शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की पोक्सो केस में बढ़ीं मुश्किलें, मेडिकल रिपोर्ट में नाबालिगों से दुष्कर्म की हुई पुष्टि: सूत्र
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में मुश्किलें बढ़ गई हैं. सूत्रों के मुताबिक जो मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है, उसमें दुष्कर्म की पुष्टि हो रही है.
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित झूंसी थाना क्षेत्र में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में नया मोड़ सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक बटुकों से जुड़े यौन शोषण के आरोप और दर्ज FIR के बाद हुई मेडिकल जांच में कथित तौर पर यौन शोषण की पुष्टि हुई है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट में पीड़ित बटुकों के साथ जबरन यौन कृत्य किए जाने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद पुलिस जांच ने नया एंगल ले लिया है. कहा जा रहा है कि रिपोर्ट में दर्ज बातें काफी गंभीर हैं, जिससे कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की काफी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. रिपोर्ट पुलिस के लिए एक अहम और महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है.
आपको बता दें कि एडीजे पॉक्सो कोर्ट के निर्देश पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बटुकों से जुड़े यौन शोषण के आरोप में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने 25 फरवरी 2026 के करीब दावा किया था कि उनके पास ऐसे पुख्ता साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई संभव है. इस बीच अब पीड़ितों की मेडिकल रिपोर्ट सामने आने से जांच को नया आधार मिल गया है.
मेडिकल रिपोर्ट में हुई आरोपों की पुष्टि: सूत्र
वहीं NDTV ने पुलिस सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि बटुकों की ओर से लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जा रहे हैं. वहीं इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद झूंसी थाना पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है. अब जांच का पूरा दारोमदार कोर्ट के अगले आदेशों पर भी टिका है. बता दें कि यह मामला नाबालिग बच्चों से कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा है.
ज्ञात हो कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने यह आवेदन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अधिनियम की धारा 173(4) के तहत दायर किया था, जिसके तहत यह प्रावधान है कि यदि पुलिस अधिकारी शिकायत दर्ज करने से इंकार करता है, तो व्यक्ति मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकता है.
21 फरवरी को कोर्ट ने दिया था POCSO के तहत मामला दर्ज करने का आदेश!
इसके बाद 21 फरवरी को पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने की पुलिस को FIR दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था. कोर्ट के निर्देश के आधार पर पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी और दो-तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.
पुलिस ने ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(3) के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धाराएं 5(एल), 6, 3, 4(2), 16 और 17 के तहत केस दर्ज किया था. जांच के सिलसिले में पुलिस ने पीड़ित पक्ष से जुड़े लोगों के बयान दर्ज किए. सूत्रों का कहना है कि प्रथम दृष्टया अब तक की जांच में आरोपों की पुष्टि होती दिख रही है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
ब्रह्मचारी ने दो नाबालिग बच्चों को पोक्सो कोर्ट में पेश किया था और अदालत ने 13 फरवरी को आवेदन पर आदेश सुरक्षित रखा था. विशेष अदालत ने प्रयागराज पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एफआईआर दर्ज करने और आगे की जांच का निर्देश दिया.
अविमुक्तेश्वरानंद ने हाई कोर्ट में दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका
वहीं गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है. अविमुक्तेश्वरानंद की इस याचिका में राज्य सरकार के साथ-साथ शिकायतकर्ता, हाईकोर्ट लीगल सर्विस कमेटी और बाल कल्याण समिति को प्रतिवादी बनाया गया है. याचिका में दलील दी गई है कि तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट में जांच और मुकदमे के लंबित रहने तक उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए, अन्यथा उन्हें अपूरणीय क्षति हो सकती है.
सुप्रीम कोर्ट से योगी सरकार के खिलाफ दायर याचिका हो चुकी है खारिज
पिछले हफ्ते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुर्खियों में आए थे, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके शिष्यों के खिलाफ पुलिस अत्याचार की शिकायत पर दायर पीआईएल को खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, और याचिकाकर्ता उचित अधिकारियों से शिकायत कर सकते हैं.
यह विवाद माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान महोत्सव में हुआ, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पारंपरिक पालकी यात्रा के माध्यम से संगम जाने का प्रयास कर रहे थे. प्रयागराज प्रशासन ने भारी भीड़ और “नो-व्हीकल जोन” नीति का हवाला देते हुए इस यात्रा को रोका.
इसके बाद उनके शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें मारपीट के आरोप लगे. इसके बाद विरोध करते हुए स्वामी ने धरना दिया और कथित रूप से भोजन और जल का बहिष्कार कर प्रशासन से माफी की मांग की. विवाद तब और बढ़ा जब माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी को “शंकराचार्य” की उपाधि का इस्तेमाल करने के अधिकार पर नोटिस जारी किया.
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