इंदिरा एकादशी पर संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी
पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. इसी आस्था के चलते प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.
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आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी के पावन अवसर पर मंगलवार को त्रिवेणी संगम पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर जुटने लगे और पवित्र स्नान कर मां गंगा और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की. वहीं, श्रद्धालुओं ने संगम किनारे पितरों के लिए तर्पण किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है
पितृपक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन संगम में स्नान कर पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है. इसी आस्था के चलते प्रयागराज के संगम तट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा.
श्रद्धालु प्रदीप यादव ने कहा
संगम में स्नान करने आए श्रद्धालु प्रदीप यादव ने कहा कि पितृपक्ष चल रहा है और आज इंदिरा एकादशी है. उन्होंने बताया, "हम लोगों ने गंगा स्नान कर भगवान से मनोकामना की कि देश का कल्याण हो. भारतवर्ष सुख और समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़े और सभी जीवों का कल्याण हो.सभी को एकादशी का व्रत रखना चाहिए, दान करना चाहिए, इससे सभी जीवों का कल्याण होता है."
वहीं तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने
वहीं तीर्थ पुरोहित गोपाल गुरु ने कहा कि आज इंदिरा एकादशी है और पितृपक्ष भी चल रहा है. ऐसे में आज के दिन का विशेष महत्व है. जो भी व्यक्ति संगम में स्नान करके अपने पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करता है तथा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके घर में सुख-शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य की वृद्धि होती है. इसलिए लोग प्रयाग आते हैं, स्नान करते हैं और अपने पितरों तथा अपने परिवार के लिए मां गंगा की पूजा करते हैं.
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उन्होंने आगे कहा कि इस पूजा से विशेषकर महिलाओं का सुहाग, सुख और कीर्ति अक्षुण्ण बनी रहती है. प्रयाग में स्नान का विशेष महत्व है और आज का दिन अत्यंत शुभ व सुंदर है.