेट के मैदान से शुरू हुई थी. तेजस्वी और रमीज़ ने दिल्ली और झारखंड में फ़र्स्ट क्लास क्रिकेट खेला है. आरोप है कि उनका कथित तौर पर आपराधिक इतिहास है. बीते दिनों खबर आई थी कि यूपी पुलिस भी उनकी क्राइम कुंडली खंगाल रही है.
उत्तर प्रदेश निवासी रमीज, जिसका पूरा नाम रमीज नेमत खान है, वो बीते महीनों रोहिणी आचार्य की बगावत के बाद चर्चा में आया था. यूपी में उसके अपराधों का रिकार्ड निकाला गया था. यूपी के कौशाम्बी में रमीज की क्रिमिनल हिस्ट्री निकाली गई थी. कहा जा रहा है कि वह हत्या का आरोपी है और जेल भी जा चुका है.
राजद के फायरब्रांड नेता हैं शक्ति सिंह यादव!
शक्ति सिंह यादव को भी लालू परिवार का बेहद करीबी माना जाता है. शक्ति यादव राजद के मीडिया पैनलिस्ट हैं और बतौर प्रवक्ता, नेता मीडिया में पार्टी का पक्ष रखते नजर आते हैं. साल 2015 में उन्होंने हिल्सा सीट से चुनाव जीता था. तेजप्रताप ने इन्हें भी उन पांच “जयचंदों” की सूची में रखा है, जिन पर वह बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाते हैं. बीते दिनों उस वक्त शक्ति यादव का नाम सामने आया था, जब उन्होंने राज्यसभा सांसद मनोज झा को इशारों ही इशारों में फटकार लगाई थी और मीडिया में बोलने से रोक दिया था.
राबड़ी के 'मुंहबोले भाई' सुनील सिंह कौन हैं?
सुनील सिंह बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं. उनका बिहार बिस्कोमान पर भी काफी प्रभाव है. बिहार विधानपरिषद में सुनील सिंह ही नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी की नाक-आंख कान हैं. वो खुद को राबड़ी के मुंहबोले भाई भी करार देते हैं. तेज प्रताप यादव के अनुसार, सुनील भी उस समूह में शामिल हैं जिसने उनके नाम पर अफवाहें फैलाने और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. सुनील सिंह के रिश्ते राबड़ी देवी और लालू यादव के साथ रहे हैं. सुनील सिंह राबड़ी देवी से राखी बंधवाते रहे हैं, विधानपरिषद में वो राजद के पक्ष को मजबूती से रखते हैं.
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