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Iran के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भारत के लिए फ़ायदेमंद या करेंगे नुक़सान ?

कौन हैं मसूद पेजेश्कियान जिनके राष्ट्रपति बनते ही खुश हो गई Modi सरकार ? बिछाएंगे फूल या फिर कांटे ? भारत पर इसका कैसा असर होगा ये देखना दिलचस्प होगा।

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07 Jul 2024
( Updated: 05 Dec 2025
08:59 PM )
Iran के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भारत के लिए फ़ायदेमंद या करेंगे नुक़सान ?
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ईरान में उस वक़्त हड़कंप मच गया था जब ख़बर आई की इब्राहिम रईसी की राष्ट्रपति पद पर रहते हुए हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। ईरान के पूर्व राष्ट्रपति रईसी के तो भारत से अच्छे संबंध थे लेकिन अब ईरान को नए राष्ट्रपति के तौर पर मिले मसूद पेजेश्कियान का रूख क्या होगा ये देखना दिलचस्प रहने वाला है। मसूद पेजेश्कियान सरकार भारत के लिए दोस्ती का हाथ बढ़ाएगी या फिर कांटे बिछाएगी इसे लेकर फ़िलहाल संशय है लेकिन उम्मीद है कि भारत और ईरान के संबंधों को पेजेश्कियान ख़राब नहीं होने देंगे। भारत और ईरान के संबंधों पर विस्तार से चर्चा करें उससे पहले जरा जान लीजिए कौन हैं मसूद पेजेश्कियान ?

कौन हैं मसूद पेजेश्कियान ?

  • पेजेश्कियान का जन्म 29 सितंबर 1954 को उत्तर पश्चिमी ईरान के महाबाद में एक अज़ेरी पिता और कुर्द मां के घर हुआ था।
  • पेजेश्कियान को अज़ेरी भाषा आती है और वो उसी में बात करते हैं।
  • पेजेश्कियान सुधारवादी नेता के तौर पर जाने जाते हैं।
  • पेजेश्कियान ने कट्टरपंथी सईद जलीली को शिकस्त दी है।
  • ईरान के नए राष्ट्रपति को हिजाब विरोधी माना जाता है।
  • मसूद पश्चिम देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने में विश्वास रखते हैं।
  • हिजाब क़ानून में सुधार की वकालत भी वो कई बार कर चुके हैं।
  • 28 जून को हुए राष्ट्रपति चुनाव में उनको जलीली के 13.5 मिलियन वोटों के मुक़ाबले 16.3 मिलियन वोट मिले थे

अब देखिए मसूद पेजेश्कियान की सोच, उनकी विचारधारा इस बात को जगज़ाहिर करती है कि वो भारत के साथ संबंध अच्छे रखकर ही चलेंगे। इसका अंदाज़ा चुनावों के नतीजे आने से पहले ही लग गया था। दरअसल चुनाव परिणाम आने से पहले ही ईरान के राजदूत इराज इलाही ने ईरान का रुख़ बता दिया था। उन्होंने कहा था-  ईरान और भारत के बीच विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, चाहे सत्ता में कोई भी आए। ईरान-भारत एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना चाबहार बंदरगाह में शामिल हैं और उसे समझौते का हमेशा सम्मान किया जाएगा। बुनियादी ढांचे का विकास हमारे दोनों देशों के बीच सहयोग के आधारों में से एक है। 

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एक कट्टरपंथी देश में कट्टरपंथी विचारधारा के बीच अगर पेजेश्कियान जैसे किसी नेता को राष्ट्रपति बनाया गया है तो आप समझ सकते है कि उस देश के भारत के साथ रिश्ते पहले से ज़्यादा मज़बूत ही होंगे।

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