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1 साल तक जंतर-मंतर जाने पर रोक! अभिजीत दिपके ने शर्तें तोड़ीं तो क्या होगा?

Abhijit Dipke: 10 अक्टूबर को CJP के अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को विमान से उतरने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया. पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की.

Image Source: IANS
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Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन नेताओं अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को सशर्त रिहा कर दिया गया है. तीनों से एक साल तक के लिए स्पेशल बॉन्ड भरवाया गया है. इसमें साफ शर्त रखी गई है कि वे ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिससे शांति भंग होने या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका पैदा हो. इसके अलावा, तीनों के जंतर-मंतर जाने पर भी रोक लगाई गई है. यह फैसला दिल्ली कैंट स्थित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनाया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब ये तीनों नेता एक साल तक कोई प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे?

आखिर क्यों हिरासत में लिए गए थे तीनों नेता?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया गया था. लेकिन प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण पुलिस ने वहां लोगों के जुटने पर रोक लगा दी थी. इसी बीच 10 अक्टूबर को CJP के अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को विमान से उतरने से पहले ही हिरासत में ले लिया गया... पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की.

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इसके बाद रविवार सुबह तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया...अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया और एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाया.

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पुलिस ने जारी किया दिपके की हिरासत का Video, आरोपों को बताया झूठा, दादी के निधन के बाद की थी घर भेजने की पेशकश, Video

क्या कहती हैं BNS की धारा 126 और 170?

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की अधिवक्ता अंकिता तिवारी के मुताबिक, इन धाराओं का संबंध शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने से है। धारा 170 के तहत पुलिस को कुछ परिस्थितियों में संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए बिना वारंट गिरफ्तारी करने का अधिकार है. वहीं, धारा 126 के तहत किसी व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाया जा सकता है..अगर मजिस्ट्रेट को लगता है कि किसी व्यक्ति की गतिविधियों से शांति भंग होने का खतरा है, तो वह उससे तय अवधि तक कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा मांग सकता है. यह अवधि अधिकतम एक साल तक हो सकती है. इस दौरान संबंधित व्यक्ति को बॉन्ड में तय शर्तों का पालन करना होता है.

क्या एक साल तक प्रदर्शन करने पर रोक है?

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यही है कि बॉन्ड भरने का मतलब यह नहीं है कि तीनों नेता एक साल तक कोई प्रदर्शन नहीं कर सकते.. अधिवक्ता अंकिता तिवारी के मुताबिक, वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले सकते हैं. लेकिन उन्हें ध्यान रखना होगा कि उनके किसी कदम से हिंसा, तनाव या सार्वजनिक शांति भंग होने की स्थिति पैदा न हो.

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हालांकि, इन तीनों के मामले में जंतर-मंतर जाने पर अलग से रोक लगाई गई है. इसलिए उन्हें अदालत के आदेश में दी गई शर्तों का पालन करना होगा.  किसी भी प्रदर्शन से पहले जहां प्रशासन की अनुमति जरूरी हो, वहां अनुमति लेना भी आवश्यक होगा.

अगर बॉन्ड की शर्तें तोड़ीं तो क्या होगा?

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अगर तीनों में से कोई भी व्यक्ति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. परिस्थितियों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर उसे हिरासत में लिया जा सकता है. बॉन्ड में तय राशि की वसूली या जब्ती की कार्रवाई भी हो सकती है. इसके अलावा, अगर उल्लंघन के दौरान कोई नया अपराध होता है, तो उसके लिए अलग से कार्रवाई की जा सकती है.

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एक साल का बॉन्ड भरने का अर्थ विरोध की आवाज को पूरी तरह बंद करना नहीं है. शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी बात रखने का अधिकार बना रहता है, लेकिन उसका इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर करना जरूरी है. CJP के तीनों नेताओं को भी अपनी बात रखने के साथ-साथ अदालत की शर्तों का पालन करना होगा.

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