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अमेरिकी कंपनी बोईंग की दादागिरी खत्म, भारत बनाएगा खुद का विमान, HAL ने रूस के साथ की बड़ी डील

भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अब सिविल एविएशन सेक्टर में मजबूती से उतर रहा है. मिलिट्री एयरक्राफ्ट निर्माता एचएएल पहली बार यात्री विमान निर्माण में कदम रख रही है. विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रूस के साथ बनने वाला SJ-100 विमान, ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर और हिंदुस्तान-228 पेश कर अपनी नई रणनीति दिखाई.

Sourc: X/ @HALHQBLR

भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक और बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रहा है. यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका और उसकी दिग्गज विमान निर्माता कंपनियों को कड़ी चुनौती देने वाला माना जा रहा है. जिस क्षेत्र में लंबे समय तक अमेरिकी कंपनी बोईंग का दबदबा रहा, अब वहां भारत अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है. खास बात यह है कि इस बदलाव की अगुवाई देश की सरकारी एविएशन कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) करने जा रही है.

सिविल एविएशन सेक्टर में कदम रखेगी HAL 

अब तक मिलिट्री एयरक्राफ्ट निर्माण के लिए जानी जाने वाली एचएएल पहली बार सिविल एविएशन सेक्टर में बड़े पैमाने पर कदम रखने जा रही है. हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया प्रदर्शनी में एचएएल ने रूस के साथ मिलकर बनाए जाने वाले सुपरजेट एसजे-100 (SJ-100) यात्री विमान को दुनिया के सामने पेश किया. इसके साथ ही ध्रुव-एनजी हेलीकॉप्टर और हिंदुस्तान-228 विमान भी प्रदर्शित किए गए, जिसने भारत की एविएशन क्षमता को नई पहचान दी.

कंपनी ने क्या कहा?

एचएएल के सीएमडी डीके सुनील कुमार ने जानकारी दी कि एसजे-100 यात्री विमान के लिए रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन के साथ करार हो चुका है. मेक इन इंडिया के तहत अगले तीन साल में यह विमान भारत में ही बनकर तैयार होगा. इन विमानों का निर्माण एचएएल की नासिक और कानपुर यूनिट में किया जाएगा. नासिक वही केंद्र है जहां पहले रूस के सहयोग से करीब 250 सुखोई फाइटर जेट बनाए जा चुके हैं. अब वहां सिविल एयरक्राफ्ट तैयार किए जाएंगे, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.

उड़ान सरकार की योजना के तहत होगा 

एसजे-100 विमान का इस्तेमाल सरकार की उड़ान योजना के तहत किया जाएगा. इस योजना का मकसद टायर-2 और टायर-3 शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है. फिलहाल भारत को इस योजना के लिए लगभग 200 छोटे विमानों की जरूरत है. अगर हिंद महासागर क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों जैसे श्रीलंका और मालदीव को भी इसमें शामिल किया जाए तो यह संख्या 350 तक पहुंच जाती है. एसजे-100 विमान में 103 यात्रियों के बैठने की क्षमता है और रूस में पहले से ही 16 कमर्शियल एयरलाइंस इसका इस्तेमाल कर रही हैं. एचएएल का मानना है कि कम दूरी की उड़ानों के लिए एसजे-100  एक गेम चेंजर साबित होगा. यह साझेदारी एचएएल और रूस के बीच दशकों पुराने भरोसे का नतीजा है. एचएएल पहले ही भारतीय वायुसेना के लिए रूस से लाइसेंस लेकर 600 मिग-21 और 250 सुखोई फाइटर जेट का निर्माण कर चुका है. हालांकि सिविल एयरक्राफ्ट के लिए यह रूस के साथ अपनी तरह का पहला समझौता है.

क्या-क्या बनाती है HAL?

एचएएल के CMD के अनुसार आने वाले वर्षों में कंपनी का 25 प्रतिशत ऑपरेशन सिविल सेक्टर से होगा. अभी यह आंकड़ा सिर्फ 5 से 6 प्रतिशत के बीच है. फिलहाल एचएएल लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस, लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड, एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर ध्रुव और ट्रेनर एयरक्राफ्ट का निर्माण करती है. ये सभी सैन्य उपयोग के लिए हैं. हालांकि एचएएल का सिविल एविएशन से रिश्ता नया नहीं है. साल 1961 में कंपनी ने एवरो यात्री विमान का निर्माण किया था, लेकिन यह प्रोजेक्ट 1988 में बंद कर दिया गया. अब एचएएल ने डोरनियर मिलिट्री एयरक्राफ्ट के सिविल वर्जन हिंदुस्तान-228 का निर्माण शुरू कर दिया है. 16 सीटों वाले इस विमान को एलायंस एयर ने खरीदा है. यही नहीं, यह भारत का पहला एक्सपोर्ट होने वाला सिविल विमान भी बन चुका है. एचएएल अब तक ऐसे दो विमान कैरेबियन देश गुयाना को निर्यात कर चुका है और आने वाले समय में और ऑर्डर मिलने की उम्मीद है.

बताते चलें कि इसके साथ ही एचएएल लाइट एडवांस हेलीकॉप्टर के सिविल वर्जन ध्रुव-एनजी पर भी तेजी से काम कर रहा है. माना जा रहा है कि DGCA जल्द ही इसे सर्टिफिकेशन दे सकता है. कुल मिलाकर एचएएल की सिविल एविएशन में एंट्री भारत को विमान निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है.

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