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मोदी कैबिनेट में होगा बड़ा फेरबदल! वित्त, शिक्षा समेत कई मंत्रालयों में बदलाव की चर्चा, इन बड़े चेहरों पर टिकी नजर

संसद के मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चा तेज है. अटकलें हैं कि कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं और कुछ नए चेहरों को भी जगह मिल सकती है.

Image Source:- PIB Via IANS
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संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्र की राजनीति एक बार फिर गर्म होती दिखाई दे रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चाएं हो रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार आने वाले विधानसभा चुनावों और हाल के कुछ विवादों को देखते हुए मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव कर सकती है. हालांकि अब तक सरकार या भारतीय जनता पार्टी की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.

संसद सत्र से पहले क्यों तेज हुई कैबिनेट फेरबदल की चर्चा?

चर्चाओं के अनुसार इस संभावित फेरबदल में कुछ नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं. इतना ही नहीं, कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर किए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं. यही वजह है कि राजनीतिक हलकों में इस विषय पर लगातार चर्चा बनी हुई है.

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शक्तिकांत दास का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों?

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सबसे अधिक चर्चा पूर्व आईएएस अधिकारी और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को लेकर हो रही है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक सरकार उनके लंबे प्रशासनिक और आर्थिक अनुभव का उपयोग करना चाहती है. अटकलें हैं कि उन्हें वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. यदि ऐसा होता है तो वह उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो जाएंगे, जिन्होंने आरबीआई गवर्नर रहने के बाद देश के वित्त मंत्रालय की कमान संभाली. भारत के इतिहास में इससे पहले सीडी देशमुख और डॉ. मनमोहन सिंह इस तरह की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. सीडी देशमुख देश के पहले भारतीय आरबीआई गवर्नर रहे और बाद में वित्त मंत्री बने. वहीं डॉ. मनमोहन सिंह पहले आरबीआई गवर्नर, फिर वित्त मंत्री और उसके बाद देश के प्रधानमंत्री भी बने. इसी कारण शक्तिकांत दास का नाम सामने आने से इस चर्चा ने और अधिक जोर पकड़ लिया है.

वित्त मंत्रालय के लिए क्यों परफेक्ट माने जा रहे हैं शक्तिकांत दास?

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शक्तिकांत दास को आर्थिक मामलों का गहरा अनुभव माना जाता है. उन्होंने वित्त मंत्रालय में रहते हुए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और आठ केंद्रीय बजट तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा रहे. वर्ष 2018 से 2024 तक आरबीआई गवर्नर के रूप में उन्होंने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें कई सम्मान और A+ रेटिंग मिल चुकी है. हालांकि फिलहाल वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में यदि भविष्य में उन्हें मंत्री बनाया जाता है तो छह महीने के भीतर उन्हें लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य बनना होगा. राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजा जा सकता है, जहां नवंबर 2026 में 10 सीटें खाली होने वाली हैं.

निर्मला सीतारमण और धर्मेंद्र प्रधान पर क्यों टिकी हैं सबकी नजरें?

संभावित फेरबदल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सबसे ज्यादा चर्चा में हैं. चर्चा यह है कि निर्मला सीतारमण को कैबिनेट से बाहर करने के बजाय शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जा सकती है. वहीं धर्मेंद्र प्रधान को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा रही है. दरअसल, NEET पेपर लीक विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय विपक्ष और कई छात्र संगठनों के निशाने पर रहा है. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी समय-समय पर उठती रही है. ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस मुद्दे पर कोई बड़ा फैसला ले सकती है. वहीं कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि यदि शिक्षा मंत्रालय उनसे वापस लिया जाता है तो विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक जीत के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा.

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किन नए चेहरों को मिल सकती है मोदी कैबिनेट में जगह?

चर्चाओं के मुताबिक जिन नेताओं को संभावित रूप से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है, उनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, शक्तिकांत दास, सुखेंदु शेखर राय, तरुण चुग, राघव चड्ढा, श्रीकांत शिंदे और अनुराग ठाकुर के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं. हालांकि इन सभी नामों पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

किन मंत्रियों के विभाग बदलने या बाहर होने की चर्चा?

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वहीं जिन मंत्रियों के विभाग बदलने या कैबिनेट से बाहर होने की चर्चा है, उनमें मनोहर लाल खट्टर, रवनीत सिंह बिट्टू, अश्विनी वैष्णव, धर्मेंद्र प्रधान, निर्मला सीतारमण, हरदीप सिंह पुरी और नितिन गडकरी के नाम लिए जा रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार प्रदर्शन, राजनीतिक समीकरण और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला ले सकती है.

विधानसभा चुनावों का कितना रहेगा असर?

आने वाले समय में उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा. पंजाब को लेकर यह चर्चा है कि वहां सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है. इसी कारण हरदीप सिंह पुरी की भूमिका को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. दूसरी ओर, महाराष्ट्र से श्रीकांत शिंदे और पश्चिम बंगाल से सुखेंदु शेखर राय का नाम भी संभावित नए चेहरों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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क्या आरएसएस की राय भी निभा सकती है अहम भूमिका?

राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राय और संगठन की प्राथमिकताओं का भी असर देखने को मिल सकता है. हाल ही में भाजपा और संघ के बीच हुई बैठकों के बाद इन चर्चाओं ने और गति पकड़ ली है. साथ ही पंजाब की राजनीति को ध्यान में रखते हुए तरुण चुग की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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बहरहाल, इन सभी चर्चाओं और अटकलों के बीच अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी नेतृत्व को ही लेना है. जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक किसी भी नाम या मंत्रालय में बदलाव को केवल संभावित राजनीतिक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए. अब सबकी नजरें मानसून सत्र से पहले होने वाले संभावित फैसलों पर टिकी हैं, जो देश की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

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