ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने पानी के अंदर से हमला कर डुबोया, 87 की मौत, 100 से ज्यादा लापता, VIDEO

ईरान के साथ जंग के बीच US नेवी की एक पनडुब्बी ने पानी के अंदर से हमला कर एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया. इस प्रकार की घटना सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद संभवतः पहली बार हुई है.

US Department of War (Screengrab)

इजरायल और अमेरिका के साथ जंग में ईरान को तगड़ा झटका लगा है. अमेरिका ने उसके एक जहाज पर तगड़ा हमला कर उसे डुबो दिया है. ख़बर के मुताबिक श्रीलंका के दक्षिणी तट पर एक अमेरिकी पनडुब्बी ने पानी के अंदर से ये वार किया और ईरानी युद्धपोत को नष्ट कर दिया, जिसमें 87 से ज्यादा लोग मारे गए. 

श्रीलंका ने की ईरानी युद्धपोत पर हमले की पुष्टि!

इस घटना ने ईरानी नौसेना के खिलाफ वाशिंगटन के अभियान को और भी व्यापक बना दिया. श्रीलंका के उप विदेश मंत्री ने युद्धपोत की पहचान फ्रिगेट आईआरआईआईएस डेना के रूप में की और बताया कि यह हमला खाड़ी से सैकड़ों मील दूर हिंद महासागर के पार हुआ, जहां अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान पर हमला कर रही हैं और तेहरान मिसाइल और ड्रोन हमलों से पलटवार कर रहा है.

सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद पहली पार अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागे!

रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का इस्तेमाल करके दुश्मन का युद्धपोत नष्ट किया है. आपको बताएं कि यह हमला ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान हुआ, जो ईरान की मिसाइल और नौसैनिक क्षमताओं को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाली अभियान है. पेंटागन प्रेस ब्रीफिंग में WAR सेक्रेटरी सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि यह हमला अमेरिकी नौसैनिक शक्ति की पहुंच को दर्शाता है.

उन्होंने कहा, "वास्तव में, कल भारतीय महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया...उसे लगा कि वह अंतरराष्ट्रीय जल में सुरक्षित है. यह जहाज टॉरपीडो हमले से डूबा, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार हुआ.”

87 लोगों की मौत की पुष्टि!

श्रीलंका के बंदरगाह शहर गाले के अस्पताल अधिकारियों ने बताया कि तड़के मिली आपातकालीन सूचना पर सैन्य बचाव दल ने 87 शवों को अस्पताल पहुंचाया. श्रीलंकाई अधिकारियों ने बताया कि 32 अन्य लोगों को बचाया गया है और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है. जहाज पर सवार अनुमानित 180 लोगों में से लगभग 60 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है.

एक ही टॉरपीडो से ईरानी जहाज नष्ट!

वहीं इस अटैक को लेकर ज्वाइंट मिलिट्री कमांड के चीफ, एयर फ़ोर्स जनरल डैन केन ने भी इस हमले की पुष्टि की और इसे एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण नौसैनिक अभियान बताया केन ने कहा, "1945 के बाद पहली बार, अमेरिकी नौसेना की एक फास्ट-अटैक पनडुब्बी ने एक ही मार्क 48 टॉरपीडो का इस्तेमाल कर दुश्मन के युद्धपोत को तुरंत प्रभाव से डुबो दिया, और वह युद्धपोत समुद्र की गहराई में चला गया."

पेंटागन के अनुसार, ईरानी जहाज उस समय मुख्य युद्ध क्षेत्र से बाहर था जब इसे निशाना बनाया गया. केन ने कहा कि यह हमला दिखाता है कि अमेरिकी सेनाएं दुश्मन जहाजों को मुख्य युद्ध क्षेत्र से दूर भी ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम हैं. उन्होंने कहा, “दूर के क्षेत्र में तैनात दुश्मन को ढूंढना और उसे नष्ट करना केवल अमेरिका ही इस पैमाने पर कर सकता है.”

'लोग पानी में डूबते दिखे' 

पेंटागन के एक वीडियो में, जिसमें सबमरीन हमले का दावा किया गया है, उस युद्धपोत पर एक भीषण विस्फोट को देखा जा सकता है. इससे उसका पिछला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया, वह पानी से ऊपर उठ गया और फिर पीछे से डूबने लगा. वीडियो कब फिल्माया गया था और युद्धपोत का प्रकार क्या था, इसकी सटीक पुष्टि नहीं की जा सकी. हालांकि, वीडियो में दिख रहे युद्धपोत के डेक का आकार और मस्तूल, आईआरआईएस डेना नामक युद्धपोत के समान प्रकार के युद्धपोत की तस्वीरों से मेल खाते हैं.

20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट

यह कार्रवाई ईरान की नौसैनिक शक्ति को कमजोर करने वाले व्यापक अभियान का हिस्सा है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अब तक संघर्ष के दौरान 20 से अधिक ईरानी नौसैनिक जहाज नष्ट किए जा चुके हैं. केन ने कहा, "हम ईरानी नौसेना को नष्ट कर रहे हैं, उसकी क्षमता और संचालन शक्ति को कम कर रहे हैं."

पेंटागन ने बताया कि यह नौसैनिक अभियान इसलिए चलाया जा रहा है ताकि ईरान समुद्री व्यापार मार्गों को खतरे में न डाल सके और अपनी सैन्य शक्ति का विस्तार न कर सके. इस अभियान में इजरायल सहित सहयोगी बल भी शामिल हैं, और अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर्स और स्ट्राइक ग्रुप पूरे क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ईरान की नौसैनिक शक्ति को निष्क्रिय करना इस अभियान के मुख्य लक्ष्यों में से एक है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और सैन्य आधारों को नष्ट करना भी इसका हिस्सा है.

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