पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर सीएम धामी सहित शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, बताया प्रेरणा स्रोत

सीएम धामी ने इसके बाद मुख्यमंत्री आवास में भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी.

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25 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:45 PM )
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर सीएम धामी सहित शीर्ष नेताओं ने दी श्रद्धांजलि, बताया प्रेरणा स्रोत
Image_@pushkardhami

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर दीनदयाल पार्क में स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया. इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज के गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए जीवनभर काम किया. उनकी शिक्षाएं और आदर्श आज भी प्रेरणा स्रोत हैं.

सीएम धामी ने दी पंडित दीनदयाल उपाध्याय को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि दीनदयाल जी के विचार और 'अंत्योदय' का संकल्प राज्य की विकास नीति की प्रेरणा हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है.

सीएम धामी ने इसके बाद मुख्यमंत्री आवास में भी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी.

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी दीनदयाल उपाध्याय को दी श्रद्धांजलि 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर, मैंने नई दिल्ली में 'सेवा पखवाड़ा' के अंतर्गत 'स्वच्छता ही सेवा (एसएचएस) - 2025' अभियान में भाग लिया. मैं प्रत्येक नागरिक से इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और सभी के लिए एक स्वच्छ, स्वस्थ और हरित भारत बनाने में योगदान देने का आग्रह करता हूं."

दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर केंद्रीय गृह ने किया भावुक पोस्ट 

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, "भारतीय जनसंघ के संस्थापक व ‘एकात्म मानववाद’ के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का उनकी जयंती पर वंदन करता हूं. दीनदयाल जी ने एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को एक समग्र इकाई मानकर आर्थिक प्रगति के साथ नैतिक व सांस्कृतिक उत्थान पर भी बल दिया. जनसंघ के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला राजनीतिक विकल्प दिया. दीनदयाल जी के ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ व ‘अन्त्योदय’ के सिद्धांत हर एक राष्ट्रप्रेमी के लिए प्रेरणीय हैं."

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