जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी मांग, 3% डीए बढ़ोतरी, वेतन विलय और पेंशनरों के लिए मेडिकल भत्ता की गुहार

जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों ने उमर सरकार से 3% महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी, वेतन विलय और पेंशनरों के लिए मेडिकल भत्ता देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच इन मांगों को पूरा किया जाना जरूरी है, ताकि आर्थिक बोझ कम हो सके.

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21 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
02:08 PM )
जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी मांग, 3% डीए बढ़ोतरी, वेतन विलय और पेंशनरों के लिए मेडिकल भत्ता की गुहार

जम्मू-कश्मीर के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने सरकार से 3% डीए (महंगाई भत्ता) बढ़ोतरी की मांग तेज कर दी है. केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को मिले लाभ की तर्ज पर यह मांग उठी है. इसके अलावा, वेतन विलय (बेसिक पे में डीए को मिलाना) और पेंशनरों के लिए मेडिकल भत्ता बढ़ाने की भी गुहार लगाई जा रही है. एम्प्लॉयी जॉइंट एक्शन कमिटी (EJAC) ने सरकार को चिट्ठी लिखकर तुरंत कार्रवाई की मांग की. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई की मार से जूझ रहे कर्मचारी और रिटायर्ड लोग राहत के हकदार हैं. अगर मांगें पूरी न हुईं तो आंदोलन की चेतावनी दी गई.

3% डीए बढ़ोतरी की मांग

EJAC के अध्यक्ष वजाहत हुसैन दर्रानी ने कहा कि केंद्रीय कर्मचारियों को जुलाई 2025 से 3% डीए बढ़ोतरी मिली, जो बेसिक पे का 58% हो गया. जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को भी यही लाभ मिलना चाहिए. प्रांतीय अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ शेख ने जोर देकर कहा कि महंगाई की चपेट में कर्मचारी और पेंशनर परेशान हैं. वर्तमान में 6ठे पे कमीशन के तहत डीए अलग से कैलकुलेट होता है. EJAC ने मांग की कि यह बढ़ोतरी तुरंत लागू हो, ताकि दिवाली से पहले राहत मिले.

वेतन विलय की गुहार

कर्मचारी संगठनों ने वेतन विलय की मांग भी उठाई, जिसमें डीए को बेसिक पे में मिलाकर नया वेतनमान तय किया जाए. 7th पे कमीशन के तहत केंद्र ने ऐसा किया था, लेकिन जम्मू-कश्मीर में अभी भी देरी हो रही. EJAC के प्रवक्ता मीर बशीर ने कहा कि इससे कर्मचारियों का पेंशन और भविष्य सुरक्षित होगा. पेंशनर्स एसोसिएशन ने भी कहा कि विलय न होने से रिटायर्ड लोगों को नुकसान हो रहा. सरकार से अपील की गई कि 2025-26 बजट में इसे शामिल करें.

पेंशनरों के लिए मेडिकल भत्ता

पेंशनर्स एंड सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने मेडिकल भत्ता बढ़ाने की मांग की. वर्तमान में यह 300 रुपये मासिक है, लेकिन हेल्थकेयर खर्चों के बढ़ने से अपर्याप्त साबित हो रहा. EJAC ने सुझाव दिया कि इसे 1000 रुपये किया जाए. अध्यक्ष फयाज अहमद शबनम ने कहा कि बुजुर्गों को दवाओं और इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ रहा. केंद्र सरकार ने भी पेंशनर्स के लिए डीआर बढ़ाया, तो जम्मू-कश्मीर को पीछे नहीं रहना चाहिए.

कर्मचारी संगठनों का रुख

EJAC ने सरकार को चेतावनी दी कि मांगें पूरी न हुईं तो धरना और विरोध प्रदर्शन होंगे. जम्मू और श्रीनगर में मीटिंगें हो रही हैं. संगठनों ने कहा कि कर्मचारी राज्य की रीढ़ हैं, उनकी उपेक्षा बर्दाश्त नहीं. पूर्व में 2024 में 3% डीए बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन अब नई मांगें हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को बजट में प्रावधान करना चाहिए.

फाइनेंस डिपार्टमेंट ने कहा कि मांगों पर विचार चल रहा. हाल ही में ओमर अब्दुल्ला सरकार ने डीए को 53% किया था. कर्मचारी उम्मीद कर रहे कि 2025 के अंत तक फैसला आएगा. यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा. संगठनों ने कहा कि सरकार कर्मचारियों की भलाई सुनिश्चित करे.

 

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