Advertisement

Loading Ad...

ईसाई-मुस्लिम धर्म अपनाया तो खत्म हो जाएगा SC का दर्जा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हिंदू सिख-बौद्ध के लिए क्या कहा?

धर्म बदलकर अनुसूचित जाति का दर्जा बरकरार रखने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने लकीर खींच दी है. कोर्ट ने साफ किया कि हिंदू-सिख और बौद्ध के अलावा अन्य धर्म अपनाया तो SC का दर्जा खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगा.

Loading Ad...

सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति के दर्जे पर अहम फैसला सुनाया है. अब अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म अपनाने पर ही मिलेगा. कोर्ट ने साफ किया कि अगर कोई शख्स धर्म बदलकर ईसाई या मुस्लिम बना तो उसका SC दर्जा खत्म हो जाएगा. 

सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (एससी) से संबंधित है और वह हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिलेगा. क्योंकि संविधान में ये दर्जा केवल हिंदू-सिख और बौद्ध को ही दिया गया है. 

संविधान में हिंदू-सिख और बौद्ध का जिक्र

Loading Ad...

यह फैसला जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सुनाया. अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति का दर्जा भारतीय संविधान के तहत केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों तक सीमित है. ऐसे में अगर कोई व्यक्ति ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाता है और उसका सक्रिय रूप से पालन करता है, तो वह एससी श्रेणी के लाभों का हकदार नहीं रहेगा. 

Loading Ad...

सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस निर्णय में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पहले दिए गए फैसले को भी सही ठहराया. आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा था कि जो लोग ईसाई धर्म अपना लेते हैं, वे अपनी अनुसूचित जाति की पहचान बनाए नहीं रख सकते और उन्हें इससे जुड़े कानूनी संरक्षण भी नहीं मिलेंगे. 

क्या था मामला? 

Loading Ad...

कोर्ट ने यह बड़ा फैसला आंध्र प्रदेश के एक पादरी चिंथाडा आनंद की अपील पर सुनाया है. आनंद ने आरोप लगाया था कि अक्काला रामिरेड्डी और अन्य लोगों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव और गाली-गलौज की. उन्होंने SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज की. 

इसके बाद आरोपी रामिरेड्डी ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की याचिका दायर की. हाईकोर्ट के जस्टिस एन हरिनाथ ने FIR रद्द कर दी और कहा कि ईसाई धर्म अपनाने के बाद आनंद अपना SC दर्जा खो चुके हैं, इसलिए उन्हें SC/ST एक्ट का संरक्षण नहीं मिल सकता. 

‘ईसाई धर्म में नहीं होती जाति प्रथा’

Loading Ad...

सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि आनंद के पास अनुसूचित जाति का सर्टिफिकेट होने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था नहीं मानी जाती, इसलिए उनका SC का दर्जा खुद  ही खत्म हो जाता है. आनंद ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. 

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद आनंद ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन यहां भी उन्हें हताशा हाथ लगी और कोर्ट ने धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जे पर लकीर खींच दी. 

धर्म बदलकर भी मलाई खाने वालों को संदेश 

Loading Ad...

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है, जिसका सीधा असर उसकी कानूनी स्थिति पर पड़ता है. इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति से जुड़े विशेष अधिकार और संरक्षण, जैसे कि एससी/एसटी एक्ट के तहत मिलने वाले लाभ, धर्म परिवर्तन के बाद स्वतः समाप्त हो जाते हैं. 

यह भी पढ़़ें- सेना में महिला अफसरों को मिलेगा स्थायी कमीशन, 23 साल से जारी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, जानें पूरा मामला

यह भी पढ़ें

यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां धर्म परिवर्तन के बाद भी अनुसूचित जाति के अधिकारों का दावा किया जाता रहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अब इस विषय पर कानूनी स्थिति और साफ हो गई है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में मार्गदर्शन मिलेगा. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...