महालैब्स बना स्वास्थ्य का सहारा, महाराष्ट्र में 7.6 करोड़ मरीजों को मिली मुफ्त जांच की सुविधा
Maharashtra: महालैब्स योजना ने स्वास्थ्य सेवाओं को आम आदमी के और करीब ला दिया है और बिना खर्च के बेहतर जांच सुविधा देकर लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है.
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Maharashtra MahaLabs Yojana: राष्ट्रीय निःशुल्क प्रयोगशाला निदान सेवा योजना के तहत राज्य में शुरू की गई ‘महालैब्स’ योजना आज आम लोगों के लिए बहुत बड़ी सहारा बन चुकी है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि मरीजों को इलाज से पहले जरूरी जांचें समय पर और बिना किसी खर्च के मिल सकें. इसके तहत राज्य के 3,500 से अधिक सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को साधारण खून-पेशाब की जांच से लेकर गंभीर और खास तरह की जांचें भी पूरी तरह निःशुल्क दी जा रही हैं. इससे बीमारी की पहचान जल्दी हो रही है और इलाज सही समय पर शुरू हो पा रहा है. अब तक 7.6 करोड़ से ज्यादा मरीज इस योजना का लाभ ले चुके हैं और रोज़ाना औसतन 45,000 से अधिक लोग महालैब्स की सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं. i
उन्नत और विशेष जांच की सुविधा
महालैब्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां सिर्फ सामान्य जांच ही नहीं, बल्कि कई उन्नत और विशेष जांचें भी उपलब्ध हैं. इनमें हिस्टोपैथोलॉजी, मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (आरटीपीसीआर), माइक्रोबायोलॉजी, एचबी इलेक्ट्रोफोरेसिस, और नवजात शिशुओं की स्क्रीनिंग जैसी अहम जांचें शामिल हैं. अधिकारियों के अनुसार, नवजात स्क्रीनिंग, सिकल सेल से जुड़ी जांच, वायरल लोड टेस्ट और खून से संबंधित जांचों के मामले में महालैब्स की प्रयोगशालाएं देश में सबसे ज्यादा जांच करने वाले केंद्रों में गिनी जाती हैं. इससे हजारों बच्चों और मरीजों की जान समय पर बचाई जा सकी है.
पुणे से शुरू होकर पूरे राज्य तक सफर
महालैब्स की शुरुआत साल 2017 में पुणे की एक प्रयोगशाला से हुई थी. धीरे-धीरे इस योजना का विस्तार हुआ और आज यह पूरे राज्य में 137 आधुनिक प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के रूप में काम कर रही है. नवी मुंबई के खारघर स्थित महालैब्स लैब को तो अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्था कॉलेज ऑफ अमेरिकन पैथोलॉजिस्ट्स से मान्यता भी मिल चुकी है, जो इसकी गुणवत्ता और भरोसे को साबित करती है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ाव
महाराष्ट्र सरकार ने महालैब्स को कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा है, जिससे इन योजनाओं का असर और मजबूत हुआ है. इनमें राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन, राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शामिल हैं. इस एकीकरण से बीमारी की पहचान, उसका सही इलाज और भविष्य में उसे खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.
डिजिटल रिपोर्ट की सुविधा
महालैब्स ने तकनीक का भी अच्छा उपयोग किया है. सभी जांच रिपोर्टें मरीजों को एसएमएस, व्हाट्सएप, ई-मेल और डॉक्टर पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप में भेजी जाती हैं. इससे मरीजों को रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. जरूरत पड़ने पर रिपोर्ट की हार्ड कॉपी भी बाद में उपलब्ध कराई जाती है. यह सुविधा खासकर दूर-दराज़ इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है.
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