जहां फंसे दुनिया के जहाज, वहां भारत ने मारी बाजी; होर्मुज के रास्ते आ रहे हैं दो LPG टैंकर
ईरान की सख्ती के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर हालात बेहद गंभीर हैं. पिछले 24 घंटों में किसी जहाज को गुजरने नहीं दिया. इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर है कि उसके दो एलपीजी टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की मंजूरी मिल गई है.
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मिडिल ईस्ट में बीते कई दिनों से चल रही जंग के चलते दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ईरान ने इस अहम जलमार्ग पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हो रही है. रिपोर्ट कि मुताबिक पिछले 24 घंटों में किसी भी देश के जहाज को यहां से गुजरने की इजाजत नहीं दी गई. ईरान से सीधेतौर पर कहा है कि अगर उसकी अनुमति के बिना कोई जहाज गुज़रने का प्रयास किया तो उसे समुद्र में दफना दिया जाएगा. इसी बीच भारत के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है.
भारत को मिली बड़ी राहत
दरअसल, मौजूदा हालात के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी (LPG) टैंकरों को इस मार्ग से गुजरने की मंजूरी मिल गई है. यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि बिना अनुमति इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है. ऐसे जोखिम भरे माहौल में भारत को मिली यह अनुमति एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है.
शिपिंग डेटा ने बढ़ाई चिंता
रॉयटर्स के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के ये टैंकर फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में खड़े हैं और आगे बढ़ने की तैयारी में हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले एक दिन में इस मार्ग से एक भी कच्चे तेल का टैंकर नहीं गुजरा. यह स्थिति बताती है कि समुद्री गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं और खतरा लगातार बना हुआ है.
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा गहरा असर
दरअसल, फारस की खाड़ी से निकलने वाला करीब 20 फीसदी वैश्विक तेल और एलएनजी इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग पर रुकावट का असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है। फिलहाल सैकड़ों जहाज समुद्र में ही रुके हुए हैं और सुरक्षित संकेत मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
भारत में LPG सप्लाई पर दिख रहा असर
ईरान की सख्ती का असर दुनिया के कई बड़े देशों के साथ-साथ भारत में भी देखने को मिल रहा है. लगातार तीसरे हफ्ते एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित बनी हुई है. हालांकि घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रसोई गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दी है, लेकिन होटल और अन्य व्यवसायिक उपभोक्ताओं को अब भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. शुरुआत में व्यावसायिक सप्लाई पूरी तरह रोक दी गई थी, जिसे बाद में आंशिक रूप से बहाल किया गया. इसके साथ ही केंद्र और तमाम राज्य सरकारों ने जनता से LPG के साथ-साथ घरेलू उपयोग के लिए विकल्प के इस्तेमाल करने के लिए कहा है.
ईरान-इजरायल तनाव में अमेरिका की क्या है भूमिका?
वैश्विक मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के साथ अमेरिका की सक्रियता ने हालात को और गंभीर बना दिया है. लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमलों ने सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. हालांकि भारत के दो टैंकरों को मिली अनुमति से यह उम्मीद जरूर जगी है कि स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है. लेकिन फिलहाल हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं और हर कदम बेहद सावधानी के साथ उठाया जा रहा है.
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बहरहाल, मौजूदा समय में बनी परिस्थिति यह दिखा रही है कि दुनिया ऊर्जा आपूर्ति के लिए कुछ सीमित समुद्री मार्गों पर कितनी निर्भर है. जब इन रास्तों पर संकट आता है, तो उसका असर सीधे आम लोगों तक पहुंचता है, खासकर रसोई और रोजमर्रा की जरूरतों पर.
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