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क्या राष्ट्रपति पद स्वीकार करेंगी Mayawati, सुनिये क्या जवाब दिया ?

UP में सियासी जमीन खोती जा रही बीएसपी की मुखिया मायावती क्या अब राष्ट्रपति का पद स्वीकार करेंगी और सियासी सफर से संन्यास ले लेंगी, ऐसी तमाम खबरों पर सुनिये मायावती ने क्या जवाब दिया है ?

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बीएसपी सुप्रीमो मायावती जिस उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की चार बार सत्ता संभाल चुकीं हैं, लगता है उस उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन से उनकी पकड़ कमजोर होती जा रही है, यही वजह है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में शून्य पर सिमटी बीएसपी सपा के साथ के दम पर 2019 में 10 सीटों तक तो पहुंच गई, लेकिन साल 2024 के चुनाव में एक बार फिर बीएसपी शून्य सीट पर सिमट गई जिसके बाद से ही ये अटकलें लगने लगीं कि मायावती की राजनीति खत्म हो गई है और आने वाले समय में उन्हें सत्ता पक्ष या विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जा सकता है ऐसी तमाम अटकलों पर अब खुद मायावती ने जवाब दिया है। 

दरअसल 68 साल की उम्र पूरी कर चुकीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती यूपी जैसे बड़े राज्य की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी पार्टी लगातार गर्त में जा रही है, खासकर साल 2014 में जब पीएम मोदी सत्ता में आए, उसी के बाद से बीएसपी का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है।उसे ना तो विधानसभा चुनाव में सफलता मिल रही है और ना ही लोकसभा चुनाव में खाता खुल रहा है यही वजह है कि साल 2022 में जब राष्ट्रपति चुनाव हो रहा था उसी वक्त कांग्रेस के तत्कालीन विधायक जोगिंदर सिंह अवाना ने मायावती को राष्ट्रपति बनाए जाने की मांग को लेकर सोनिया गांधी को खत लिखा था, लेकिन कांग्रेस ने यशवंत सिन्हा को उम्मीदवार बना दिया और बीजेपी ने आदिवासी समाज से आने वालीं द्रौपदी मुर्मू को उतार दिया, जिन्हें मायावती ने भी समर्थन दिया और द्रौपदी मुर्मू चुनाव जीत कर राष्ट्रपति बन गईं। 

अब अगला चुनाव साल 2027 में होने वाला है लेकिन उससे पहले ही बीएसपी सुप्रीमो मायावती को राष्ट्रपति बनाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी, जिस पर खुद मायावती ने चुप्पी तोड़ते हुए सबसे पहले सियासी संन्यास की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि -"बहुजनों के अम्बेडकरवादी कारवा को कमजोर करने की विरोधियों की साजिशों को विफल करने के संकल्प के लिए बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर और मान्यवर कांशीराम जी की तरह ही मेरी जिन्दगी की आखिरी सांस तक बीएसपी के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को समर्पित रहने का फैसला अटल है, अर्थात सक्रिय राजनीति से मेरा सन्यास लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है, जबसे पार्टी ने आकाश आनन्द को मेरे ना रहने पर या अस्वस्थ विकट हालात में उसे बीएसपी के उत्तराधिकारी के रूप में आगे किया है तबसे जातिवादी मीडिया ऐसी फेक न्यूज प्रचारित कर रहा है जिससे लोग सावधान रहें"। 

एक और ट्वीट में बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने राष्ट्रपति बनने की अटकलों को भी सिरे से खारिज करते हुए कहा कि- "पहले भी मुझे राष्ट्रपति बनाए जाने की अफवाह उड़ाई गयी, जबकि मान्यवर कांशीराम जी ने ऐसे ही आफर को यह कहकर ठुकरा दिया था कि राष्ट्रपति बनने का मतलब है सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना जो पार्टी हित में उन्हें गवारा नहीं था, तो फिर उनकी शिष्या को यह स्वीकारना कैसे संभव होगा?"

बात चाहे सियासी संन्यास की हो या फिर राष्ट्रपति बनाए जाने की हो बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने ऐसी तमाम अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया वैसे आपको बता दें साल 2022 में जब इसी तरह से मायावती को राष्ट्रपति बनाए जाने की मांग उठी थी तो उस वक्त भी मायावती ने इन अटकलों को खारिज कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर वो राष्ट्रपति बन गईं तो उनका सियासी करियर खत्म हो जाएगा, इसलिये कांशीराम की तरह मायावती ने भी राष्ट्रपति बनने से साफ इंकार कर दिया।  
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