'सच्चाई छुपाने के लिए रोकी गई ‘बंगाल फाइल्स,’ CM ममता बनर्जी पर दिलीप घोष का हमला

दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी घबरा चुकी हैं. वह सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वे ज्यादा दिनों तक इसे छुपाकर नहीं रख पाएंगी. ममता बनर्जी अपनी खुद की पार्टी को नियंत्रित नहीं रख पाई, तो ऐसी स्थिति में आप ही बताइए कि क्या वे ‘बंगाल फाइल्स’ को रोक कर रख पाएंगी?

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06 Sep 2025
( Updated: 11 Dec 2025
01:45 PM )
'सच्चाई छुपाने के लिए रोकी गई ‘बंगाल फाइल्स,’ CM ममता बनर्जी पर दिलीप घोष का हमला

भाजपा नेता दिलीप घोष ने ‘बंगाल फाइल्स’ पश्चिम बंगाल में नहीं दिखाए जाने को लेकर शनिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा.

दिलीप घोष ने CM ममता पर साधा निशाना

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी एक कायर मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें इस बात का डर है कि कोई भी उनके काले कारनामों के बारे में नहीं जान ले, इसलिए तो उन्होंने पश्चिम बंगाल में ‘बंगाल फाइल्स’ को रिलीज नहीं होने दी. हालांकि, इससे कुछ भी होने वाला नहीं है. पश्चिम बंगाल की जनता किसी न किसी तरह फिल्म को देख ही लेगी.

बंगाल में सिनेमा हॉल के संचालकों को धमकाया गया 

उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में सभी सिनेमा हॉल के संचालकों को धमकाया गया है. उनसे कहा गया है कि वे किसी भी कीमत पर 'बंगाल फाइल्स' को नहीं दिखाए. इससे सिनेमा हॉल के संचालकों में डर का माहौल है. यही वजह है कि वे इसे दिखाने से डर रहे हैं. ऐसा करने से ममता बनर्जी को कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है, क्योंकि उन्हें बंगाल की जनता पसंद नहीं करती है.

दिलीप घोष ने CM ममता पर लगाए सच्चाई छुपाने के आरोप 

दिलीप घोष ने कहा कि ममता बनर्जी घबरा चुकी हैं. वह सच्चाई को छुपाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वे ज्यादा दिनों तक इसे छुपाकर नहीं रख पाएंगी. ममता बनर्जी अपनी खुद की पार्टी को नियंत्रित नहीं रख पाई, तो ऐसी स्थिति में आप ही बताइए कि क्या वे ‘बंगाल फाइल्स’ को रोक कर रख पाएंगी?

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बता दें कि 'द बंगाल फाइल्स' विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित 2025 की हिंदी राजनीतिक ड्रामा फिल्म है, जो उनकी 'फाइल्स ट्रायोलॉजी' की अंतिम कड़ी है. यह 1946 के ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स और नोआखाली दंगों पर केंद्रित है, जिन्हें हिंदू नरसंहार के रूप में दर्शाया गया है. फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती, अनुपम खेर, पल्लवी जोशी और सास्वत चटर्जी जैसे कलाकार हैं. 204 मिनट की यह फिल्म इतिहास के दबाए गए अध्यायों को उजागर करती है.

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