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सेना में महिला अफसरों को मिलेगा स्थायी कमीशन, 23 साल से जारी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, जानें पूरा मामला
सेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इसे सिस्टम में भेदभाव का नतीजा माना है.
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सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले पर शीर्ष अदालत ने सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कमीशन न देना सिस्टम में मौजूद भेदभाव का नतीजा है.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, एन कोटिस्वर सिंह और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा, सेना में SSC महिला अफसरों को कमीशन न देना योग्यता की कमी नहीं बल्कि ये दर्शाता है कि अहम पदों पर महिलाओं को बराबरी के मौके नहीं मिल रहे. कोर्ट ने साफ किया कि सेना में SSC महिला अधिकारी कमीशन की स्थायी हकदार हैं. CJI सूर्यकांत ने कहा,
SSC महिला अफसरों को अहम पदों पर काम करने के बराबर मौके नहीं मिले. इसका असर उनकी मेरिट पर पड़ा. बेंच ने इसे सेना में भेदभाव का नतीजा माना. कोर्ट ने कहा, महिला अफसरों के काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा.
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शीर्ष अदालत का यह फैसला विंग कमांडर Sucheta Edan और अन्य की तरफ से दायर याचिकाओं समेत कई याचिकाओं पर आया है. जिनमें 2019 में पॉलिसी चेंज और पिछले सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के निर्णयों के आधार पर स्थायी कमीशन (PC) से इनकार को चैलेंज दिया गया था. महिला अधिकारियों की अपने हक के लिए ये लड़ाई 23 साल से जारी थी.
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केंद्र सरकार को क्या निर्देश दिए?
कोर्ट ने कहा, जिन महिलाओं को पहले से परमानेंट कमीशन मिल चुका है, वह बना रहेगा. जो अधिकारी केस के दौरान नौकरी से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी. CJI समेत तीन जजों की बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए. साथ ही साथ मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने के निर्देश भी दिए, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो.
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बेंच ने यह भी कहा, 'पुरुष SSC ऑफिसर ये उम्मीद नहीं कर सकते कि स्थायी आयोग में सिर्फ पुरुष ही होंगे. महिला SSC ऑफिसर सथायी आयोग से वंचित करना मूल्यांकन के सिस्टम में मौजूद भेदभाव का नतीजा है.
किन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा आदेश?
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मौजूदा समय में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा. हालांकि यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े कदम पर सेनाधिकारियों और महिला असफरों ने आभार जताया. महिलाओं के हक में यह बड़ा फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है.