Ajit Pawar Death: 6 बार डिप्टी सीएम, 7 बार विधायक, चाचा शरद पवार की छाया से निकलकर बनाई थी अपनी सियासी ताकत
Ajit Pawar Death: अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने पार्टी और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बारामती के लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कराईं.
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Ajit Pawar Passes Away: महाराष्ट्र के बारामती के पास एनसीपी (NCP ) नेता और डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार का निजी विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में अजित पवार समेत विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई. यह खबर महाराष्ट्र की राजनीति और आम जनता के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है. अजित पवार को उनकी राजनीतिक कुशलता और सियासत में गहरी पकड़ के लिए जाना जाता था.
सियासत की शुरुआत
अजित पवार ने राजनीति में कदम अपने चाचा और NCP नेता शरद पवार की मदद से रखा. उन्होंने पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाने और बारामती क्षेत्र में एनसीपी के लिए बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम भूमिका निभाई. शुरुआती दौर में उन्होंने अपने चाचा की उंगली पकड़कर राजनीति सीखी और धीरे-धीरे खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया.
जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में अपने दादा के घर हुआ. वह शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवरा के बेटे थे. उनके पिता फिल्म जगत से जुड़े थे और मुंबई में वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे. अजित पवार की शादी सुनेत्रा पवार से हुई और उनके दो बेटे हैं, पार्थ पवार और जय पवार.
शिक्षा और राजनीति में कदम
अजित पवार ने महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल, बारामती से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनके पिता का निधन हो गया, जिसके कारण उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और राजनीति में सक्रिय हो गए. साल 1982 में उन्होंने अपने चाचा शरद पवार की मदद से राजनीति में पहला कदम रखा.
सियासी सफर की शुरुआत और शुरुआती अनुभव
राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के चुनाव में हिस्सा लिया. इसके बाद वे पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे. 1991 में अजित पवार बारामती संसदीय क्षेत्र से पहली बार लोकसभा सांसद चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी. इसके बाद उन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की.
शरद पवार के सियासी वारिस के रूप में उभरना
अजित पवार ने मेहनत और लगन से खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के रूप में स्थापित किया. साल 1995 में वे पहली बार बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. इसके बाद से वे लगातार इस क्षेत्र के विधायक बने रहे. उन्होंने 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक पद संभाला.
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सफर
अपने 45 साल के सियासी सफर में अजित पवार एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे. उन्होंने महाराष्ट्र में कृषि, ऊर्जा और योजना मंत्रालयों का कार्यभार संभाला. 2010 में वे पहली बार उपमुख्यमंत्री बने और इसके बाद छह बार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे. 2019 में देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में वे दो बार डिप्टी सीएम बने. 2023 में शरद पवार के साथ मतभेद के बाद उन्होंने शिवसेना-एनसीपी गठबंधन छोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होकर अपनी अलग राजनीतिक राह चुनी.
2022 में शरद पवार से अलग राह
अजित पवार ने 2022 में अपने चाचा शरद पवार से अलग अपनी राजनीति की अलग लकीर खींची. उन्होंने एनसीपी के कई नेताओं को अपने साथ लिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली महायुति सरकार में शामिल होकर महाराष्ट्र में अपनी स्थिति मजबूत की. 2023 और 2024 में उन्होंने एनसीपी पर अपनी पकड़ पूरी तरह से कायम की और खुद को स्थापित किया.
महाराष्ट्र की राजनीति में योगदान
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अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी. उन्होंने पार्टी और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बारामती के लोगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कराईं. उनकी रणनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का बेताज बादशाह बना दिया.
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