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Budget 2026-27: एक्सीडेंट पीड़ितों को बड़ी राहत, मुआवजे के ब्याज पर नहीं लगेगा टैक्स

Budget 2026: मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से इनकम टैक्स से मुक्त होगा. सरकार का मकसद यह है कि हादसे में पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को मिलने वाली मुआवजे की राशि में किसी तरह की कटौती न हो और उन्हें पूरा लाभ मिल सके.

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01 Feb 2026
( Updated: 01 Feb 2026
10:32 AM )
Budget 2026-27: एक्सीडेंट पीड़ितों को बड़ी राहत, मुआवजे के ब्याज पर नहीं लगेगा टैक्स
Image Source; Social Media
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Budget 2026-27: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों और उनके परिवारों के लिए एक बड़ी राहत का ऐलान किया है. अब मोटर एक्सीडेंट मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से इनकम टैक्स से मुक्त होगा. सरकार का मकसद यह है कि हादसे में पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार को मिलने वाली मुआवजे की राशि में किसी तरह की कटौती न हो और उन्हें पूरा लाभ मिल सके.

अब ब्याज पर नहीं कटेगा TDS

वित्त मंत्री ने साफ किया कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे पर जो ब्याज मिलता है, उस पर अब टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) भी नहीं काटा जाएगा. पहले ऐसा होता था कि मुआवजा मिलने में देरी होने पर ब्याज की रकम बढ़ जाती थी और उस पर टैक्स भी लग जाता था. इससे पीड़ितों को पूरी रकम नहीं मिल पाती थी और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती थी.

पुराने नियमों से होती थी परेशानी

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अब तक के नियमों के अनुसार, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाला ब्याज टैक्स योग्य आय माना जाता था. कई बार कानूनी प्रक्रिया लंबी चलने के कारण मुआवजा मिलने में सालों लग जाते थे. इस दौरान ब्याज की रकम काफी बढ़ जाती थी और पीड़ितों या उनके परिवारों को उस पर टैक्स देना पड़ता था. कई मामलों में लोगों को टैक्स रिफंड के लिए लंबी और जटिल प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता था.

इलाज और जीवनयापन में आती थी दिक्कत

मुआवजे से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल ज्यादातर लोग इलाज, पुनर्वास और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए करते हैं. लेकिन टैक्स कटने की वजह से उन्हें पूरी सहायता नहीं मिल पाती थी. सरकार का मानना है कि यह स्थिति मानवीय दृष्टि से सही नहीं थी, इसलिए इस नियम में बदलाव किया गया है.

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किन लोगों को मिलेगा इस फैसले का फायदा

वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह टैक्स छूट केवल नेचुरल पर्सन, यानी आम व्यक्ति को मिलने वाले ब्याज पर ही लागू होगी. इसका मतलब है कि कंपनियों या अन्य संस्थाओं को यह छूट नहीं मिलेगी. यह फैसला पूरी तरह से आम नागरिकों और जरूरतमंद परिवारों को ध्यान में रखकर लिया गया है.

2026-27 से लागू होगा नया नियम

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यह नया नियम वित्त वर्ष 2026-27 से लागू होने की उम्मीद है. इसके लागू होने के बाद चल रहे मामलों और आने वाले नए मामलों में पीड़ितों को सीधा फायदा मिलेगा. इससे मुआवजे की रकम पूरी मिलेगी और आर्थिक राहत भी तुरंत पहुंचेगी.

फैसले का हुआ स्वागत

इस फैसले का कानूनी विशेषज्ञों, पीड़ित अधिकार संगठनों और बीमा कंपनियों ने स्वागत किया है. उनका कहना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी समस्या का समाधान होगा. साथ ही, इससे मामलों के जल्द निपटारे को भी बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि टैक्स कटौती का डर खत्म हो जाएगा.

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मानवीय सोच के साथ टैक्स सुधार

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सरकार का कहना है कि यह फैसला टैक्स नियमों को आसान बनाने और जरूरतमंद लोगों को सीधी राहत देने की दिशा में उठाया गया कदम है. बजट 2026-27 में जहां मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान दिया गया है, वहीं यह फैसला यह भी दिखाता है कि सरकार मानवीय पहलुओं को भी गंभीरता से ले रही है.

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