Chhath Puja 2025: छठ पर होती है भगवान सूर्य की उपासना, जानें भारत के किन क्षेत्रों में स्थित हैं अद्भुत सूर्य मंदिर

दिवाली के बाद अब इन दिनों छठ की महत्ता पूरे देश में देखने को मिल रही है. दिवाली के 6 दिनों के बाद मनाए जाने वाले इस महापर्व पर भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में मौजूद हैं ऐसे अद्भुत और रहस्यमयी सूर्य मंदिर जिनके बारे में जानकर आपको भी हैरानी हो सकती है.

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26 Oct 2025
( Updated: 10 Dec 2025
03:59 PM )
Chhath Puja 2025: छठ पर होती है भगवान सूर्य की उपासना, जानें भारत के किन क्षेत्रों में स्थित हैं अद्भुत सूर्य मंदिर

दीपावली के छह दिन बाद मनाया जाने वाला आस्था का महापर्व यानि छठ शनिवार से नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है. इस दौरान सूर्य भगवान और छठी मैया की संयुक्त आराधना की जाती है. माना जाता है कि सूर्य भगवान और छठी मैया के बीच भाई-बहन का रिश्ता था. छठ पर्व में भगवान सूर्य की आराधना के साथ-साथ सूर्य भगवान की दोनों शक्तियां यानि पत्नी प्रात्युषा और उषा को अर्घ्य दिया जाता है. कहा जाता है कि प्रात्युषा और उषा के बिना भगवान सूर्य शक्तिविहीन हैं. आज छठ के पर्व के दूसरे दिन हम देश के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के बारे में इस आर्टिकल में पढ़ेंगे, जहां की वास्तुकला, विज्ञान और पौराणिक कथा काफी अद्भुत हैं. 

16वीं शताब्दी में बना है ये अद्भुत सूर्य मंदिर

सूर्य मंदिर रामगढ़ चितरपुर प्रखंड के मारंगमरचा गांव में है. मंदिर की हालत बहुत जर्जर है क्योंकि मंदिर को 16वीं शताब्दी में रामगढ़ राजा दलेर सिंह ने बनवाया था. मंदिर की आस्था का केंद्र मंदिर में बना कुंड है. कहा जाता है कि मंदिर में बना कुंड किसी भी मौसम में नहीं सूखता है.

ओडिशा का कोणार्क मंदिर है बेहद रहस्यमयी! 

ओडिशा का कोणार्क सूर्य मंदिर विश्व के प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में से एक है. इसकी स्थापना गंग राजवंश के शासक नरसिंह देव प्रथम ने करवाई थी. माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में किया गया था. मंदिर को यूनेस्को ने साल 1984 में विश्व धरोहर स्थल की सूची में स्थान दिया था. ये मंदिर सूर्य भगवान के रथ के रूप में समर्पित किया गया है जिसमें 24 पहिए हैं और 11 घोड़े उसे खींच रहे हैं.

बिहार में स्थित इस सूर्य मंदिर में छठ पर लगता है भव्य मेला

बिहार के गया में बना सूर्य मंदिर भी अपनी प्राचीनतम बनावट और कुंड के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर में बने कुंड की मान्यता बहुत है और भक्त इस कुंड में स्नान करने के लिए आते हैं. माना जाता है कि कुंड में स्नान करने के बाद भक्त जो भी मनोकामना भगवान सूर्य से मांगते हैं, वह जरूर पूरी होती है. छठ के मौके पर यहां मेला भी लगता है. वहीं मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में किया गया था.

गुजरात में स्थित है 1000 साल पुराना सूर्य मंदिर

गुजरात के मोढेरा में बना सूर्य मंदिर 1000 साल पुराना है. यह मंदिर भौतिकी और खगोल विज्ञान और अध्यात्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इस मंदिर में साल में दो दिन सूर्य की रोशनी मंदिर के गर्भगृह में मौजूद प्रतिमा तक पहुंचती है और प्रतिमा को छूती है. यह भौगोलिक घटना "सौर विषुव" के दिन होती है, जो साल में दो दिन होता है. इस दिन सूर्य सीधे पृथ्वी की भूमध्य रेखा के ऊपर होता है और दिन और रात बराबर घंटों के होते हैं. ये मुख्यतः मार्च और सितंबर के महीने में होता है. 

बिहार के इस सूर्य मंदिर में होती है ढलते सूरज की पूजा

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बिहार के औरंगाबाद जिले में मौजूद सूर्य मंदिर अपने अनोखे पूजा-पाठ की वजह से जाना जाता है. यहां मंदिर में उगते सूरज की तो पूजा होती है, लेकिन शाम को ढलते सूरज की पूजा भी की जाती है. छठ के मौके पर यहां भक्तों का मेला लग जाता है.

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