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बजट 2026 में क्या रहा खास, किस सेक्टर पर मोदी सरकार का फोकस, एक ही जगह जानें

मोदी सरकार के बजट 2026 में किस सेक्टर को दी गई तवज्जो और किस पर रहा सरकार का फोकस, जान लें एक ही स्टोरी में.

Budget 2026 (File Photo)

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारामण ने संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया. इस बजट की आधारशिला कर्तव्य भवन में रखी गई है और इसे तीन मुख्य कर्तव्यों से प्रेरित बताया गया है. बजट का मुख्य उद्देश्य वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लचीला बनाना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ संसाधनों की पहुंच हर परिवार तक सुनिश्चित करना है.

बजट के तीन मुख्य स्तंभ और विजन

इसरकार ने इस बजट को तीन प्रमुख कर्तव्यों पर केंद्रित किया है. पहला कर्तव्य उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाकर आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना है. दूसरा कर्तव्य नागरिकों को समृद्ध भारत का सशक्त साझेदार बनाना है, जबकि तीसरा कर्तव्य संसाधनों और अवसरों की उपलब्धता हर समुदाय के लिए सुनिश्चित करना है.

राजकोषीय स्थिति और बजट अनुमान

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए गैर-ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है. सरकार ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा है. वहीं, संशोधित अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 26.7 लाख करोड़ रुपये रही हैं. अगले वित्त वर्ष के लिए सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है.

आर्थिक विकास के लिए छह बड़े सेक्टर में सरकार का ऐलान

आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने छह प्रमुख क्षेत्रों में हस्तक्षेप का प्रस्ताव किया है:

1. विनिर्माण और बायोफार्मा: भारत को वैश्विक बायोफार्मा हब बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ 'बायोफार्मा शक्ति' पहल की घोषणा की गई है. इसके साथ ही तीन नए एनआईपीईआर (NIPER) संस्थान स्थापित किए जाएंगे.
2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत होगी. इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है.
3. खनिज और रसायन: ओडिशा, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में दुर्लभ धातु गलियारे बनाए जाएंगे. घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित होंगे.
4. पूंजीगत सामान और कंटेनर विनिर्माण: पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ कंटेनर विनिर्माण योजना शुरू होगी.
5. वस्त्र क्षेत्र: रेशम, ऊन और जूट में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना लाई जाएगी. खादी और ग्रामोद्योग की मजबूती के लिए 'महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल' का प्रस्ताव है.
6. औद्योगिक पुनरुद्धार: 200 पुराने औद्योगिक समूहों (लेगेसी क्लस्टर) के पुनरुद्धार की योजना बनाई गई है.

रक्षा के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपये का बजट

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है. इस बजट में रक्षा बलों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार ने सेना के आधुनिकीकरण के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. रक्षा पूंजीगत बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है. यह बजट पिछले वर्ष के 1.80 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जिससे रक्षा तैयारियों और आधुनिक उपकरणों की खरीद को मजबूती मिलेगी.

अवसंरचना और ऊर्जा सुरक्षा

सरकार ने सार्वजनिक पूंजी व्यय को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया है. बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए कई नई योजनाएं प्रस्तावित हैं:

- कनेक्टिविटी: पूर्वी और पश्चिमी भारत को जोड़ने के लिए नए माल गलियारे (फ्रेट कॉरिडोर) बनेंगे. अगले 5 वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे.
- हाई स्पीड रेल: दिल्ली-वाराणसी और मुंबई-पुणे सहित सात नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित होंगे.
- ऊर्जा: कार्बन कैप्चर (CCUS) प्रौद्योगिकियों के लिए 20,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. सी-प्लेन संचालन के लिए वीजीएफ स्कीम शुरू होगी.

सामाजिक क्षेत्र: शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास

युवाओं और महिलाओं के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं. 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' स्थायी समिति का गठन किया जाएगा.

- स्वास्थ्य: अगले पांच वर्षों में एक लाख नए संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों (AHP) को जोड़ा जाएगा. तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित होंगे.
- पशुपालन: 20,000 से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
- शिक्षा और पर्यटन: प्रत्येक जिले में महिला छात्रावास बनेगा. 15 पुरातात्विक स्थलों को अनुभवजन्य सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा, जिनमें लोथल और राखीगढ़ी शामिल हैं.

कृषि और ग्रामीण विकास

किसानों की आय बढ़ाने के लिए उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे नारियल, काजू और कोको पर ध्यान दिया जाएगा. 2030 तक भारतीय काजू को वैश्विक ब्रांड बनाने का लक्ष्य है. तकनीक के स्तर पर 'भारत-विस्तार' नामक बहुभाषीय एआई टूल पेश किया गया है, जो आई.सी.ए.आर. प्रणालियों से जुड़ा होगा.

प्रत्यक्ष कर: सरलीकरण और राहत

एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, नया आयकर अधिनियम 2025, 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा.

- करदाताओं को सुविधा: संशोधित रिटर्न फाइल करने की समयसीमा 31 मार्च तक बढ़ाई गई है. विदेश यात्रा पैकेज पर टीसीएस (TCS) दर को 5-20 प्रतिशत से घटाकर मात्र 2 प्रतिशत कर दिया गया है.
- आईटी क्षेत्र: सॉफ्टवेयर विकास सेवाओं के लिए सेफ हार्बर सीमा को 300 करोड़ से बढ़ाकर 2000 करोड़ रुपये किया गया है.
- राहत: मोटर दुर्घटना दावों पर मिलने वाले ब्याज को आयकर से मुक्त कर दिया गया है.

अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क सुधार

सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क ढांचे में बदलाव किए हैं.

- रियायतें: कैंसर की 7 अतिरिक्त दवाओं और 17 अन्य औषधियों पर सीमा शुल्क में छूट दी गई है. मोबाइल और माइक्रोवेव ओवन के पुर्जों पर भी शुल्क कम किया गया है.
- व्यापार सुगमता: सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल और पेपरलेस बनाने के लिए दो वर्षों में 'सीमा शुल्क एकीकृत प्रणाली' शुरू होगी. कुरियर निर्यात पर लगी 10 लाख रुपये की वर्तमान सीमा को पूरी तरह हटा दिया गया है.

वित्त और निवेश

बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा के लिए 'विकसित भारत के लिए बैंकिंग' समिति का गठन होगा. म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने वाले बड़े शहरों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए फेमा (FEMA) नियमों की व्यापक समीक्षा की जाएगी.

यह बजट विकसित भारत के लक्ष्य की ओर एक संतुलित और भविष्योन्मुखी कदम के रूप में देखा जा रहा है.

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