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दशानन के भेष में निकला ये शिवभक्त, पीछे उमड़ा कांवड़ियों का सैलाब, कौन है ये रावण?

हरिद्वार से बुराड़ी तक का रास्ता लंबा ज़रूर है, लेकिन इसी रास्ते पर कावड़ लेकर निकले एक शिव भक्त ऐसे हैं, जिनका दशानन अवतार हर किसी को भा रहा है. कांवड़ियों के बीच लंकापति रावण के भेष में शिव भक्त की धूम है और रावण का शिव भक्ति कनेक्शन क्या कहता है? इसी पर देखिए हमारी आज की ये स्पेशल रिपोर्ट.

दशानन के भेष में निकला ये शिवभक्त, पीछे उमड़ा कांवड़ियों का सैलाब, कौन है ये रावण?
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इन दिनों देश में शिव भक्तों की कांवड़ यात्रा चल रही है. शिव भक्ति में रमे कांवड़ियों की धूम चारों तरफ़ है और इसी उत्सव में कांवड़ियों के निराले रूप नज़र आ रहे हैं. हरिद्वार से बुराड़ी तक का रास्ता लंबा ज़रूर है, लेकिन इसी रास्ते पर कांवड़ लेकर निकले एक शिव भक्त ऐसे हैं, जिनका दशानन अवतार हर किसी को भा रहा है. कांवड़ियों के बीच लंकापति रावण के भेष में शिव भक्त की धूम है और रावण का शिव भक्ति कनेक्शन क्या कहता है? इसी पर देखिए हमारी आज की ये स्पेशल रिपोर्ट.

जो कि श्रावण मास का श्री गणेश हो चुका है, जिस कारण भक्ति और समर्पण दिखाने का मौक़ा आया है. तपस्या से शिव को पाने का मौक़ा आया है. पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति का मौक़ा आया है. मौक़ा आया है ख़ुद के अंदर के शिवत्व को जगाने का. मौक़ा आया है कावड़ के रास्ते शिव का जलाभिषेक करने का. मंदिरों के इस देश में महादेव को समर्पित अनगिनत मंदिर हैं और स्वयंभू ज्योतिर्लिंग दोनों ही भारत की पावन धरा पर विद्यमान हैं. श्रावण मास हो या फिर महा शिवरात्रि, इन बड़े मौक़ों पर देशभर के मंदिरों में शिव भक्तों का हुजूम उमड़ता है. इसी कड़ी में पूरे श्रावण मास कावड़ यात्रा चलती है.

अपने आशियाने से दूर मीलों का रास्ता तय करके कांवड़िए तीर्थों से जल लेकर आते हैं और निवास स्थान के निकट मंदिरों में जाकर शिव का जलाभिषेक करते हैं. इसी कावड़ यात्रा की अहमियत का अंदाज़ा इसी से लगाइए जो व्यक्ति कावड़ लेकर आता है, उसे अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है. साथ ही सभी पापों का अंत भी हो जाता है. जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. मृत्यु के बाद उसे शिवलोक की प्राप्ति होती है. और ऊपर से शिव द्वारा उसकी तमाम मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं. इस बार भी कावड़ यात्रा में कांवड़ियों का उत्साह सातवें आसमान पर है. हाई जोश के साथ प्रत्येक कांवड़िया अपनी कावड़ यात्रा पर है. इसी कड़ी में दिल्ली के बुराड़ी इलाक़े के मूल निवासी मूलचंद त्यागी भी अपनी कावड़ यात्रा पर निकल पड़े हैं. लेकिन रामायण काल से जुड़े जिस किरदार का रूप उन्होंने धारण किया हुआ है, वो चर्चा का विषय बना हुआ है.

दरअसल, मूलचंद त्यागी ने रावण के भेष में अबकी कावड़ लाने का फ़ैसला किया. उन्होंने हरिद्वार के हर की पौड़ी से जल उठाया और अब दिल्ली की ओर अग्रसर हैं. अपनी इस पैदल यात्रा में उन्हें लोगों का स्नेह मिल रहा है. उन्होंने रावण का भेष धारण किया हुआ है, जिस कारण रास्ते में लोग उनका स्वागत कर रहे हैं. फ़ोटो से लेकर सेल्फ़ी खिंचवा रहे हैं. हालाँकि, ऐसे में सवाल उठता है कि कावड़ यात्रा में रावण का मुखौटा क्यों? तो इसके पीछे का कारण है शिव के प्रति रावण की रियल कावड़ यात्रा.

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आपको ये जानकर हैरानी होगी कि कांवड़ियों में एक नाम लंकेश का भी लिया जाता है. मान्यता अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान शिव ने हलाहल विष पी लिया था. विष के गंभीर नकारात्मक प्रभावों ने शिवजी को असहज कर दिया. महादेव को इस पीड़ा से मुक्त कराने के लिए उनके परम भक्त रावण ने कावड़ में जल भरकर कई बरसों तक महादेव का जलाभिषेक किया. इसके चलते शिवजी ज़हर के नकारात्मक प्रभावों से मुक्त हुए और उनके गले में हो रही जलन खत्म हो गई. और यहीं से कावड़ यात्रा का आरंभ माना गया और रावण को प्रथम कावड़िया. हालाँकि जिन लोगों को रावण में बुराइयाँ नज़र आती हैं, उन्हें सच का आईना दिखाते हुए मूलचंद त्यागी का कहना है कि रावण कोई राक्षस नहीं बल्कि महान विद्वान और शिव का परम भक्त था. उसने सतयुग में तपस्या कर महादेव को प्रसन्न किया था. सीता हरण के बाद भी उसने कभी उन्हें बुरी नज़र से नहीं देखा.

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