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नेतन्याहू का UAE का एक सीक्रेट दौरा और पाकिस्तान का खेल खत्म! जिनके लिए इजरायल 'अछूत', उसने भी मांगी ईरान-हूती से बचाने की मदद
पाकिस्तान का इज़रायल ने खेल खत्म कर दिया है. नेतन्याहू के UAE के सीक्रेट दौरे में जो हुआ है उसने हड़कंप मचा दिया है. सामने आई मीटिंग की डिटेल्स से आसिम मुनीर और एर्दोगन की नींद उड़ गई है.
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मिडिल ईस्ट में ईरान-अमेरिका के बीच अब होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर तनाव और सऊदी अरब-हूतियों के बीच सैन्य संघर्ष के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का UAE का एक सीक्रेट दौरा हुआ. शुरुआत में तो इस पर इजरायली और अमीरात सरकार की ओर से चुप्पी बनाए रखी गई, लेकिन इजरायली मीडिया की रिपोर्ट पर एक ओर जहां नेतन्याहू के कार्यालय ने मुहर लगाई तो अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने नेतन्याहू के सीक्रेट विजिट की पुष्टि कर दी है.
UAE के सीक्रेट दौरे पर गए थे नेतन्याहू, हो गई पुष्टि!
WAM ने ख़बर दी है कि यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने रविवार को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की. एजेंसी की यह रिपोर्ट नेतन्याहू की यात्रा की UAE की ओर से पहली पुष्टि थी.
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वहीं सोमवार देर रात इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर बताया कि नेतन्याहू ने यूएई राष्ट्रपति के निमंत्रण पर यह यात्रा की. इसमें बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने कल (रविवार) को यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया. दौरे का मुख्य उद्देश्य "दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करना था."
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नेतन्याहू के साथ कौन-कौन थे?
प्रधानमंत्री के साथ नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख, मोसाद के प्रमुख, मिलिट्री सेक्रेटरी और विदेश नीति सलाहकार भी मौजूद थे. इजरायल के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि रविवार को हुई बैठक छह घंटे तक चली और मुख्य रूप से ईरान पर केंद्रित थी.
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इजरायल को अछूत मानने वाले देशों ने भी की नेतन्याहू से मुलाकात?
वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर KAN की एक कथित रिपोर्ट के हवाले से नेतन्याहू के यूएई के सीक्रेट दौरे की टाइमलाइन, डिटेल और इस मीटिंग में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों की जानकारी साझा की गई है. X हैंडल, @HormuzReport ने KAN की कथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि नेतन्याहू की सिर्फ अमीराती अधिकारियों और राष्ट्रपति से ही नहीं बल्कि कई देशों के नेताओं और हाई लेवल अधिकारियों से भी मुलाकात हुई थी. इसमें तो कई ऐसे देश के अधिकारी भी शामिल हैं जिनके तो रिश्ते भी नहीं हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इस सीक्रेट मीटिंग में ईरान पर चर्चा करने के लिए UAE की गुप्त यात्रा के दौरान इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई खाड़ी देशों के अधिकारियों से सीधे मुलाक़ात की. इनमें से कुछ देशों जैसे कतर और सऊदी अरब के इज़राइल के साथ कोई आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं.
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देर रात नेतन्याहू से मिलने कौन-कौन पहुंचा था?
@HormuzReport ने KAN की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आगे कहा कि नेतन्याहू रविवार सुबह एक प्राइवेट जेट से अबू धाबी गए और 12:13 UTC पर वहां पहुंचे. इसी दौरान लीबिया के हफ़्तार से जुड़ा एक विमान 12:28 पर पहुंचा, मोरक्को की वायु सेना का C-130 विमान पहले ही लैंड कर चुका था, और कतर सरकार का एक विमान भी अमीरात की राजधानी में आते हुए ट्रैक किया गया. UAE ने रियाद से किसी को लाने के लिए भी एक सरकारी विमान भेजा था, जो 12:10 UTC पर वापस लौटा.
कहा जा रहा है कि हूती के साथ पैदा हुए तनाव और जंग के बीच सऊदी की ओर से UAE के साथ भी संबंध बहाली की पहल की गई है. यमन में प्रभुत्व और अपने-अपने गुटों को समर्थन को लेकर कुछ दिनों पर सऊदी-अमीरातियों के बीच झड़प भी हुई थी.
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UAE ने भेजा था नेतन्याहू को निमंत्रण?
इस बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद सऊदी रक्षा मंत्री ने बातचीत के लिए UAE के उपराष्ट्रपति को आमंत्रित किया है. इतना ही नहीं कुछ और रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ मदद के लिए इज़राइल से संपर्क किया है.
ऐसे में जब यूएई में तमाम खाड़ी के देशों के साथ इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुलाक़ात हुई है तो सवाल उठ रहे हैं कि अगस्त 2026 में हुआ मक्का समझौते का क्या होगा, जिसका पाकिस्तान और तुर्की और तो और सऊदी अरब की ओर से भी काफी ढोल पीटा गया और इस्लामिक नाटो का दर्जा दिया गया.
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पाकिस्तान-तुर्की का गेम ओवर!
तीनों देशों की ओर से ये प्रोजेक्ट करने की कोशिश की गई कि अगर एक मुल्क पर हमला होता है तो ये तीनों पर ही हमला माना जाएगा. ये अलग बात है कि इस समझौता पर दस्तख़त के बाद से ही ईरान ने कई बार सऊदी अरब पर हमला किया है. इतना ही नहीं हूती विद्रोही जैसे एक नॉट स्टेट एक्टर की ओर से भी सऊदियों पर लगातार हमले हो रहे हैं, लेकिन तुर्की और पाकिस्तान की मजाल है कि वो सऊदी को रेस्क्यू करने आएं.
इतना ही नहीं जब कथित तौर पर ईरान की यमन में प्रॉक्सी हूती विद्रोहियों की ओर से मिसाइल लॉन्चर दागे गए, लगातार हमले किए जा रहे हैं तो उसका जवाब देने की जगह पाकिस्तानियों ने ईरान को ही सऊदी की ओर से चेतावनी दी और कहा कि ईरान हूती पर लगाम लगाए.
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नेतन्याहू के सीक्रेट दौरे से कैसे उड़ी पाकिस्तान की नींद!
इसके अलावा पाकिस्तान की ओर से ये भी बहाना बनाया गया कि वो हूतियों पर इसलिए नहीं हमले कर सकता क्योंकि वो कोई देश नहीं है बल्कि एक गुट है. इतना ही नहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से भी ये दावा किया गया कि समझौता इसलिए भी एक्टिवेट नहीं सकता क्योंकि लड़ाई एक नॉन-स्टेट एक्टर्स के साथ है और ये लड़ाई मक्का समझौते के अस्तित्व में आने से पहले से ही है.
इससे पहले 2015 में भी पाकिस्तान की ओर से सऊदियों को गच्चा दिया गया था और यमन में फौज भेजने से इनकार कर दिया गया था. उस वक्त तत्कालीन नवाज़ शरीफ की सरकार ने संसद का हवाला देकर कहा था कि चूंकि कौमी असेंबली से इस प्रस्ताव को रिजेक्ट कर दिया गया है इसलिए वो सेना नहीं भेज सकती है.
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ऐसे में अब जब सऊदियों को बचाने इज़रायल आया है, जिससे यूएई और मिस्त्र के अलावा किसी के भी कूटनीतिक संबंध नहीं है, और नेतन्याहू इन्हें ईरान-हूतियों से बचाएंगे तो फिर पाकिस्तान और तुर्की वाले क्या करेंगे. मक्का समझौते का क्या होगा? ऐसे में पाकिस्तान का मुस्लिम उम्मा में रिलिवेंस हासिल करने का प्लान फेल हो गया है.
कुल मिलाकर देखें तो सऊदी अरब ने पाकिस्तान को निकाल फेंका है. यूएई से संपर्क किया है ताकि इज़रायल से बात कर हूतियों के ख़िलाफ़ मदद हासिल की जाए. ऐसे में अब सऊदी अरब के सामने पाकिस्तान की वैल्यू नहीं रह गई है.
पाकिस्तान को लगा दोहरा झटका!
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एक ओर जहां पाकिस्तान को अमेरिका ने ईरान के साथ नेगोशिएशंस से बाहर कर दिया है. ट्रंप जिस आसिम मुनीर और पाकिस्तान की पींगे पढ़ रहे थे वो अब उसका नाम तक नहीं ले रहे. मध्यस्थ बनने जा रहे पाकिस्तान को कोई पूछ भी नहीं रहा.
वहीं ब्रिक्स समिट में जिस तरह भारत ने दो दुश्मन यूएई और ईरान को एक साथ बैठाया, रिश्तों में जमी बर्फ पिघली उसके बाद खाड़ी में शांति बहाली की पहल भारत के पास आ गई है. इरान की ओर से भी पाकिस्तान को संदेश दिया गया कि उसे ब्रिक्स और भारत ने नौकरी से निकाल दिया है.
बताया जाता है कि 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के दौरान नेतन्याहू की पिछली यात्रा में भी ऐसी ही एक बैठक हुई थी. उस समय नेतन्याहू के कार्यालय ने यात्रा की घोषणा की थी, लेकिन UAE ने सार्वजनिक रूप से इस यात्रा से इनकार कर दिया था.
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पहले इजरायल ने नेतन्याहू के सीक्रेट दौरे पर साध रखी थी चुप्पी!
इससे पहले इस साल, UAE ने शेख मोहम्मद और नेतन्याहू की मुलाकात से इनकार किया था, जबकि मई में इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा था कि नेतन्याहू ने खाड़ी देश की "गुप्त यात्रा" की थी और राष्ट्रपति से मुलाकात की थी.
बैठक की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने उस समय बताया था कि नेतन्याहू और शेख मोहम्मद की मुलाकात 26 मार्च को ओमान की सीमा के पास अबू धाबी के नखलिस्तान शहर अल-ऐन में हुई थी.
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यह यात्रा इजरायली मीडिया की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के कुछ हफ्ते बाद हुई, जिसमें दावा किया गया था कि यूएई के राष्ट्रपति ने हमास द्वारा 7 अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर किए गए हमले से पहले नेतन्याहू को चेतावनी दी थी, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री ने यह जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई. नेतन्याहू ने इस खबर का खंडन किया था.
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क्या अक्टूबर 7, 2023 को लेकर UAE की ओर से दी गई चेतावनी को लेकर था नेतन्याहू का UAE का दौरा?
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इजरायली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू रविवार को यूएई गए थे. दौरे का मकसद शेख मोहम्मद से 2023 में दी गई चेतावनी को लेकर उठ रहे सवालों पर विराम लगाना था यानी कि उनसे उस खबर का खंडन करने की अपील करना था.
ये भी पढ़ें: ‘आतंकी देश का साथ देने वाले भारत के दोस्त कैसे’, पाकिस्तान को टार्गेट कर जयशंकर ने अमेरिका को सुनाई खरी-खरी
नेतन्याहू के कार्यालय द्वारा यात्रा की आधिकारिक पुष्टि किए जाने से पहले, इजरायल की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया एजेंसी ने उस टीवी चैनल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जिसने इस यात्रा की खबर दी थी.
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पहले तो इजरायल सरकार ने मीडिया के खिलाफ ही दर्ज कराई शिकायत!
पीएम कार्यालय (जो सुरक्षा एजेंसी की देखरेख करता है) के एक बयान में कहा गया, "आज शाम शिन बेट ने मुख्य सैन्य सेंसर के पास शिकायत दर्ज कराई और मांग की कि सेंसरशिप के गंभीर उल्लंघन के बाद चैनल 12 पर कानून के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए."
प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि उनकी यात्रा के प्रकाशन से "प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी, साथ ही प्रतिनिधिमंडल जिसमें मोसाद (खुफिया एजेंसी) के प्रमुख और अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल थे की जान को खतरा पैदा हो गया." इसमें बताया गया है कि इस दौरे की जानकारी तब सार्वजनिक की गई जब प्रधानमंत्री का विमान अभी भी इजरायल के हवाई क्षेत्र के बाहर ही था. बयान के अनुसार, मोसाद जो प्रधानमंत्री कार्यालय के तहत काम करता है ने भी इसी तरह निंदा की.
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ईरान युद्ध के दौरान हमले का शिकार होने के बाद से, यूएई ने अमेरिका और इजरायल के साथ अपने रिश्ते मजबूत किए हैं; इजरायल के साथ उसने 2020 के अब्राहम समझौते के तहत संबंध शुरू किए थे.