AI तकनीक से टीबी की पहचान, UP के गांवों में 100 गुना कम रेडिएशन वाली पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से जांच शुरू

UP: यह नई तकनीक साबित कर रही है कि अगर बीमारी की समय रहते पहचान हो जाए, तो टीबी जैसी गंभीर बीमारी को भी रोका जा सकता है. एआइ और पोर्टेबल एक्सरे मशीनें आने वाले समय में टीबी को जड़ से खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं.

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31 Jan 2026
( Updated: 31 Jan 2026
09:47 AM )
AI तकनीक से टीबी की पहचान, UP के गांवों में 100 गुना कम रेडिएशन वाली पोर्टेबल एक्सरे मशीनों से जांच शुरू
Iamge Source: Social Media

UP Medical Treatment: बहराइच जिले के एक घनी आबादी वाले गांव में जब स्वास्थ्य विभाग की टीम टीबी की जांच के लिए पहुंची, तो उन्हें ऐसा नतीजा मिला जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. जिन युवकों को देखकर लग रहा था कि वे पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिनमें न बुखार था, न खांसी, न सांस फूलने की शिकायत और न ही वजन घटने जैसे आम लक्षण उन्हीं में टीबी का संक्रमण पाया गया. इससे साफ हो गया कि टीबी अब सिर्फ लक्षणों के भरोसे पकड़ में आने वाली बीमारी नहीं रह गई है.

मोबाइल जितनी छोटी मशीन, चार मिनट में जांच

यह सब संभव हो पाया मोबाइल फोन के आकार की हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीन की वजह से. यह मशीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सिर्फ चार मिनट में टीबी की स्क्रीनिंग कर देती है. इस तकनीक के जरिए 1 दिसंबर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक करीब 1.70 लाख ऐसे टीबी मरीजों की पहचान की गई, जिनमें बीमारी के कोई भी लक्षण नहीं थे. ये लोग सामान्य जीवन जी रहे थे और अनजाने में भीड़ का हिस्सा बनकर दूसरों को भी संक्रमित कर रहे थे.

भीड़ में रहकर फैल रहा था संक्रमण

सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि ये मरीज खुद को बिल्कुल स्वस्थ समझ रहे थे. वे बाजार, कामकाज और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे थे, जिससे टीबी का संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया था. अगर समय रहते इनकी पहचान न होती, तो ये लोग कई और स्वस्थ लोगों को बीमार कर सकते थे.

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फरवरी में चलेगा 100 दिन का विशेष अभियान

स्वास्थ्य विभाग अब टीबी के खिलाफ और आक्रामक रणनीति अपनाने जा रहा है. फरवरी महीने से टीबी मरीजों की खोज के लिए 100 दिन का विशेष अभियान शुरू किया जाएगा.
इस अभियान में 87 पोर्टेबल एक्सरे मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा 75 नई मशीनों की खरीद को भी मंजूरी मिल चुकी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जा सके.

टीबी मुक्त भारत अभियान को मिलेगी मजबूती

राज्य क्षय रोग निदेशक डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2025 में 7.10 लाख टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है.
अब सरकार और स्वास्थ्य विभाग मरीजों का जल्द पता लगाने और सिर्फ टीबी ही नहीं, बल्कि दूसरी बीमारियों की पहचान के लिए भी AI तकनीक का अधिक इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहा है.

AI बताएगा कई गंभीर बीमारियों के संकेत

यह पोर्टेबल एक्सरे मशीन सिर्फ टीबी तक सीमित नहीं है. यह चेहरे, गले और छाती का एक्सरे लेकर एआइ के जरिए यह भी बता देती है कि कहीं निमोनिया, ब्रांकाइटिस, हड्डी या हृदय संक्रमण, यहां तक कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों के लक्षण तो नहीं हैं.इन्हीं संकेतों के आधार पर आगे की जांच की गई, तो बड़ी संख्या में ऐसे लोग संक्रमित पाए गए जो बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिख रहे थे.

बेहद कम रेडिएशन, पूरी तरह सुरक्षित

इस मशीन की एक और बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ 3 से 4 मिली एंपियर रेडिएशन निकलता है, जबकि सामान्य एक्सरे मशीनों में 300 मिली एंपियर तक रेडिएशन होता है. यानी यह मशीन करीब 100 गुना कम रेडिएशन देती है, जिससे यह ज्यादा सुरक्षित बन जाती है.

रोजाना 100 से ज्यादा जांच, हर तहसील तक पहुंचेगी मशीन

हैंड हेल्ड पोर्टेबल एक्सरे मशीन से एक दिन में 100 से ज्यादा लोगों की जांच की जा सकती है. इसका इस्तेमाल खासतौर पर घनी आबादी वाले इलाकों में किया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि हर तहसील में कम से कम एक पोर्टेबल एक्सरे मशीन उपलब्ध कराई जाए.

घरों में काम करने वालों की भी होगी जांच

अब इसी मशीन की मदद से घरों में काम करने वाली महिलाओं, घरेलू सहायकों और नौकरों की भी जांच की जाएगी. मशीन में लगा एआइ संभावित बीमारियों का विश्लेषण करके तुरंत संकेत दे देता है, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके.

समय पर पहचान से ही टीबी पर जीत

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यह नई तकनीक साबित कर रही है कि अगर बीमारी की समय रहते पहचान हो जाए, तो टीबी जैसी गंभीर बीमारी को भी रोका जा सकता है. एआइ और पोर्टेबल एक्सरे मशीनें आने वाले समय में टीबी को जड़ से खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं.

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