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Income Tax Rates में नहीं हुआ कोई बदलाव, ये है FY 2026-27 के लिए टैक्स स्लैब, जानें नए और पुराने टैक्स रिजीम की टैक्स दरें

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने इनकम टैक्स स्लैब या दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए नया और पुराना, दोनों टैक्स रिजीम पहले जैसे ही रहेंगे. हालांकि बजट में डायरेक्ट टैक्स से जुड़े कुछ प्रशासनिक सुधार किए गए हैं. रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है.

केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स को लेकर करदाताओं को किसी तरह का झटका या बड़ी राहत नहीं दी है. सरकार ने साफ किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए न तो नए टैक्स रिजीम में और न ही पुराने टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब या टैक्स दरों में कोई बदलाव किया गया है. यानी आम टैक्सपेयर्स को पिछले साल की तरह ही टैक्स भरना होगा.

1 फरवरी 2026 को पेश किए गए बजट में सरकार ने डायरेक्ट टैक्स सिस्टम को लेकर कुछ अहम प्रशासनिक सुधार जरूर किए हैं.वित्त मंत्री ने रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है. इससे उन टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी, जो किसी कारणवश समय पर सही रिटर्न फाइल नहीं कर पाते थे. इसके अलावा बजट में कुछ कैटेगरी में TDS और TCS की दरों को भी घटाने का ऐलान किया गया है, जिससे नकदी प्रवाह बेहतर होने की उम्मीद है.

इनकम टैक्स स्लैब 2026-27, नए टैक्स रिजीम में क्या हैं नियम?

अगर पुराने टैक्स रिजीम की बात करें, तो इसमें भी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है. पुराने सिस्टम में अब भी सेक्शन 80C, 80D, होम लोन के ब्याज और अन्य कटौतियों का लाभ मिलता रहेगा. सीनियर सिटीजन के लिए टैक्स छूट की सीमा भी पुराने टैक्स रिजीम में ज्यादा है. यही वजह है कि बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स अब भी पुराने सिस्टम को चुनना बेहतर मानते हैं. हालांकि, बजट से पहले यह चर्चा जरूर तेज थी कि सरकार पुराने टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है. फिलहाल बजट में इसको लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार भविष्य में चरणबद्ध तरीके से टैक्स सिस्टम में बदलाव कर सकती है.

पुराना टैक्स स्लैब

कुल मिलाकर बजट 2026-27 में टैक्स स्लैब स्थिर रखकर सरकार ने करदाताओं को स्थिरता का संदेश दिया है. अब टैक्सपेयर्स को अपनी आय, छूट और निवेश के आधार पर यह तय करना होगा कि नया टैक्स रिजीम उनके लिए बेहतर है या पुराना.

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