उत्तराखंड में यहां ध्यान मुद्रा में विराजते हैं भगवान विष्णु, जानें श्री ध्यान बद्री मंदिर की खासियत
उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित श्री ध्यान बद्री मंदिर, जहाँ भगवान विष्णु के इस दिव्य धाम से जुड़ी है पांडवों और राजा पांडु की मान्यता.
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उत्तराखंड की शांत वादियों में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ गहरी आध्यात्मिक शांति महसूस होती है. इसी पवित्र धरती पर भगवान विष्णु को समर्पित पंच बद्री में से एक है-श्री ध्यान बद्री मंदिर. यहां भगवान विष्णु की काले पत्थर की चार हाथों वाली मूर्ति ध्यान की मुद्रा में स्थापित है.
योगध्यान बद्री मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर उत्तराखंड के सात पूजनीय सप्त बद्री मंदिरों में से एक है. जोशीमठ और बद्रीनाथ के बीच पांडुकेश्वर में स्थित यह मंदिर शांत वातावरण और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है, जिसका आनंद और भगवान के दर्शन करने के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं.
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CM पुष्कर सिंह धामी ने किया मंदिर के दर्शन का आह्वान
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को सभी श्रद्धालुओं को मंदिर का भ्रमण करने के लिए कहा.
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट कर लिखा, "चमोली में मौजूद श्री ध्यान बद्री मंदिर, भगवान विष्णु को समर्पित एक पुरानी और पवित्र जगह है. यह मंदिर पंच बद्री में से एक है. यहां भगवान विष्णु का ध्यान करने वाला रूप भक्तों को बहुत ज्यादा शांति और आध्यात्मिक अनुभव देता है. चमोली आने पर इस पवित्र मंदिर के दर्शन जरूर करें."
भगवान विष्णु की ध्यान मुद्रा में प्रतिमा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान विष्णु की प्रतिमा ध्यान मुद्रा में स्थापित है, जहां पांडवों के पिता राजा पांडु ने अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए कठिन तपस्या की थी.
कैसे पहुंचे ध्यान बद्री मंदिर?
दरअसल, पांडवों के वंशज राजा पुरंजय के पुत्र उर्वरऋषि ने उर्गम घाटी में भगवान विष्णु की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु यहां प्रकट हुए. इस स्थान पर भगवान विष्णु की काले पत्थर से बनी चतुर्भुजी प्रतिमा ध्यान मुद्रा (पद्मासन) में स्थापित है. भगवान के इसी ध्यानमग्न स्वरूप के कारण इस पवित्र स्थल का नाम 'ध्यान बद्री' पड़ा.
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मुख्य बद्रीनाथ धाम की तुलना में यह स्थान बेहद शांत, एकांत और प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है, जो ध्यान और साधना के लिए उत्तम माना जाता है. इसके पास ही प्रसिद्ध पंच केदार में से एक कल्पेश्वर महादेव मंदिर भी स्थित है.