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केंद्रीय बजट 2026 पर विपक्षी नेताओं की आईं प्रतिक्रियाएं, जानिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मायावती सहित अन्य नेताओं ने क्या कहा?

Oppositions on Budget 2026: केंद्री बजट पेश किए जाने के बाद अब विपक्षी नेताओं की प्रतिकियाएं आनी शुरु हो गई हैं. जानिए राहुल, अखिलेश और मायावती सहित दूसरे नेताओं ने क्या कहा?

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01 Feb 2026
( Updated: 01 Feb 2026
12:12 PM )
केंद्रीय बजट 2026 पर विपक्षी नेताओं की आईं प्रतिक्रियाएं, जानिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और मायावती सहित अन्य नेताओं ने क्या कहा?
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केंद्रीय बजट 2026 पेश किए जाने के बाद अब विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं आनी शुरु हो गई हैं. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी की पहली प्रतिक्रिया आई है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय बजट को बुनियादी जरूरतों से परे बताया है. 

राहुल गांधी ने बजट पर क्या कहा?

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘देश में युवा बेरोजगार हैं, मैन्युफैक्चरिंग गिर रही है, निवेशक पूंजी बाहर निकाल रहे हैं, घरेलू बचत तेजी से घट रही है, और किसान संकट में हैं. वैश्विक स्तर पर आने वाले झटकों का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन बजट इन सभी मुद्दों को नजरअंदाज करता है. उन्होंने आगे कहा कि यह ऐसा बजट है जो पाठ्यक्रम सुधार (कोर्स करेक्शन) से इनकार करता है और भारत के असली संकटों के प्रति अंधा बना हुआ है.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार के पास अब कोई आइडिया नहीं बचा है. बजट 2026 भारत की कई आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का एक भी समाधान नहीं देता है. 'मिशन मोड' अब 'चैलेंज रूट' बन गया है. 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' शायद ही किसी 'रिफॉर्म' जंक्शन पर रुकती है. नतीजा: कोई पॉलिसी विजन नहीं, कोई राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं. 

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए अपने एक्स हैंडल पर बजट को निराशाजनक और निंदनीय बताया. उन्होंने लिखा, ‘आ गया भाजपाई बजट का परिणाम, शेयर मार्केट हुआ धड़ाम। 

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बजट 2026 पर क्या बोली मायावती?

बसपा प्रमुख मायावती ने भी केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, देश के संसद में आज केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के सम्बन्ध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा. इसीलिए सर्वसमाज के हित में केवल बातें ना हो बल्कि इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी 
वैसे तो केन्द्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूँजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूँजीपति व धन्नासेठ समर्थक है.

इतना ही नहीं बल्कि खासकर अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व है कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है. और इसी क्रम में संसद में आज पेश बजट को भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह बजट भी आया और गया की तरह परम्परागत रूप से मायूस करने वाला तो नहीं है. और साथ ही यह प्रश्न छोड़ दिया है कि पिछले वर्ष के बजट में सरकार द्वारा किये गये दावे, वादे और आशायें क्या आज पूरी की गई है या एक रस्म को निभा कर रह गयी है. तथा क्या तुलनात्मक रूप में लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन आया है. वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास व बहु-प्रतीक्षित गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित व देशहित से जुडे़ हैं और जिनका आकलन वर्तमान बजट की वाहवाही से पहले जरूर कर लेना है. सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो यह लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है वरना यह जिम्मेदारी कौन निभाता है. 

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