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'कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है, सनातनी सतर्क रहें', अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बाबा रामदेव की नसीहत

प्रयागराज माघ मेले में संगम स्नान के दौरान योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि सनातन धर्म के शत्रु पहले से ही बहुत हैं, इसलिए हिंदुओं को एकजुट रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि कोई इस्लामीकरण की बात कर रहा है तो कोई गजवा-ए-हिंद की, ऐसे में आपसी विवाद से बचना जरूरी है.

'कोई देश का इस्लामीकरण करना चाहता है, सनातनी सतर्क रहें', अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बाबा रामदेव की नसीहत
Baba Ramdev (File Photo)
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में योग गुरु बाबा रामदेव गुरुवार को स्नान के लिए संगम पहुंचे. इस दौरान उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के विषय को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं का एकजुट रहना जरूरी है, क्योंकि सनातन के शत्रु पहले से ही बहुत हैं. कोई इस्लामीकरण कर रहा है तो कोई गजवा-ए-हिंद में लगा है. इसलिए सनातन के शत्रुओं से लड़ना चाहिए, आपस में न लड़ें.

विवाद में ना फंसे साधु-संत 

प्रयागराज माघ मेला में स्नान के बाद अयोध्या में दर्शन करने पहुंचे बाबा रामदेव ने कहा, 'हम शंकराचार्य को भगवान का रूप मानते हैं और हम उम्मीद करते हैं कि कोई भी शंकराचार्य किसी विवाद में शामिल न हो.' योग गुरु ने कहा, 'अब एक संत विवाद कैसे खड़ा कर सकता है? कम से कम धार्मिक स्थलों और तीर्थ स्थलों पर किसी भी संत को किसी विवाद में शामिल नहीं होना चाहिए. यहां न स्नान का और न पालकी का विवाद होना चाहिए.' बाबा रामदेव ने यह भी कहा कि वह साधु किस बात का, जो अहंकार करे. साधु वही बनता है, जिसने अपने अपमान को मिटा दिया.

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सनातनियों को रहना होगा सतर्क 

उन्होंने आगे कहा कि आज सनातन धर्म के विरोधी बाहर पहले से ही बहुत हैं. कोई देश में इस्लामीकरण की बात करता है, कोई ईसाईकरण की, तो कोई गजवा-ए-हिंद जैसे विचार सामने लाता है. ऐसे में सनातनियों को आपस में लड़ने के बजाय एकजुट रहना चाहिए. माघ मेले को लेकर बाबा रामदेव ने कहा कि यह आयोजन नाम, जप और तप के लिए होता है. यहां आने का उद्देश्य आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति है, न कि किसी प्रकार का अहं या प्रतिष्ठा दिखाना. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अहंकार में डूबा हो, वह कभी सच्चा साधु नहीं बन सकता. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग तीर्थ स्थलों पर अपने निजी एजेंडे के साथ आते हैं, जो ठीक नहीं है. तीर्थ किसी के स्वार्थ, अहंकार या प्रचार का मंच नहीं होना चाहिए. यह तीन पवित्र नदियों का संगम स्थल है और मुक्ति का मार्ग है, जिसे विवादों से दूर रखा जाना चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

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17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे. पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा. इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था. बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है. विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए.

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