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केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने दिया इस्तीफा, राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ी, लेटर लिखकर बताई वजह

केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल की खबरों के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री एल मुरुगन ने इस्तीफा देकर चौंका दिया. उन्होंने PM मोदी को इस्तीफे की पेशकश करते हुए लेटर भेजा.

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13 Oct 2026
( Updated: 13 Oct 2026
07:22 PM )
केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने दिया इस्तीफा, राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ी, लेटर लिखकर बताई वजह
Image Source- IANS
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केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने इस्तीफा देकर चौंका दिया है. उन्होंने न केवल मंत्री पद बल्कि राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी. मुरुगन ने लेटर लिखकर अपने इस्तीफे की वजह बताई है. 

एल मुरुगन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा है. उन्होंने इस लेटर में PM मोदी के हालिया तमिलनाडु दौरे, राज्य के विकास और केंद्र सरकार में अपने कार्यकाल का जिक्र भी किया. 

एल मुरुगन ने क्यों दिया इस्तीफा? 

लेटर में एल मुरुगन ने लिखा, ‘अब अपना पूरा समय तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगाना चाहते हैं.’

पत्र में मुरुगन ने कहा कि वह जमीनी राजनीति में लौटना चाहते हैं और तमिलनाडु में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. 

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PM मोदी की तारीफ

प्रधानमंत्री मोदी के हालिया तमिलनाडु दौरे का जिक्र करते हुए मुरुगन ने कहा कि इस दौरान उन्होंने जनता के बीच जो स्नेह और उत्साह देखा, उससे उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि राज्य में BJP और बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. उन्होंने अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए अपना पूरा समय और ऊर्जा समर्पित करने की प्रतिबद्धता जताई. 

मुरुगन ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए गए पत्र में लिखा, 'अब मैं जमीनी स्तर पर लौटना चाहता हूं, अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा होना चाहता हूं और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित करना चाहता हूं.’

उन्होंने कहा, 'राष्ट्र प्रथम, पार्टी दूसरे स्थान पर और स्वयं सबसे अंत में’ मुरुगन ने इसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और BJP में लगभग तीन दशक की अपनी राजनीतिक यात्रा का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया. 

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तमिलनाडु में पार्टी को मजबूत करने में निभाएंगे बड़ा रोल

उन्होंने कहा कि वह राज्य के हर गांव और गली में जाकर लोगों से मिलना चाहते हैं और पूरे तमिलनाडु में पार्टी की पहुंच बढ़ाने के लिए काम करना चाहते हैं. साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के समावेशी विकास के संदेश को हर शख्स तक पहुंचाने और परिवारों को विकसित भारत के निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की इच्छा जताई. 

केंद्र सरकार में अपनी सेवा को जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताते हुए मुरुगन ने अपनी साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरी करने वाले माता-पिता के बेटे हैं. उनके माता-पिता मवेशी चराने का काम भी करते थे और आज भी कोनूर गांव में सादगीपूर्ण जीवन जी रहे हैं. 

मुरुगन ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और BJP के जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर देने की परंपरा को दिया. उन्होंने कहा कि इन्हीं अवसरों के कारण उन्हें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा करने, दो बार राज्यसभा सदस्य बनने और केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने का अवसर मिला. 

मुरुगन ने कहा कि पार्टी से उन्हें जो कुछ भी मिला है, उससे उनकी जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई है. उन्होंने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच रहकर काम करने के अपने संकल्प को भी दोहराया. 

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एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद अटकले लग रही हैं कि पार्टी उन्हें तमिलनाडु में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है. जैसा की अपने लेटर में भी उन्होंने संकेत दिए हैं. तमिलनाडु में अन्नामलाई के बाद BJP के पास अभी तक ऐसा कोई चेहरा भी नहीं जिसे पार्टी प्रदेश में प्रोजेक्ट कर सके. एल मुुरुगन के पास दिल्ली के एक्सपीरियंस के साथ ही केंद्रीय मंत्रालय का अनुभव भी है जिसे वो तमिलनाडु की राजनीति में भुनाने की कोशिश करेंगे. 

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