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पंजाब में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की बड़ी साजिश का पर्दाफाश, चीनी कैमरों से की जा रही थी जासूसी

पाकिस्तान के निशाने पर भारतीय सेना के सवेदनशील ठिकाने थे , लेकिन गनीमत रही कि इस साजिश के समय रहते पर्दाफाश हो गया और पकिस्तान को एक बार फिर नाकामी का सामना करना पड़ा.

Image Source: IANS/ Canva
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पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ने एक बार फिर पंजाब में बड़ी साजिश को अंजाम देने की कोशिश की थी. इस बार, पाकिस्तान के निशाने पर भारतीय सेना के सवेदनशील ठिकाने थे , लेकिन गनीमत रही कि इस साजिश के समय रहते पर्दाफाश हो गया और पकिस्तान को एक बार फिर नाकामी का सामना करना पड़ा. पंजाब पुलिस कि काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार भी किया है, जो पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था...

आरोपी का नाम और पहचान

पुलिस के मुताबिक, इस जासूसी रैकेट में शामिल व्यक्ति का नाम सुखविंदर सिंह उर्फ सुखा है, जो पंजाब के फिरोजपुर जिले का रहने वाला है. शुरुआती पूछताछ में सुखविंदर ने जो खुलासे किए, वे भारतीय सुरक्षा के लिए बेहद संवेदनशील थे. उसकी गिरफ्तारी से यह पता चला कि वह पाकिस्तान के लिए भारतीय सैन्य ठिकानों की जासूसी कर रहा था. सुखविंदर और उसके साथियों ने भारतीय सेना की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए थे.

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हाईटेक जासूसी कैमरे-  चीन से आयी मदद

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इस जासूसी नेटवर्क में शामिल कैमरे बेहद हाईटेक थे. यह कैमरे सोलर पैनल से चलते थे, और इनकी कनेक्टिविटी मोबाइल सिम के माध्यम से 4जी नेटवर्क से जुड़ी हुई थी. मतलब, ये कैमरे दिन-रात बिना रुके काम कर रहे थे और पाकिस्तान तक लगातार लाइव फीड भेज रहे थे. इन कैमरों की खासियत यह थी कि इन्हें इतनी चतुराई से लगाया गया था कि कोई भी व्यक्ति इनपर ध्यान नहीं देता था.
यह पूरी साजिश चीनी मदद से संचालित हो रही थी, जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर भारत के सैन्य ठिकानों पर नज़र रखने की कोशिश कर रही थी. इन सीसीटीवी कैमरों के जरिए भारतीय सेना की हर गतिविधि पाकिस्तान तक पहुंच रही थी, जिससे भारतीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था.

साजिश का आकार और लंबी योजना

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यह साजिश कोई एक-दो दिन की योजना नहीं थी. पुलिस की जांच में यह सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क की प्लानिंग और एक्सीक्यूशन लंबे समय से चल रही थी. पुलिस का शक है कि इस जासूसी रैकेट में कई और लोग शामिल हो सकते हैं, जो अभी भी सक्रिय हैं. यह निश्चित रूप से एक बड़ी साजिश थी, जो पूरी तरह से विफल होने से पहले सामने आई. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है, क्योंकि जांच में और भी सबूत मिल सकते हैं, जो इस नेटवर्क के अन्य लिंक को उजागर कर सकते हैं. फिलहाल, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अमृतसर के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की तहकीकात कर रही हैं.

आगे की जांच और सुरक्षा उपाय

अब सुरक्षा एजेंसियां इस जासूसी रैकेट के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं. वे यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इसमें और कौन लोग शामिल हैं, और यह ऑपरेशन कहां से और किसके द्वारा वित्तपोषित किया गया था. इसके अलावा, यह भी पता लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले इन कैमरों ने भारतीय सैन्य ठिकानों को किस हद तक नुकसान पहुंचाया है.

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पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क के हर लिंक को खंगालने में जुटी हुई हैं ताकि इस तरह की और साजिशों को समय रहते नाकाम किया जा सके. यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और समय पर कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है.

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