‘आपकी जगह जेल में है’, राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट में पड़ी फटकार, बिहेवियर से नाराज हुए जज, दे दी चेतावनी
चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा, राजपाल यादव को रकम जमा करने के लिए बार-बार मौके दिए गए, लेकिन कोर्ट के आदेशों को दरकिनार किया गया.
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चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता के अब तक के तौर-तरीकों पर कड़ी नाराजगी जताई. सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने एक्टर को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, इस अहंकार को सही जगह दिखानी होगी, आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है, आपकी जगह जेल में है.
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की. इस दौरान बेंच ने राजपाल यादव के रुख पर सख्त नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा, राजपाल यादव को रकम जमा करने के लिए बार-बार मौके दिए गए, लेकिन कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ.
अदालत में एक्टिंग कर रहे…
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को उसकी रकम का कुछ हिस्सा वापस दिलाने की उम्मीद में अब तक राजपाल यादव के मामले में नरमी बरती जाती रही है. CJI सूर्य कांत ने कहा, ‘अगर शिकायतकर्ता को कुछ पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं होती, तो अदालत अभिनेता की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज करने पर विचार कर सकती थी.’
राजपाल यादव की तरफ से अदालत में 50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की प्रति पेश की गई और बताया गया कि बैंक में उसका भुगतान किया जा रहा है. इस पर बेंच ने पूछा कि यह असली है या नहीं, हमें नहीं पता. राजपाल यादव के वकील ने कहा कि डिमांड ड्राफ्ट बैंक में है और उसकी प्रोसेस चल रही है.
शिकायतकर्ता ने कहा कि राजपाल यादव एक फिल्म एक्टर हैं और अदालत में भी एक्टिंग कर रहे हैं. इस पर राजपाल यादव के वकील ने कहा कि शिकायतकर्ता गरीब नहीं हैं. जस्टिस जॉयमाल्या
जस्टिस बागची ने इस पर कड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा,
‘वो आपसे ज्यादा अमीर हो सकते हैं, लेकिन जितनी रकम आपने उनसे हड़पी है, उस हद तक वे गरीब हैं. इस अहंकार को सही जगह दिखाना होगी. आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है. आपकी जगह जेल में है.’
आखिरी मौका भी खत्म
कोर्ट ने राजपाल यादव को आदेश का पालन करने के लिए मंगलवार तक का आखिरी मौका दिया है. मामले में बुधवार को दोबारा सुनवाई होगी. यह मामला लंबे समय से चल रहे सात चेक बाउंस मामलों से जुड़ा है. राजपाल यादव ने साल 2010 में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से करीब 5 करोड़ रुपए की वित्तीय मदद ली थी, बाद में फिल्म उम्मीद के मुताबिक नहीं चली और रकम लौटाने को लेकर विवाद शुरू हो गया.
शिकायतकर्ता के मुताबिक, 2012 में हुए एक समझौते में राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और उनकी कंपनी ने ब्याज समेत करीब 11 करोड़ रुपए लौटाने पर सहमति जताई थी. इसके बाद 2013 में राजपाल यादव की ओर से 1.05 करोड़ रुपए के सात चेक दिए गए, लेकिन ये चेक बाउंस हो गए.
अदालत ने सुनाई थी 6 महीने की सजा
इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने चेक बाउंस के सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए. अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की सजा सुनाई. इसके बाद मामला सेशंस कोर्ट और फिर दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा. कई साल तक इस मामले में सजा पर रोक, भुगतान और समझौते की कोशिशें चलती रहीं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सातों मामलों में तीन-तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई. मामले में फरवरी 2026 में भी राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा था. दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार भुगतान के आश्वासन पूरे नहीं होने पर उनकी सजा पर मिली राहत हटा दी थी और उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने उस समय कहा था कि उन्हें कई मौके दिए जा चुके हैं, लेकिन शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान करने के वादे पूरे नहीं किए गए.
राजपाल यादव ने ही दी थी चुनौती
इसके बाद राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त रखी गई थी.
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15 सितंबर को जब मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो राजपाल यादव की ओर से रकम जमा करने के लिए और समय मांगा गया. कोर्ट ने उन्हें आखिरी मौका देते हुए दो हफ्ते में 2 करोड़ रुपए जमा करने और बाकी रकम के भुगतान के लिए ठोस प्रस्ताव देने को कहा, साथ ही सरेंडर से मिली अंतरिम राहत को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया था. अब सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राजपाल यादव के भुगतान और कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है.