Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

'धरना स्थल पर हमेशा के लिए नहीं बैठ सकते', जंतर-मंतर पर सुनवाई में CJI की बड़ी टिप्पणी, सरकार-पुलिस को नोटिस जारी

दिल्ली में बीते दिनों हुए प्रदर्शनों औऱ पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की. यहां कोर्ट ने दो टूक कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन किसी विरोध स्थल पर स्थायी रूप से कब्जा नहीं कर सकता.

Image Source- IANS
Loading Ad...

त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर रोक की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई का मुद्दा भी आया. जिस पर CJI ने बड़ी टिप्पणी की है. SC ने केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया है.

'विरोध स्थल पर नहीं कर सकते कब्जा'

इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विरोध-प्रदर्शनों को लेकर कुछ चीजें स्पष्ट करते हुए कहा कि किसानों, पत्रकारों समेत हर किसी को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन इसके लिए समय सीमा तय होनी चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि विरोध स्थल पर कोई भी हमेशा के लिए नहीं बैठ सकता.

Loading Ad...

'विरोध-प्रदर्शन का अधिकार सबको'

Loading Ad...

इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार सबको है. इसलिए क समूह सिर्फ इसलिए किसी सार्वजनिक जगह पर दूसरों की आवाजाही नहीं रोक सकता, क्योंकि वहां उसका प्रदर्शन चल रहा है. मालूम हो कि जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन 17 दिन तक चला था, जबकि कथित तौर पर इजाजत एक दिन के लिए दी गई थी.

'जंतर-मंतर एक सार्वजनिक सड़क है, प्रदर्शन स्थल नहीं'

Loading Ad...

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जंतर-मंतर एक सार्वजनिक सड़क है, प्रदर्शन स्थल नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने संसद की तरफ मार्च किया था. बिना अनुमति किसी को संसद या सुप्रीम कोर्ट के पास जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

आपको आगे बता दें कि दिल्ली के व्यापारियों की संस्था किराना कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. याचिका में त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक लगाने की मांग की गई है. व्यापारियों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि धरना प्रदर्शन और रैली की वजह से 2 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनों को लेकर हुई बड़ी सुनवाई

Loading Ad...

वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज हम जंतर-मंतर, रामलीला मैदान आदि से लगभग 80 साल आगे आ चुके हैं. रामलीला मैदान कनॉट प्लेस (सीपी) से 1 मील दूर है. एक तरफ अस्पताल है. उस इलाके में 50 लाख लोग रहते हैं. अब हमें किसी योजना के बारे में सोचना होगा. यह अब इधर-उधर जंतर-मंतर लगाने जैसा नहीं रह गया है.

वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आज सभी दुकानें बंद हैं, सीपी में कोई नहीं है. अगर त्योहारों के सीजन में बिक्री न हो तो व्यापारियों की आमदनी गिर जाती है. मेरी गुजारिश है कि कुछ अलग हटकर समाधान खोजना चाहिए. इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने विरोध प्रदर्शन किया था.

त्योहारी सीजन में सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शनों पर रोक की मांग

Loading Ad...

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जो भी 'बंद' का आह्वान करता है, उसे जिम्मेदारी लेनी होगी. इस पर विपक्ष के वकील हरिहरन ने कहा कि यह एक अधिसूचित जगह है. अब उन्हें इससे भी दिक्कत है.

ये भी पढ़ें: 'मत करें हवाई यात्रा...', दीपावली पर फ्लाइट किराए में 700% की बढ़ोतरी, याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया है, आप उन सभी को पक्षकार बनाएं. उनके जवाब के बिना कोई भी अदालत फैसला नहीं कर सकती. अनुमति देने वाले आदेश में यह साफ होना चाहिए कि अनुमति क्यों दी जा रही है या क्यों नहीं दी जा रही है. आप दूसरों को यह कहकर नहीं रोक सकते कि 'मैं अभी विरोध-प्रदर्शन कर रहा हूं, इसलिए आप ऐसा नहीं कर सकते.'

Loading Ad...

तुषार मेहता ने कहा कि सीजेपी को अनुमति सिर्फ 1 दिन के लिए थी लेकिन उन्होंने 17 दिनों तक उस जगह पर कब्जा जमाए रखा. वे संसद की ओर मार्च कर गए. बिना अनुमति के उन्हें संसद या सुप्रीम कोर्ट तक जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती थी.

ये भी पढ़ें: सौरव दास के 'असली नाम' का मद्रास हाई कोर्ट में भंडाफोड़! अब माता-पिता के बैकग्राउंड की भी होगी जांच! नोटिस जारी

'विरोध-प्रदर्शन स्थल पर हमेशा के लिए कोई नहीं बैठ सकता'

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

व्यापारियों की तरफ से वकील मुकुल रोहतगी ने मांग की कि अगले 2 महीनों तक कोई विरोध-प्रदर्शन या धरना नहीं होना चाहिए. व्यापारियों का काफी नुकसान हो रहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकीलों के बहस के तरीके पर नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने कहा कि आप दूसरे की बात पूरी होने के बाद अपनी बात नहीं रख सकते. कोर्ट को 'फिश मार्केट' न बनाएं. सीजीआई ने कहा कि कोई भी वर्ग डेजिग्नेटिड प्रोटेस्ट साइट पर हमेशा के लिए नहीं बैठ सकता, वहां पर प्रदर्शन का सबको अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि मान लीजिए किसान भी विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं तो वह कहां जाएंगे. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...