ट्रेड डील के लिए भारत नहीं किया 'रेड लाइन' से समझौता, लाख गुहार के बावजूद इन अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए भारतीय बाजार बंद
अमेरिका से ट्रेड डील भारत की शर्तों पर ही की गई है. यूएस को भारत ने रेड लाइन पार नहीं करने दिया. लाख गुहार के बावजूद डेयरी, कृषि सहित कई अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए भारतीय बाजार बंद ही रहेंगे.
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भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के अंतरिम ढांचे की पूरी तस्वीर अब सामने आ चुकी है. समझौते के ऐलान के बाद कांग्रेस की ओर से यह दावा किया जा रहा था कि इस डील में किसानों के हितों की बलि दी गई है, लेकिन अब साफ हो गया है कि भारत ने कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है.
इस अंतरिम समझौते से भारत के कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, हस्तशिल्प, प्लास्टिक, रबर और होम डेकोर जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलेगा. अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर लगाया गया कुल 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. पहले लागू 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. इससे इन सेक्टरों में निर्यात बढ़ेगा और खासतौर पर महिलाओं व युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
कांग्रेस द्वारा किसानों को नुकसान पहुंचने के लगाए जा रहे आरोपों पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी कीमत पर कृषि और डेयरी सेक्टर में कोई समझौता नहीं किया है.
कृषि और डेयरी पूरी तरह प्रोटेक्टेड
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, चावल, गेहूं, मक्का, सोयाबीन, दूध, पनीर, पोल्ट्री और एथेनॉल जैसे उत्पादों को **प्रोटेक्टेड लिस्ट** में रखा गया है. इन उत्पादों के लिए भारतीय बाजार पूरी तरह बंद रहेगा.
अमेरिका के जिन कृषि उत्पादों को भारत में प्रवेश नहीं मिलेगा, उनमें गेहूं, मक्का, चावल, जौ, ज्वार, बाजरा, रागी, ओट्स, अमरंथ, आटा, मैदा, चना, काबुली चना, आलू, प्याज, मटर, बीन्स, मशरूम, दलहनी सब्जियां, फ्रोजन सब्जियां, संतरा, अंगूर, नींबू, स्ट्रॉबेरी और मिक्स डिब्बाबंद सब्जियां शामिल हैं.
डेयरी सेक्टर पर कोई समझौता नहीं
डेयरी उत्पादों जैसे लिक्विड दूध, मिल्क पाउडर, कंडेंस्ड मिल्क, क्रीम, दही, छाछ, मक्खन, घी, बटर ऑयल, पनीर, व्हे प्रोडक्ट्स और चीज़ को भी भारतीय बाजार में एंट्री नहीं दी जाएगी. इससे देश के करोड़ों छोटे डेयरी किसानों और सहकारी मॉडल को मजबूत सुरक्षा मिली है.
मसालों पर भी प्रतिबंध
इसके अलावा काली मिर्च, लौंग, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी, धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवायन, मेथी, सरसों, राई, भूसी और अन्य पिसे हुए मसालों को भी भारतीय बाजार में अनुमति नहीं दी जाएगी.
किसानों के हित सुरक्षित: पीयूष गोयल
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने डेयरी, मांस, मुर्गी पालन, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, तिलहन, पशु आहार उत्पाद और तंबाकू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई छूट नहीं दी है.
उन्होंने यह भी बताया कि कई भारतीय उत्पाद जैसे चाय, मसाले, कॉफी, नारियल तेल, काजू, फल-सब्जियां, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद और तिल अब अमेरिका को **जीरो ड्यूटी** पर निर्यात किए जा सकेंगे.
सेब और कपास पर क्या फैसला हुआ?
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेब और कपास का आयात पहले से होता आ रहा है. सेब के मामले में आयात का बेस प्राइस बढ़ाकर 80 रुपये किया गया है और 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जिससे आयातित सेब की कीमत घरेलू बाजार में ज्यादा रहेगी. साथ ही आयात कोटा भी तय किया गया है, जिससे भारतीय किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा.
भारत को मिली बेहतर डील, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य
इस व्यापार समझौते से भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. भारतीय निर्यातकों, एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर की अमेरिकी अर्थव्यवस्था का बाजार खुलेगा.
भारत अपने प्रतिद्वंदियों से हुआ आगे
अमेरिकी टैरिफ कटौती के बाद भारत अब चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में आ गया है. टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर, केमिकल और इंजीनियरिंग सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता **संतुलित और भारत के हितों के अनुकूल** है. इसमें किसानों, डेयरी सेक्टर, एमएसएमई और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है, जबकि निर्यात को बढ़ावा देकर रोजगार और आर्थिक विकास का रास्ता खोला गया है.
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