भारत बनेगा मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग का हब, बजट 2026 में ‘बायोफॉर्मा शक्ति योजना’ का ऐलान, मेडटेक सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
मोदी सरकार ने भारत को मेडिकल मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाने का बड़ा ऐलान कर दिया है. मोदी सरकार ने बायोफॉर्मा शक्ति योजना का ऐलान कर दिया है. इसको लेकर 10 हजार करोड़ के प्रावधान का ऐलान कर दिया गया है. इस स्कीम से देश का हेल्थकेयर सिस्टम सबसे उन्नत होगा.
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को पेश किए बजट में 'बायोफार्मा शक्ति' स्कीम का ऐलान किया है. इसके अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. वित्त मंत्री बजट भाषण में बताया कि इस स्कीम के तहत देश में बायो-फार्मा को बढ़ावा देने को लिए 1,000 मान्यता प्राप्त परीक्षण स्थलों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा. इसके जरिए सरकार की कोशिश देश में तेजी से फार्मा सेक्टर को बढ़ावा देना है.
यह प्रोग्राम बायोफार्मा-केंद्रित इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क बनाने पर फोकस करेगा, जो भारत की तेज़ी से बदलती बीमारियों की प्रोफ़ाइल को देखते हुए बनाया गया है, जिसमें डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है. यह ज़ोर देते हुए कि बायोलॉजिक दवाएं लंबी उम्र बढ़ाने और पुरानी बीमारियों को मैनेज करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं, सरकार ने इस रणनीति को अपने लॉन्ग-टर्म हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज ग्रोथ एजेंडा का एक मुख्य स्तंभ बताया है.
क्यों हुआ बायोफार्मा योजना का ऐलान
यह पहल सरकार की सात रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टरों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है, जो बजट में बताए गए तीन मुख्य "कर्तव्यों" में से एक है, जिसका मकसद लंबे समय तक ग्रोथ और आत्मनिर्भरता लाना है. बायोफार्मा शक्ति के तहत, सरकार बायोफार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए एक एंड-टू-एंड इकोसिस्टम बनाएगी.
इसमें बायोफार्मा-केंद्रित रिसर्च और टैलेंट नेटवर्क बनाना शामिल है, जिसमें तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (NIPERs) और सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करना शामिल है ताकि एडवांस्ड रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री सहयोग को सपोर्ट मिल सके.
बायोफॉर्मा शक्ति का उद्देश्य: ज्ञान, तकनीक और नवाचार के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को बेहतरी की रणनीति.
- बायोफॉर्मा शक्ति का उद्देश्य भारत को वैश्विक बायोफॉर्मा विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना.
- बायोफॉर्मा शक्ति का अगले पांच वर्षों के लिए 10 हजार करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुभारंभ.
- बायोलॉजिक्स एवं बायोसिमिलर्स के घरेलू उत्पादन के लिए इकोसिस्टम बनाना.
- इसमें बायोफॉर्मा क्षेत्र पर फोकस कर तीन नए राष्ट्रीय औषध शिक्षा और अनुसंधान संस्थान की स्थापना तथा 7 को उन्नत कर बढ़ाना.
- 1000 से अधिक मान्यता प्राप्त इंडिया क्लीनिकल ट्रायल साइटों का नेटवर्क बनाना.
यह प्रोग्राम 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक देशव्यापी नेटवर्क भी स्थापित करेगा, जिसका मकसद दवा डेवलपमेंट में तेज़ी लाना, रेगुलेटरी स्टैंडर्ड्स में सुधार करना और ग्लोबल क्लिनिकल रिसर्च के लिए पसंदीदा जगह के तौर पर भारत की विश्वसनीयता बढ़ाना है.
सीतारमण ने कहा कि ये उपाय न केवल भारत की बढ़ती हेल्थकेयर ज़रूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि देश को हाई-एंड फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग में ग्लोबल वैल्यू चेन में ऊपर ले जाने में भी मदद करेंगे, जिससे एक भरोसेमंद ग्लोबल बायोफार्मा पावरहाउस के रूप में उभरने की भारत की महत्वाकांक्षा मज़बूत होगी. सरकार की कोशिश है कि भारत को इसके जरिए मेडिकल टूरिज्म के जरिए स्थापित करना, जो कि पहले से ही एक सस्ता, सेफ और ट्रस्टेड मेडिकल हब के रूप में ऊभर कर सामने आ रहा है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवीं बार बजट है. इससे सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई द्वारा विभिन्न समयावधियों में पेश किए गए 10 बजटों के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच गई हैं. देसाई ने 1959 से 1964 तक वित्त मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में छह बजट और 1967 से 1969 के बीच चार बजट पेश किए थे. पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी ने अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में क्रमशः नौ और आठ बजट पेश किए थे.
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