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BLA-TTP के हमलों से घिरी पाक सेना में हड़कंप, नौकरी छोड़कर जा रहे सैनिक, रिटायर्ड अफसरों को वापस आने का ऑर्डर
एक तरफ खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा लगातार जारी है, दूसरी ओर सैनिकों की भारी कमी हो गई है. इन हमलों ने पाक का डिफेंस सिस्टम ध्वस्त कर दिया.
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बलूच आर्मी के हमलों से पाकिस्तानी सेना में हाहाकार मचा हुआ है. भारी खतरे के बीच कुछ सैनिकों के नौकरी छोड़ने की भी खबर है. सैनिकों के ऐसे फैसलों से पाक आर्मी चीफ आसिम मुनीर बेचैन हैं. ऐसे में बताया जा रहा है कि सेना पर आए इस सकंट को देखते हुए पाकिस्तान में रिटायर्ड सैनिकों को वापस बुलाया जा रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान (उत्तर) के इंस्पेक्टर जनरल ने एक आधिकारिक संदेश में रिटायर्ड सैनिकों से तुरंत रिपोर्ट करने और दोबारा भर्ती होने को कहा है. इस संदेश में 30 अक्टूबर तक रिटायर्ड कर्मचारियों को वापस लौटने के लिए कहा गया है.
BLA-TTP के ताबड़तोड़ हमले
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एक तरफ खैबर पख्तूनख्वा में हिंसा लगातार जारी है, दूसरी ओर सैनिकों की भारी कमी हो गई है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे गुटों के हमलों जारी है. जिसके बाद पाक आर्मी मुसीबत से घिरी है.
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हालातों पर नजर रख रहे एक्सपर्ट का कहना है कि पाक में बलूच आर्मी और तालिबान के हमलों ने पाक का डिफेंस सिस्टम ध्वस्त कर दिया. इसलिए पाकिस्तान के पुलिस थानों, बॉर्डर के पास पुलिस चौकियों और सेना के कैंपों को मछली पकड़ने वाले नेट से ढका जा रहा है. एक तरफ पाकिस्तानी सेना सैनिकों की कमी से जूझ रही है दूसरी ओर डिफेंस के नाम पर फिश नेट जैसे सस्ते तरीके अपनाए जा रहे हैं. रिपोेर्ट्स के मुताबिक, अकेले सितंबर में, अलगाववादी गुटों ने सुरक्षा बलों पर 94 हमले किए. BLA ने दावा किया कि इन हमलों में उसने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 105 जवानों को मार गिराया.
एक अधिकारी के हवाले से न्यूज एजेंसी IANS ने बताया कि इस तरह के संदेश का दूसरा कारण यह हो सकता है कि पाकिस्तान सेना इन इलाकों में अपने ऑपरेशन तेज करने की तैयारी कर रही है. बीएलए और बीएलएफ जैसे गुटों ने अपनी क्षमताएं काफी बढ़ा ली हैं और महिला सुसाइड यूनिट भी बनाई हैं, जिन्होंने सुरक्षा बलों पर सफल हमले भी किए हैं.
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रिटायर्ड सैनिकों के पहले जितना ही मिलेगा वेतन
जानकारों का कहना है, ‘इससे पता चलता है कि सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है, जिसके कारण उनके सैनिकों की संख्या कम हो गई है.’ हालांकि संदेश में 30 अक्टूबर की समय-सीमा बताई गई है, लेकिन इसमें रिटायर्ड सैनिकों की वापसी को अनिवार्य नहीं किया गया है, साथ ही, वापस आने वालों के लिए कोई उम्र सीमा भी तय नहीं की गई है. वापस आने वालों को फायदा यह होगा कि उन्हें उनकी पिछली सर्विस के हिसाब से सैलरी दी जाएगी.
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हाल के वर्षों में पाकिस्तान अपने रिटायर्ड सैनिकों की मदद लेने की ओर तेजी से बढ़ा है. कई लोगों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के साथ मिलकर लड़ने के लिए शामिल किया गया है. अधिकारी ने कहा, ‘इसके पीछे की वजह यह है कि ये रिटायर्ड जवान अनुभवी हैं और तुरंत ऑपरेशन शुरू कर सकते हैं और उन्हें किसी खास ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती.’
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बीएलए ने खास तौर पर चेकपोस्ट और मिलिट्री काफिलों को निशाना बनाया है; ऐसे हमलों में घात लगाकर किए गए हमलों से सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
डर से नौकरी छोड़ रहे सैनिक
इन ग्रुप्स के हमलों की वजह से जवान मारे जा रहे हैं, और इसी वजह से रिटायर्ड जवानों को वापस बुलाया जा रहा है, तो दूसरी वजह नौकरी छोड़कर लापता होने वालों की बढ़ती तादाद है. कई जवानों ने या तो नौकरी छोड़ दी है या वे लापता हो गए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि वे मारे जा सकते हैं. अधिकारी ने कहा, ‘उनका मनोबल गिरा हुआ है और वे अब लड़ना नहीं चाहते, इसलिए वे नौकरी छोड़ रहे हैं.’
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बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों में बीएलए, बीएलएफ और टीटीपी का पूरा कब्जा है. स्थानीय लोगों से मिल रहे समर्थन से उनकी ह्यूमन इंटेलिजेंस (लोगों से मिलने वाली जानकारी) और मजबूत हुई है. इसका मतलब यह भी है कि स्थानीय लोग सुरक्षा बलों को जानकारी नहीं दे रहे हैं, और इसी वजह से हताहतों की संख्या ज्यादा है.
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बीएलए और बीएलएफ ने मस्तुंग, नुश्की, खान, टेक, वाशुक और पंजूर इलाकों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. ये इलाके बीएलए के गढ़ माने जाते हैं.