चुनावी रणभूमि में BJP की बड़ी तैयारी, असम से बंगाल तक INDIA गठबंधन के खिलाफ फुल अटैक करेगी पार्टी
इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी की चुनावी रणनीति का मुख्य निशाना कांग्रेस रहेगी. पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस ही उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी और विपक्षी एकता की धुरी है.
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देश में इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति लगभग तय कर ली है. भले ही मुकाबला किसी भी क्षेत्रीय दल या गठबंधन से हो, लेकिन बीजेपी के हमलों के केंद्र में कांग्रेस ही रहने वाली है. पार्टी का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में कांग्रेस आज भी उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी है और विपक्षी एकता की धुरी भी वही है. इन सबके बीच अब कुछ बीजेपी के चाणक्य माने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री ख़ुद चुनावी राज्यों में दौरा कर पार्टी की रणनीति को लेकर प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों संग बैठक कर उचित दिशा-निर्देश दे रहे हैं.
कांग्रेस की ओर BJP की सियासी धार
बीजेपी के रणनीतिकारों का आकलन है कि असम में जहां सीधा मुकाबला कांग्रेस से है, वहीं केरल में कांग्रेस और वामपंथी दलों के गठबंधन से चुनौती मिल रही है. तमिलनाडु में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन का अहम हिस्सा है, इसलिए वहां भी बीजेपी की सियासी धार कांग्रेस की ओर ही रहेगी. केवल पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य है, जहां तृणमूल कांग्रेस से सीधी टक्कर है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की रणनीति में कांग्रेस ही मुख्य निशाना बनी हुई है.
भ्रष्टाचार और परिवारवाद को BJP बनाएगी हथियार
पार्टी के अंदरखाने से मिल रही जानकारी के मुताबिक बीजेपी यह मानती है कि बीते करीब 75 वर्षों में कांग्रेस का लंबे समय तक सत्ता में रहना उसके खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है. भ्रष्टाचार, परिवारवाद, कमजोर नेतृत्व और विकास में बाधा जैसे मुद्दों को बीजेपी बार बार जनता के सामने रखने की तैयारी में है. एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को देखें तो बीजेपी ने कांग्रेस को हराकर ही केंद्र और कई राज्यों में अपनी जगह बनाई है. इतना ही नहीं, बीजेपी का एक बड़ा समर्थक वर्ग वह भी है, जो कभी कांग्रेस का पारंपरिक वोटर हुआ करता था.
कांग्रेस को चौतरफा घेरने की तैयारी
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सूत्र बताते हैं कि बीजेपी के केंद्रीय चुनाव प्रचारक हर राज्य में कांग्रेस को केंद्र में रखकर आक्रामक प्रचार करेंगे. वहीं राज्य स्तर के नेता स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय विरोधियों के अनुसार अपनी रणनीति अपनाएंगे. गठबंधन की राजनीति में बीजेपी अपने सहयोगी दलों के रुख को भी ध्यान में रखेगी और उसी के अनुसार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाएगी. हालांकि बीजेपी यह भी समझती है कि एक राष्ट्रीय दल होने के नाते वह हर मुद्दे पर क्षेत्रीय दलों की तरह आक्रामक नहीं हो सकती. इसके बावजूद पार्टी की कोशिश यही रहेगी कि विपक्ष की राजनीति को कांग्रेस केंद्रित दिखाया जाए. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस बनाम बीजेपी की सियासी जंग एक बार फिर पूरे देश की राजनीति का तापमान बढ़ाने वाली है.
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