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ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक! ईरान के परमाणु हथियार बैन और होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर एक हुए अमेरिका-चीन, अब क्या करेगा तेहरान?

राष्ट्रपति ट्रंप और शी जिनपिंग ईरान को परमाणु हथियारों से रोकने पर सहमत हुए और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने और बाजार पहुंच पर सकारात्मक चर्चा हुई.

Image source: Xinhua via IANS
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बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बात पर सहमत हो गए हैं कि ईरान को परमाणु हथियार संपन्न होने की इजाजत नहीं दी जा सकती. व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी.

परमाणु हथियार पर जिनपिंग और ट्रंप ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सकारात्मक और अहम बैठक हुई. बैठक में दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच "आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की”. इसमें अमेरिकी कंपनियों के लिए चीन के बाजार तक ज्यादा पहुंच और अमेरिकी उद्योगों में चीनी निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दे शामिल रहे. बैठक के एक हिस्से में अमेरिका की कई बड़ी कंपनियों के प्रमुख भी शामिल हुए.

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फेंटेनिल तस्करी रोकने पर भी सहमती बनी

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दोनों नेताओं ने अमेरिका में फेंटेनिल से जुड़े रसायनों (फेंटेनिल प्रीकर्सर्स) की तस्करी रोकने की दिशा में जारी सहयोग को आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. इसके अलावा चीन की ओर से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर भी चर्चा हुई.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और चीन ने क्या कहा? 

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बैठक में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. दोनों देशों ने माना कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को सुचारु बनाए रखने के लिए इस अहम समुद्री मार्ग का खुला रहना जरूरी है. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने होर्मुज स्ट्रेट के सैन्यीकरण का विरोध किया और इस मार्ग के इस्तेमाल पर किसी तरह का शुल्क या टोल लगाने की कोशिशों को भी गलत बताया. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन भविष्य में अमेरिका से ज्यादा तेल खरीदने में रुचि रखता है, ताकि इस समुद्री मार्ग पर अपनी निर्भरता कम की जा सके. 

अमेरिका और चीन कई मुद्दों पर एकमत

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व्हाइट हाउस ने अपने बयान में दोहराया कि अमेरिका और चीन दोनों इस बात पर एकमत हैं कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए. यह चर्चा ट्रंप के तीन दिवसीय चीन दौरे के दौरान हुई, जिसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को नए सिरे से संतुलित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. 

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