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FlyDubai Flight Hijacking: क्या है पॉलिटिकल इस्लाम विचारधारा, जिस पर प्रतिबंध की मुस्लिम देशों से उठी मांग?

फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक करने की घटना के बाद कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा यानी कि पॉलिटिकल इस्लाम को बैन करने की माँग उठ रही है. मुस्लिम देशों के एक्सपर्ट्स ने ही ये मुद्दा उठाया है.

Image Source-IANS/ @_A_khalifa
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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई हाईजैकिंग की कोशिश और लोन वुल्फ अटैक के इस्तेमाल की घटना ने एक बार फिर पॉलिटिकल इस्लाम पर बहस तेज कर दी है. कई देशों में इसको लेकर चर्चा हो रही है तो वहीं कई अमीराती एक्सपर्ट्स ने इस पर बैन लगाने की मांग की है. 

फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक कर शायद इज़रायल के किसी महत्वपूर्ण बिल्डिंग पर क्रैश करने का मामला पता चलने और इसमें ओमानी पायलट के शामिल होने, उसकी कट्टरपंथी सोच, ट्रेनिंग और ब्राउज़िंग हिस्ट्री का पता चलने के बाद पता माँग की जा रही है कि अगर ख़ुद को बचाना है तो हर उस विचारधारा और पार्टी पर बैन लगाएं जो भी पॉलिटिकल इस्लाम को सपोर्ट करते हैं.

मुस्लिम देशों से उठी पॉलिटिकल इस्लाम पर बैन लगाने की मांग!

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UAE के एक्सपर्ट और लेखक अहमद खलीफा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा: अपने देशों, अपनी पहचान और अपने बच्चों के भविष्य की रक्षा करें। पॉलिटिकल इस्लाम और सत्ता के लिए धर्म का इस्तेमाल करने वाली किसी भी पार्टी पर बैन लगाएं! अभी करें…कल बहुत देर हो जाएगी!

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आपको बता दें कि हम जब भी पॉलिटिकल इस्लाम की बात करते हैं तो इसका मतलब उन सभी विचारधाराओं से हैं, जो भी धर्म के लिए पॉलिटिक्स का इस्तेमाल करते हैं और पॉलिटिक्स के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं और कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं. 21वीं सेंचुरी, ख़ासकर अरब स्प्रिंग के बाद के साल की बात करें तो इसमें सबसे बड़ा नाम है मोहम्मद मुर्सी की मुस्लिम ब्रदरहुड, जो मिस्त्र से निकली और पूरी दुनिया में फैल गई. हालांकि इसे मुस्लिम देशों ने ही सबसे पहले बैन किया. यहां तक कि उन देशों ने भी जो इस्लाम के सेंटर स्टेज हैं और जहां शरिया क़ानून को प्रैक्टिस किया जाता है. 

मुस्लिम देशों ने ही लगाया कट्टरपंथी विचारधारा पर बैन?

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यानी कि इन देशों ने भी पॉलिटिकल इस्लाम की विचारधारा को स्वीकार नहीं किया और उस  पर बैन लगा दिया. क्योंकि उन्हें डर था कि इससे उनकी सत्ता, सरकार जा सकती है, कट्टरपंथी ताकतों को सिर उठाने का मौका मिलेगा बल्कि अराजकता पैदा होगी. ऐसे में ये ताकते अब फिर से लोन वुल्फ की शक्ल में फिर से सिर उठा रहे हैं और अमेरिका, इज़रायल और यूरोप सहित कई देशों में सक्रिय हैं और हर संभव बदला लेने की कोशिश करते हैं. यहां तक कि फिदायीन हमला भी करने से नहीं चूकते हैं. 

पॉलिटिकल इस्लाम को बढ़ावा देने वालों की थ्योरी है कि उन्हें शहीद होना है और इनके ऊपर एक ही विचार सवार होता है कि उन्हें शोहदा कहा जाएगा. उन्हें जन्नत नसीब होगी. और ये तब होगी जब वो इस्लाम के लिए अपनी जान दे देंगे.

जहां तक पॉलिटिकल इस्लाम की बात करें तो यह एक ऐसी इस्लामिक और राजनीतिक विचारधारा है, जो इस्लाम को केवल इबादत, धर्म-कर्म या व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे कानून, शासन और सामाजिक व्यवस्था के संचालन का मुख्य आधार बनाती है. पॉलिटिकल इस्लाम के पैरोकार लोकतंत्र और मॉडर्न रेगुलेशन को रिजेक्ट करते हैं और शरिया-इस्लामी क़ानून के तहत शासन की वकालत करते हैं.

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क्या है पॉलिटिकल इस्लाम विचारधारा?

पॉलिटिकल इस्लाम विचारधारा के तहत यह माना जाता है कि आधुनिक लोकतांत्रिक या धर्मनिरपेक्ष व्यवस्थाओं के बजाय समाज को शरिया और इस्लामी सिद्धांतों के अनुसार चलाया जाना चाहिए. इसका स्वरूप अलग-अलग देशों और संगठनों में लोकतांत्रिक सुधारों से लेकर चरमपंथ (जैसे तालिबान या अन्य संगठन) के रूप में दिखाई देता है. 

फ्लाईदुबई फ्लाइट के विमान में हुई हालिया घटना के बाद लोन वुल्फ और ओमानी पायलट की विचारधारा, कट्टरपंथी सोच और ट्रेनिंग की घटना को लेकर सामने आई घटना ने इसे फिर से पूरी दुनिया में बहस के केंद्र में ला दिया है. 

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क्रैश कुल्हाड़ी से स्मित मच्छार पर किया गया था हमला?

फ्लाईदुबई फ्लाइट का को-पायलट हमाम अल-हम्मामी एक ओमानी नागरिक था, जिसने कॉकपिट के क्रैश कुल्हाड़ी (क्रैश Axe) से भारतीय मुख्य पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया. इसके बाद विमान ने क़रीब 16600 फ़ीट का डीप डाइव किया और तेजी से नीचे गिरने लगा. घायल मुख्य पायलट और विमान में सवार इजरायली यात्रियों की बहादुरी से इस बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया गया और विमान की सऊदी अरब में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई.

इस घटना के बाद पॉलिटिकल इस्लाम और इस विचारधारा से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई या प्रतिबंध लगाने की मांग इसलिए तेज हो रही है, क्योंकि जांच में सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर खुलासे हुए हैं.

अम्मानी का कट्टरपंथ से था जुड़ाव?

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमलावर को-पायलट रेडिकल इस्लामिक सोच से ग्रसित था. जांच में सामने आया कि उस को-पायलट को उसकी चरमपंथी सोच और संदिग्ध गतिविधियों के कारण पूर्व में ओमान एयर द्वारा उड़ान भरने से प्रतिबंधित किया गया था. 

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इसके बावजूद, फ्लाईदुबई जैसी बड़ी एयरलाइन ने उसे नौकरी पर रखा और इजरायल-यूएई जैसे संवेदनशील मार्ग पर तैनात कर दिया. विश्लेषकों का मानना है कि 'पॉलिटिकल इस्लाम' की आड़ में फैलने वाला यह वैचारिक कट्टरपंथ अब आत्मघाती और मॉडर्न रूप ले चुका है, जहां अत्यधिक संवेदनशील पदों (जैसे कमर्शियल पायलट) पर बैठे लोग भी इसके प्रभाव में आकर मासूमों की जान जोखिम में डाल रहे हैं. 

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इसी कारण इस कट्टरपंथी विचारधारा के बढ़ते प्रभाव के कारण विश्व स्तर पर विमानन सुरक्षा नियमों को कड़ा करने, पायलटों की वैचारिक पृष्ठभूमि की सख्त स्क्रीनिंग करने और इस कट्टरपंथी सोच, पॉलिटिकल इस्लाम के हिंसक स्वरूपों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग उठ रही है.

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