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भारत के ट्रेड रूट पर अमेरिका की नरमी… चाबहार पोर्ट पर 6 महीने की रियायत, जानें क्या है मायनें

चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) ईरान के सिस्तान-ओ-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर एक अहम समुद्री बंदरगाह है. यह ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है जो हिंद महासागर में सीधे खुलता है.

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31 Oct 2025
( Updated: 10 Dec 2025
01:05 PM )
भारत के ट्रेड रूट पर अमेरिका की नरमी… चाबहार पोर्ट पर 6 महीने की रियायत, जानें क्या है मायनें

रूस से तेल खरीद की वजह से बिगड़े भारत और अमेरिका के रिश्ते पटरी पर लौट रहे हैं. इसके संकेत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया है. अमेरिका ने भारत के हक में बड़ा कदम उठाते हुए चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंधों से रियायत दी है. 

अमेरिकी सरकार ने भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से 6 महीने के लिए छूट दी है. इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी है. इससे पहले अमेरिका ने कहा था कि वो 29 सितंबर से इस बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल कंपनियों पर जुर्माना लगाएगा. हालांकि बाद में इस छूट को 27 अक्टूबर तक और फिर 6 महीने के लिए बढ़ा दिया है. 

रणधीर जायसवाल ने क्या कहा? 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि, अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह परियोजना पर अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को 6 महीने की छूट दे दी है. रणधीर जायसवाल ने व्यापारिक समझौते की ओर भी बड़े संकेत दिए. उन्होंने कहा, अमेरिका के साथ भारत की बातचीत जारी है. उन्होंने बताया, भारत रूसी तेल कंपनियों पर हाल ही में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है. 

10 साल के लिए लीज पर है चाबहार पोर्ट 

भारत ने साल 2016 में ईरान के साथ 10 वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत भारत चाबहार पोर्ट के दो टर्मिनलों (शहिद बेहेस्ती टर्मिनल) के डेवलप में निवेश करेगा. साल 2024 में भारत ने इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) के जरिए 10 साल के लिए शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के लिए 120 मिलियन डॉलर का निवेश और 250 मिलियन डॉलर की वित्तीय मदद का करार किया था. 

क्या है चाबहार पोर्ट? 

चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) ईरान के सिस्तान-ओ-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर एक अहम समुद्री बंदरगाह है. यह ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है जो हिंद महासागर में सीधे खुलता है. यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है. 

चाबहार पोर्ट की जरूरत क्यों पड़ी? 

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साल 2003 में भारत ने चाबहार बंदरगाह विकसित करने का प्रस्ताव रखा था. इसकी मुख्य वजह पाकिस्तान को बायपास करते हुए नया मार्ग बनाना था. ताकि बिना पाकिस्तान के रास्ते का इस्तेमाल करे मध्य एशिया के कई देशों तक व्यापारिक पहुंच बढ़ा सके. चाबहार पोर्ट पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से महज 170 किलोमीटर दूर है. ग्वादर पोर्ट चीन की ओर से पाकिस्तान में विकसित किया जा रहा है. इसका मुख्य मकसद भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बढ़ावा देना है. 

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