फोकट, घंटा… ‘जहरीले’ पानी से लोगों की मौत पर मंत्री जी का उपहास! पीड़ितों ने मुंह पर फेंका चेक!
इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन इस त्रासदी को भी मंत्री और इंदौर से विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने मजाक बना दिया.
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ये देश की विडंबना है कि जिस शहर को सबसे साफ शहर का तमगा मिला वहां गंदे पानी से कई लोगों की मौत हो जाती है, विडंबना ये भी है कि माननीयों के लिए इन लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है. मातमी सन्नाटे से उन्हें ‘घंटा’ फर्क पड़ता है. लोगों की जान तो ‘फोकट’ की है.
इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है लेकिन इस त्रासदी को भी मंत्री और इंदौर से विधायक कैलाश विजयवर्गीय ने मजाक बना दिया. उन्होंने इस मसले पर रिपोर्टर के सवाल को न केवल इग्नोर किया बल्कि इसे फोकट का सवाल करार दिया. इसे घंटा कहकर बेशर्मी पर उतर आए. हालांकि वीडियो वायरल हुआ, सरकार की किरकिरी हुई तो मंत्रीजी ने माफी भी मांगी लेकिन लोगों की मौत पर उनका रवैया कैसा है ये भी बता दिया.
लोगों ने मुआवजा लेने से किया इंकार
इंदौर के भागीरथीपुरा में गंदे पानी से तबाही मची है, डायरिया और उल्टी से कई लोगों की मौत हो गई है. हालांकि सरकारी आंकड़ों में केवल 4 मौतें दर्ज हैं. दूसरी ओर मौतों का उपहास उड़ाने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मृतकों के परिजनों को 2-2 रुपने देने गए तो मृतकों के परिजनों ने राहत राशि का चेक लेने से साफ इंकार कर दिया है. परिजनों ने साफ कहा, हमें आपका चेक नहीं चाहिए.
मंत्री के खिलाफ लोगों का गुस्सा खुलकर फूटा, खासकर महिलाएं बेहद आक्रोशित थीं. गंदे पानी से एक 5 साल के मासूम की भी मौत हो गई. लोगों का आरोप है कि पिछले दो साल से इलाके में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर पार्षद और सरकारी हुक्मरान तक शिकायत की गई लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. धीरे-धीरे कर जब कई लोगों की जान चली गई तो मुआवजे से जान की भरपाई करने चले आए. अभी भी कई लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. लोगों का कहना है, अगर प्रशासन पहले ही सुध ले लेती तो ये दिन नहीं देखना पड़ता.
वहीं, लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि दूषित पानी से प्रभावित 16 बच्चों समेत 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से यह रिपोर्ट जारी की गई है. CMHO डॉ. माधव हसानी ने कहा, सैंपल की जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान चली गई. हालांकि जिलाधिकारी का कहना है कि अभी भी डिटेल रिपोर्ट का इंतजार है.
पाइपलाइन में मिला सीवर का पानी
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना कि भागीरथपुरा के पेयजल में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं. उन्होंने अंदेशा जताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पीने के पानी की सप्लाई पाइपलाइन में एक ऐसी जगह पर लीकेज पाया गया, जहां एक शौचालय बना हुआ है. शौचालय से निकला पानी पेयजल की लाइन में मिक्स हो गया. इस पानी ने लोगों की प्यास तो बुझाई लेकिन हमेशा के लिए सुला दिया.
NHRC ने लिया संज्ञान
उधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले में संज्ञान लिया है. आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. मृतकों में 5 महीने का मासूम अव्यान भी शामिल था. अव्यान की मां बेसुध है. वह खुदको कोसती हैं, वह सोचती हैं कि उस दिन उन्होंने दूध में पानी न मिलााया होता तो आज उनका मासूम बेटा जिंदा होता. जो 10 साल की मिन्नतों के बाद पैदा हुआ था.
इन्हें गंदे पानी ने नहीं उन अधिकारियों ने मार दिया. जो बार-बार शिकायतों के बाद भी नींद में रहे. जिन्होंने इनकी शिकायतों को अनदेखा किया. नीचे से लेकर ऊपर हर एक जिम्मेदार ने गैरजिम्मेदारी से मामले को इधर से उधर ही किया. अब मंत्रीजी से ही उम्मीद थी कि वह, जिम्मेदारी दिखाएंगे, जबावदेही देंगे लेकिन उन्होंने तो कमसकम इंसानियत भी नहीं दिखाई.
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं, इंदौर प्रशासन की लापरवाही और गैर जिम्मेदारी पर कांग्रेस ने मोहन यादव सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया. जिसमें आक्रोशित महिलाएं कह रही हैं, पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा है. BJP पार्षद को बार-बार बताया गया, लेकिन आज तक समस्या का समाधान नहीं हुआ. जीतू पटवारी ने कहा, पूरा मोहल्ला बीमार है, लेकिन सत्ता के अहंकार में चूर मंत्री जी ने गाड़ी आगे बढ़ा ली और बहन की बात तक नहीं सुनी.
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