I.N.D.I.A गठबंधन में दरार! संजय राउत ने नेतृत्व पर भी उठाए सवाल, कहा- चुनाव से पहले जागने से काम नहीं बनेगा
लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटों पर रोकने के बाद I.N.D.I.A गठबंधन उत्साहित था, लेकिन हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हार ने गठबंधन में दरारें दिखा दी हैं. शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि गठबंधन केवल चुनाव के समय सक्रिय होता है और हमेशा सक्रिय रहना चाहिए.
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लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 240 सीटों पर रोकने के बाद विपक्षी I.N.D.I.A गठबंधन उत्साहित दिखा था. लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि गठबंधन में दरारें भी पड़ने लगी हैं. हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हुए चुनावी नतीजों ने विपक्ष को चिंता में डाल दिया है. विशेषकर महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में गठबंधन को करारा झटका लगा है, जिससे आंतरिक मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं. इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत (Sanjay Raut) ने विपक्षी गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी बड़ा बयान दिया है.
गठबंधन पर सवाल उठाए महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता
संजय राउत ने कहा कि यह गठबंधन केवल लोकसभा चुनाव के समय ही सक्रिय होता है. उन्होंने स्पष्ट किया,'लोकसभा चुनाव जब आने वाले हैं, तभी I.N.D.I.A गठबंधन का काम शुरू होता है. उससे पहले आपस में कोई बातचीत तक नहीं होता. चुनाव से पहले कोई यह तक नहीं जानता कि आखिर गठबंधन में क्या चल रहा है.' राउत ने कहा कि सिर्फ संसद में हंगामा करने से काम नहीं बनेगा. उनका कहना था कि विपक्षी नेताओं को संसद में बोलने भी नहीं दिया जाता, ऐसे में वह बाहर क्या कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि गठबंधन को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए, चाहे चुनाव हों या ना हों. राउत ने यह भी कहा कि सभी दलों को मिलकर किसान आंदोलन, कानून व्यवस्था और मणिपुर के हालात जैसे मुद्दों पर काम करना चाहिए और सरकार पर दबाव बनाना चाहिए.
देश के सामने गंभीर मुद्दे
राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, 'देश में बहुत सारी समस्याएं हैं. अमेरिका के साथ डील का यह नतीजा होगा कि देश के किसान मरेंगे, आत्महत्या करने लगेंगे और भुखमरी के हालात पैदा होंगे. लेकिन अगर विपक्षी गठबंधन सिर्फ संसद में ही यह मुद्दे उठाएगा, तो काम बनने वाला नहीं है.' राउत ने यह भी कहा कि गठबंधन को सतर्क रहकर सभी दलों को मिलकर काम करना होगा. उन्होंने जोर दिया कि गठबंधन केवल चुनाव से पहले जागरूक न हो, बल्कि हमेशा ऐक्टिव रहना चाहिए.
नेतृत्व परिवर्तन पर उठे सवाल
संजय राउत ने गठबंधन में नेतृत्व बदलने के सवाल पर कहा कि हर किसी की राय अलग हो सकती है. किसी का मानना हो कि ममता बनर्जी नेतृत्व करें या एम.के. स्टालिन, यह व्यक्तिगत राय हो सकती है. उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी फैसले से पहले गठबंधन की मीटिंग बुलानी जरूरी है और तभी तय किया जा सकता है कि नेतृत्व किसे दिया जाए.
गौरतलब है कि इस साल पश्चिम बंगाल, असम समेत कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग जल्द ही इन चुनावों की तारीखों का ऐलान कर सकता है. ऐसे में विपक्षी गठबंधन के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उन्हें न केवल राज्यों में बल्कि देशभर में अपनी भूमिका और रणनीति मजबूत करनी होगी. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गठबंधन की स्थिरता और लगातार सक्रियता ही इसके भविष्य को तय करेगी. यदि I.N.D.I.A गठबंधन केवल चुनाव के समय ही सक्रिय रहेगा, तो विपक्षी ताकत अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाएगी और जनता का भरोसा जीतना मुश्किल हो जाएगा.
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