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पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल, अब BRICS बैठक के बीच PM मोदी से शांति की उम्मीद लगाए बैठा ईरान
पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश नाकाम रहने के बाद अब ईरान ने भारत से शांति बहाली में भूमिका निभाने की उम्मीद जताई है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि भारत की किसी भी शांति पहल का स्वागत किया जाएगा.
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Iran-US War Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की चिंता बढ़ा दी है. इस संघर्ष को समाप्त कराने के लिए कई देशों ने पहल की, लेकिन भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान जो आतंकवाद के जरिए अशांति फैलाता है वो भी अपने को महान दिखाने के चक्कर में खुद को अहम मध्यस्थ साबित करने की कोशिश में इस्लामाबाद में शांति वार्ता कराने में जुटा रहा. हालांकि, दोनों देशों के बीच अविश्वास और शर्तों के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका. अब पूरी दुनिया के साथ-साथ खुद ईरान को भी भारत से उम्मीद है कि वह युद्ध रोकने के लिए आगे आएगा. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने कहा कि ईरान शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए भारत जैसे महान राष्ट्र की किसी भी पहल का स्वागत करेगा.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी बातों को काफी महत्व दिया जाता है। यही कारण है कि कई मौकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी प्रधानमंत्री मोदी को महान नेता और अपना करीबी मित्र बता चुके हैं. पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें विफल होने के बाद अब ईरान की नजर भारत पर टिकी है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि भारत जैसे स्वतंत्र और विकासशील देशों की जिम्मेदारी है कि वे युद्ध रोकने और शांति बहाल करने के लिए हरसंभव प्रयास करें. गरीबाबादी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरानी विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची 14-15 मई को होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं.
BRICS बैठक पर बढ़ा मतभेद
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काजेम गरीबाबादी ने बताया किया कि ब्रिक्स देशों की बैठक के साझा घोषणापत्र को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पाई है. उनका कहना है कि समूह का एक सदस्य देश ईरान की आलोचना करने वाले प्रस्ताव को शामिल करने पर अड़ा हुआ है, जिसके चलते संयुक्त बयान जारी करने में बाधा आ रही है. माना जा रहा है कि उनका इशारा UAE की ओर था. गरीबाबादी ने कहा कि चूंकि यह अहम बैठक भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रही है, इसलिए ईरान चाहता है कि इसका सकारात्मक संदेश दुनिया तक पहुंचे. उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच किसी तरह के मतभेद का संकेत वैश्विक स्तर पर गलत संदेश दे सकता है, इसलिए सभी सदस्य देशों को आपसी सहमति और संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
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जहाजों से लिया जाएगा सर्विस शुल्क
28 फरवरी से जारी तनाव के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी पकड़ और मजबूत कर दी है. इस अहम समुद्री मार्ग पर करीब एक दर्जन भारतीय जहाज भी फंसे बताए जा रहे हैं. ईरान के उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने साफ कहा कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को शुल्क देना होगा. हालांकि उन्होंने इसे ‘टोल टैक्स’ मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह राशि ईरान औरओमान द्वारा उपलब्ध कराई जा रही नेविगेशन और रेस्क्यू सेवाओं के बदले ली जाएगी. गरीबाबादी ने यह भी कहा कि ईरान यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी' (UNCLOS) 1982 का सदस्य नहीं है, इसलिए इस मामले में उस पर किसी अंतरराष्ट्रीय नियम या बाध्यता को मानने का दबाव नहीं बनता.
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पड़ोसी देशों से हुए हमलों का ईरान का दावा
ईरान के उप विदेश मंत्री ने दावा किया है कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया गया. उन्होंने कहा कि तेहरान ने इस संबंध में संबंधित देशों को सबूत और दस्तावेज सौंपते हुए कड़ी चेतावनी भी दी है. गरीबाबादी के मुताबिक, ईरान ने किसी पड़ोसी देश को निशाना नहीं बनाया, बल्कि उन अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जहां से ईरान के खिलाफ हमले संचालित किए गए थे. उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है.
भारत से शांति पहल की उम्मीद
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ईरान के उप विदेश मंत्री गरीबाबादी ने विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात के दौरान भारत से इस बढ़ते संघर्ष को खत्म कराने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. गरीबाबादी ने जोर देते हुए कहा कि भारत जैसे प्रभावशाली और संतुलित वैश्विक शक्ति वाले देश शांति बहाली में अहम योगदान दे सकते हैं. उनके मुताबिक, मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीतिक प्रयास ही तनाव कम करने का सबसे प्रभावी रास्ता हैं.
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बताते चलें कि बैठक के दौरान कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज रहने वाली हैं. ब्रिक्स सम्मेलन से अलग ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे. माना जा रहा है कि इन वार्ताओं में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है.