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MP को मिलेगा देश का सबसे बड़ा एयरबेस, 100 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण, रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम प्रोजेक्ट

मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा एयरबेस बनने जा रहा है. 100 एकड़ जमीन पर बनने वाला यह आधुनिक एयरबेस भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करेगा. इसके निर्माण से न केवल सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी बल्कि क्षेत्र में आर्थिक और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

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20 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
08:19 AM )
MP को मिलेगा देश का सबसे बड़ा एयरबेस, 100 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण, रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम प्रोजेक्ट
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मध्य प्रदेश के देवास जिले में देश का सबसे बड़ा एयरबेस स्थापित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने नेमावर क्षेत्र में प्रस्तावित इस मेगा प्रोजेक्ट को तकनीकी मंजूरी दे दी है. लगभग 100 एकड़ जमीन पर शुरूआती निर्माण के साथ यह एयरबेस न केवल नागरिक उड़ानों के लिए बल्कि भारतीय वायुसेना (IAF) के फाइटर जेट्स के संचालन के लिए भी तैयार किया जाएगा. यह विकास मध्य प्रदेश को हवाई संपर्क के मामले में एक नया आयाम देगा, जहां फाइटर जेट्स की गर्जना स्थानीय अर्थव्यवस्था और रक्षा क्षमता को मजबूत करेगी. विभिन्न सरकारी और मीडिया स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट 2023 से चर्चा में है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है.

रणनीतिक स्थान पर बनेगा विशाल एयरबेस

देवास जिले के नेमावर क्षेत्र को चुना गया है क्योंकि यह इंदौर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों से अच्छी सड़क और रेल कनेक्टिविटी वाला है. प्रस्तावित एयरबेस कुल 6,000 एकड़ में फैलेगा, लेकिन प्रारंभिक चरण में 100 एकड़ जमीन पर मुख्य रनवे, हैंगर और कंट्रोल टावर का निर्माण होगा. राज्य के औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव ने 2022 में AAI चेयरमैन संजीव कुमार से चर्चा के बाद इसकी घोषणा की थी. स्रोतों के मुताबिक, यह एयरबेस जेवर (नोएडा) एयरपोर्ट से भी बड़ा होगा, जो कुल 25,000 एकड़ में फैला है. नेमावर की भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से आदर्श बनाती है, जहां फाइटर जेट्स जैसे राफेल और सुखोई के संचालन की सुविधा होगी.

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रक्षा और नागरिक उड़ानों का नया केंद्र

यह एयरबेस भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा बनेगा, जहां मिराज-2000 और अन्य फाइटर जेट्स तैनात होंगे. मध्य प्रदेश में पहले से ग्वालियर का महाराजपुर एयरबेस मिराज जेट्स का केंद्र है, लेकिन यह नया बेस आकार में इससे कहीं बड़ा होगा. स्थानीय निवासियों को जल्द ही फाइटर जेट्स की दहाड़ सुनाई देगी, जो राज्य की रक्षा तत्परता को बढ़ाएगी. नागरिक पक्ष से, यह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रूप में दिल्ली, मुंबई और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को जोड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे देवास-इंदौर औद्योगिक कॉरिडोर मजबूत होगा, और रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे. IAF के अनुसार, ऐसे बेस दुश्मन सीमाओं पर नजर रखने और आपातकालीन ऑपरेशंस के लिए महत्वपूर्ण हैं.

मंजूरी और भूमि अधिग्रहण की स्थिति

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AAI ने अगस्त 2022 में तकनीकी मंजूरी प्रदान की, जिसके बाद प्रस्ताव मुख्य सचिव को भेजा गया. वर्तमान में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास पैकेज दिया जाएगा. राज्य सरकार ने जनवरी 2023 में भूमिपूजन की योजना बनाई थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसमें देरी हुई. अब 2025 तक निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है. बजट के लिहाज से यह प्रोजेक्ट 50,000 करोड़ से अधिक का होगा, जिसमें सिविल और मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है. मध्य प्रदेश सरकार ने उड़ान योजना के तहत इसे बढ़ावा दिया है, जो क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करती है.

स्थानीय विकास की नई उम्मीद

देवास जिले में इस एयरबेस से पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट मिलेगा. जिले की आबादी पर सकारात्मक असर पड़ेगा, जहां वर्तमान में कृषि प्रमुख है. हालांकि, शोर प्रदूषण और भूमि विवाद जैसे मुद्दों पर स्थानीय विरोध भी दर्ज किया गया है. एनजीओ और प्रशासन मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं. मध्य प्रदेश के अन्य एयरपोर्ट्स जैसे भोपाल का राजा भोज और इंदौर इंटरनेशनल पहले से व्यस्त हैं, लेकिन यह नया बेस राज्य को रक्षा हब बनाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मध्य भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी.

भविष्य की योजनाएं

मध्य प्रदेश सरकार ने शिवपुरी में 292 एकड़ पर एक और एयरपोर्ट की मंजूरी दी है, लेकिन देवास प्रोजेक्ट सबसे महत्वाकांक्षी है. केंद्र सरकार की 'उड़ान' योजना के तहत राज्य में 20 नए एयरपोर्ट प्रस्तावित हैं. IAF के 2025 के प्लान में मध्य क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर है. यह एयरबेस पूर्ण होने पर एशिया के प्रमुख सैन्य अड्डों में शुमार होगा.

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