Advertisement

Loading Ad...

अब सिर्फ मकान-प्लॉट ही नहीं, हर तरह की जमीनें होंगी शामिल, UP में नई OTS योजना के जरिए आवंटियों को मिल सकती है संपत्ति वापस

OTS: सरकार का मकसद है कि जिन संपत्तियों को लोग लेना चाहते हैं लेकिन बढ़ते ब्याज और विवादों के कारण मामला उलझ गया है, उन्हें आसान रास्ता देकर सुलझाया जाए.

Image Source: Social Media
Loading Ad...

OTS Yojana: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक बार फिर एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को नए और बड़े दायरे में लाने की तैयारी कर रही है. इस बार ओटीएस योजना में केवल आवासीय मकान या प्लॉट ही नहीं, बल्कि स्कूल, कॉलेज, संस्थागत, व्यावसायिक और अन्य सरकारी उपयोग की संपत्तियों को भी शामिल किया जाएगा. इससे उन हजारों आवंटियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी संपत्तियां लंबे समय से भुगतान या अन्य कारणों से अटकी हुई हैं. सरकार का मकसद है कि जिन संपत्तियों को लोग लेना चाहते हैं लेकिन बढ़ते ब्याज और विवादों के कारण मामला उलझ गया है, उन्हें आसान रास्ता देकर सुलझाया जाए.

ब्याज पर ब्याज बना विवाद की सबसे बड़ी वजह

दरअसल, प्रदेश के विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद द्वारा जो संपत्तियां आवंटित की जाती हैं, कई बार उनका भुगतान समय पर नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में मूल धन के साथ ब्याज और उस पर फिर ब्याज जुड़ता चला जाता है. समय बीतने के साथ राशि इतनी बढ़ जाती है कि आवंटी उसे चुका पाने की स्थिति में नहीं रहता. इसी कारण आवंटी और प्राधिकरण के बीच विवाद बढ़ते हैं और संपत्तियां वर्षों तक फंसी रहती हैं. इससे न तो सरकार को पैसा मिल पाता है और न ही आवंटी को संपत्ति का लाभ मिल पाता है. इसी समस्या को देखते हुए उच्च स्तर पर सहमति बनी है कि ओटीएस योजना के जरिए ऐसे मामलों को खत्म किया जाए.

Loading Ad...

नक्शा डिफाल्टर मामलों को भी मिलेगा समाधान

Loading Ad...

इस बार ओटीएस योजना की सबसे खास बात यह होगी कि नक्शा पास न कराने या नियमों के अनुसार निर्माण न होने वाले मामलों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा. यानी जो लोग नक्शा संबंधी नियमों के कारण डिफाल्टर घोषित हो गए हैं, उन्हें भी ओटीएस के तहत समाधान का मौका मिलेगा. इसके साथ ही सरकारी संस्थाओं को आवंटित जमीन, स्कूलों के भूखंड, चैरिटेबल संस्थाओं की संपत्तियां, सहकारी समितियां और सभी तरह की व्यावसायिक संपत्तियां, चाहे वे नीलामी के जरिए मिली हों या किसी अन्य माध्यम से, सबको इस योजना में शामिल किया जाएगा.

10 साल से अटकी संपत्तियों की समस्या होगी खत्म

Loading Ad...

उच्चाधिकारियों के अनुसार, प्रदेश में 1 से 10 साल तक डिफाल्टर पड़ी संपत्तियों की संख्या करीब 19 हजार है. इन संपत्तियों के कारण विकास प्राधिकरणों का लगभग 28 हजार करोड़ रुपये फंसा हुआ है. यह रकम सरकार के विकास कार्यों में इस्तेमाल हो सकती थी, लेकिन विवादों और लंबी प्रक्रिया के कारण अटकी हुई है. ओटीएस योजना के लागू होने से इन मामलों का तेजी से निपटारा होने की उम्मीद है.

कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल्द लागू होगी योजना

यह भी पढ़ें

शासन स्तर पर इस योजना को लेकर तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. जल्द ही इस संबंध में कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराया जाएगा. मंजूरी मिलते ही ओटीएस योजना लागू कर दी जाएगी. सरकार का उद्देश्य है कि एक तरफ आवंटियों को राहत मिले और दूसरी तरफ विकास प्राधिकरणों को उनका फंसा हुआ मूल धन वापस मिल सके. यह योजना सरकार और जनता - दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है और वर्षों से अटकी संपत्तियों को आखिरकार नई जिंदगी मिल सकती है.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...